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जंतर मंतर पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बनाई हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी | Supreme Court forms committee to probe excessive use of force at Jantar Mantar


जंतर मंतर पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बनाई हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी

सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की जांच करेगा.

जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग की अब जांच होगी. सुप्रीम कोर्ट ने जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स और दूसरे सुरक्षा कर्मियों द्वारा जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के आरोपों की जांच के लिए पांच सदस्यों वाली एक हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) बनाई है. इस कमेटी के प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी हैं.

कमेटी इन सभी मुद्दों की जांच करेगी

प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग

  • पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित रूप से अत्यधिक बल प्रयोग की जांच होगी
  • इसमें पेलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल जैसे आरोप शामिल हैं 
  • पुलिस कार्रवाई कितनी आनुपातिक होनी चाहिए
  • कमेटी यह देखेगी कि विरोध प्रदर्शन और शांतिपूर्ण सभाओं के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकार के बीच उचित संतुलन कैसे बनाया जाए 

पेलेट/मेटैलिक प्रोजेक्टाइल पर रोक का सवाल

  • पंप-एक्शन राइफल या अन्य हथियारों से दागे जाने वाले मेटैलिक पेलेट के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए या नहीं—इस पर भी विचार होगा, खासकर गंभीर और स्थायी चोटों को देखते हुए 
  • गिरफ्तारी या भीड़ नियंत्रण के दौरान पुलिस एवं सुरक्षा कर्मियों के वर्दी और स्पष्ट नाम-प्लेट  पहनने की व्यवस्था की जरूरत पर विचार होगा, ताकि किसी अधिकारी की पहचान और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके 

प्रदर्शनकारियों की निगरानी

  • प्रदर्शनकारियों की कथित पुलिस निगरानी और Surveillance की जांच होगी और यह देखा जाएगा कि ऐसी निगरानी उनके निजता और शांतिपूर्ण जमावड़े के संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप थी या नहीं 

महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित हिंसा/उत्पीड़न

  • महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित लक्षित हिंसा, उत्पीड़न, छेड़छाड़/यौन दुर्व्यवहार और सेकेंडरी विक्टिमाइजेशन के आरोपों की विशेष और शीघ्र जांच का मुद्दा रखा गया है

पीड़ितों को चिकित्सा सहायता और मुआवजा

  • कथित पुलिस ज्यादती से प्रभावित लोगों को मिली चिकित्सा सहायता, अन्य राहत और मुआवजे की पर्याप्तता की भी समीक्षा होगी 

BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा

  • कमेटी यह देखेगी कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत बलेंकेट निषेधाज्ञा आदेशों का इस्तेमाल कहीं नियमित या पूर्व-Emptive तरीके से तो नहीं हो रहा
  • सवाल यह है कि ऐसी पाबंदियां वास्तविक और आसन्न सार्वजनिक व्यवस्था के खतरे के अनुपात में ही लगाई जाएं और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार को अनावश्यक रूप से खत्म न करें

कमेटी के सदस्य:

  • जस्टिस (सेवानिवृत्त) आर. सुभाष रेड्डी — सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश, अध्यक्ष
  • जस्टिस रवि शंकर झा — पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, सदस्य
  • जस्टिस शालिंदर कौर — दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश, सदस्य
  • ऋषि कुमार शुक्ला — CBI के पूर्व निदेशक, सदस्य
  • डॉ. एल.आर. बिश्नोई — मेघालय के सेवानिवृत्त DGP, सदस्य

कोर्ट ने कहा है कि सदस्यों के अनुभव, विशेषज्ञता और कमेटी की विविधता को ध्यान में रखते हुए इसका गठन किया गया है. कोर्ट ने कहा कि उसे उम्मीद है कि HPEC की रिपोर्ट उसे आगे के फैसले में महत्वपूर्ण सहायता देगी.

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