खबर

चीन में परीक्षा के लिए लाल कपड़े क्यों पहनती हैं माएं? जानिए गाओकाओ से जुड़ी दिलचस्प परंपराएं | china gaokao exam traditions red clothes sunflower parents culture



कल्पना कीजिए कि किसी एक्जाम के दौरान माता-पिता छुट्टी ले लें, एक्जामिनेशन सेंटर के बाहर घंटों इंतजार करें, बच्चों को गुडलक विश के लिए खास रंग के कपड़े पहनें और पूरा देश कई दिनों तक उसी परीक्षा की चर्चा करता रहे. चीन में हर साल ऐसा नजारा देखने को मिलता है.

यहां गाओकाओ (Gaokao) नाम की परीक्षा को सिर्फ छात्रों का एग्जाम नहीं माना जाता, बल्कि यह पूरे परिवार की उम्मीदों, सपनों और सालों की मेहनत से जुड़ा एक बड़ा पड़ाव होती है. यही वजह है कि परीक्षा के दिनों में चीन के कई शहरों में माहौल बिल्कुल अलग नजर आता है. सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक, हर जगह गाओकाओ की चर्चा होती है और लाखों परिवार अपने बच्चों की सफलता के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते दिखाई देते हैं.

आखिर क्या है गाओकाओ?

गाओकाओ चीन का नेशनल यूनिवर्सिटी एंट्रेंस एग्जाम है. यह हर साल जून में होता है और देशभर के छात्र इसमें शामिल होते हैं. 2026 में यह एग्जाम 7 जून से 10 जून के बीच हुआ, जिसमें करीब 1.29 करोड़ छात्रों ने हिस्सा लिया. इसके नतीजे तय करते हैं कि छात्रों को किस यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिलेगा. चीन की कई बड़ी और नामी यूनिवर्सिटी तक पहुंचने का सबसे बड़ा रास्ता यही एग्जाम माना जाता है.

इस एग्जाम को इतना अहम क्यों माना जाता है?

गाओकाओ को अक्सर छात्रों की जिंदगी का सबसे अहम एग्जाम कहा जाता है. इसकी वजह सिर्फ पढ़ाई नहीं है. चीन में अच्छी यूनिवर्सिटी में एडमिशन बेहतर करियर और आगे मिलने वाले मौकों से जुड़ा माना जाता है. खासकर छोटे शहरों और साधारण परिवारों के लिए यह एग्जाम जिंदगी बदलने वाला मौका समझा जाता है. यही कारण है कि कई छात्र सालों तक इसकी तैयारी करते हैं और परिवार भी हर कदम पर उनका साथ देता है.

एग्जाम सेंटर के बाहर क्यों खड़े रहते हैं माता-पिता?

गाओकाओ के दौरान चीन में एक नजारा लगभग हर साल देखने को मिलता है. छात्र एग्जाम हॉल के अंदर होते हैं और उनके माता-पिता बाहर इंतजार करते दिखाई देते हैं. कई परिवार घंटों तक एग्जाम सेंटर के बाहर खड़े रहते हैं. यह सिर्फ बच्चों को लेने आने की बात नहीं होती, बल्कि उनके साथ खड़े रहने और उनका हौसला बढ़ाने का तरीका भी माना जाता है. कई माता-पिता मानते हैं कि इस अहम दिन पर उनका साथ बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाता है.

सूरजमुखी के फूल क्यों दिए जाते हैं?

गाओकाओ के दौरान सूरजमुखी के फूल भी खूब दिखाई देते हैं. कई परिवार एग्जाम देने वाले बच्चों को सूरजमुखी देते हैं. इसे अच्छे नतीजों, कामयाबी और उज्ज्वल भविष्य की दुआ से जोड़कर देखा जाता है. इसे गुडलक के रूप में देखा जाता है. यही कारण है कि सूरजमुखी यानि सनफ्लावर भी इस एग्जाम कल्चर से जुड़ सा गया है. एग्जाम खत्म होने के बाद कई छात्र एग्जाम सेंटर से बाहर निकलते समय हाथों में सूरजमुखी के गुलदस्ते लिए दिखाई देते हैं. 

लाल कपड़ों का क्या है कनेक्शन?

चीन की संस्कृति में लाल रंग को खुशी, अच्छी किस्मत और अच्छे नतीजों से जोड़कर देखा जाता है. यही वजह है कि गाओकाओ के दौरान कई माता-पिता, खासकर माताएं, लाल रंग के कपड़े पहनती हैं. माना जाता है कि यह बच्चों के लिए अच्छे नतीजों और शानदार शुरुआत की कामना की निशानी है. एग्जाम सेंटरों के बाहर लाल कपड़ों में खड़े माता-पिता का नजारा अब गाओकाओ का आम हिस्सा बन चुका है.

बदल जाता है पूरे देश का माहौल

गाओकाओ के दिनों में कई शहरों में ट्रैफिक व्यवस्था तक बदली जाती है ताकि छात्रों को एग्जाम सेंटर तक पहुंचने में परेशानी न हो. शोर कम रखने की अपील की जाती है और स्थानीय अधिकारी भी एग्जाम बिना किसी परेशानी के कराने के लिए खास इंतजाम करते हैं. इससे समझा जा सकता है कि चीन में इस एग्जाम को कितनी गंभीरता से लिया जाता है.

शायद यही वजह है कि गाओकाओ को सिर्फ एक यूनिवर्सिटी एंट्रेंस एग्जाम नहीं माना जाता. यह पढ़ाई, परिवार और उम्मीदों से जुड़ा ऐसा मौका है, जो हर साल करोड़ों लोगों को एक साथ जोड़ देता है. लाल कपड़ों से लेकर सूरजमुखी के फूलों तक, इससे जुड़ी मान्यताएं बताती हैं कि चीन में गाओकाओ सिर्फ एक परीक्षा नहीं बल्कि लाखों परिवारों से जुड़ा एक इमोशन है.

यह भी पढ़ें- लक्षद्वीप घूमने का बना रहे हैं प्लान? जानिए परमिट कैसे मिलता है और क्या हो सकती है 7 दिन की ट्रैवल आइटनरी





Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button