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छठ पूजा का 65 साल पुराना गाना, मगध की मिट्टी की खुशबू ने बढ़ाई थी त्योहार की रौनक, आज भी लोगों की पहली पसंद | 65 year old Chhath Puja song usha mangeshkar sang remains top favorite among people till today



नई दिल्ली:

तमन्ना भाटिया हाल में ‘द वन’ नाम की एक फिल्म में नजर आईं. इस फिल्म में तमन्ना ने छठ पर्व पर एक गीत किया जिसे सोशल मीडिया और यूट्यूब पर बहुत प्यार मिला और पसंद किया गया. लेकिन आज हम आपको छठ पर्व के एक पुराने क्लासिक गाने के बारे में बताने जा रहे हैं. इस गाने को छठ पूजा पर बने सबसे पुराने गानों में से एक माना जाता है. ये गाना साल 1961 में आई फिल्म ‘भैया’ का एक मगही गीत था.

इस गीत का नाम “सुपवे नरियरवे” है. यह फणी मजूमदार के डायरेक्शन में बनी भईया फिल्म का एक मशहूर गीत हुआ. इस गीत की भाषा मगही/हिंदी थी. फिल्म में ग्रामीण बिहार की संस्कृति, परिवार और छठ पूजा जैसे लोक पर्वों को दिखाया गया है. उस दौर की सादगी और भक्तिभाव इस गीत में साफ झलकता है. गाने का टाइटल है “सुपवे नरियरवे”. इसमें छठ पूजा की तैयारी, नदी किनारे अर्घ्य, नारियल-सुपारी और महिलाओं की भक्ति के बारे में बताया गया है. 

महिलाएं छठी मैया और सूर्य देव की आराधना करती नजर आती हैं. गीत की भाषा मगही है, जो बिहार-झारखंड की लोक संस्कृति को जीवंत बनाती है. यह गीत आज भी पुराने दिनों की याद दिलाता है और छठ पूजा के मौके पर सुना जाता है. इसे खास बनाती है उषा मंगेशकर की आवाज जिन्होंने अपने सुरों से इसमें ऐसी मिठास घोली कि आज तक लोग इसे पसंद करते हैं. यह गाना अपनी सादगी, लोक धुन और भक्ति के कारण आज भी इंटरनेट पर पॉपुलर है. पुरानी फिल्मों के गाने पसंद करने वाले लोग इसे आज भी सुनते हैं.

छठ पूजा के पॉपुलर गाने

छठ पूजा के मौके पर ये गाने सोशल मीडिया और यूट्यूब पर सबसे ज्यादा सुने जाते हैं-

1- पहिले पहिल छठी मैया – शारदा सिन्हा (सबसे प्रसिद्ध और भावनात्मक गीत)
2- केलवा के पात पर – शारदा सिन्हा
3- उगा हो सूरज देव या उगा है सूरज देव – अनुराधा पौडवाल
4- कांच ही बांस के बहंगिया – अनुराधा पौडवाल
5- जोडे जोडे फलवा / जोडे जोडे सुपवा – पवन सिंह या शारदा सिन्हा
6- मारबो रे सुगवा धनुख – अनुराधा पौडवाल

ये गाने बिहार-झारखंड-उत्तर प्रदेश की छठ परंपरा को और भी जीवंत बनाते हैं. शारदा सिन्हा को तो छठ गीतों की रानी कहा जाता है. छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया की आराधना का पर्व है. इस गाने जैसी पुरानी रचनाएं हमें याद दिलाती हैं कि हमारी संस्कृति कितनी समृद्ध और भावपूर्ण है.

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