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 गाजियाबाद में खाद की किल्लत पर भड़के किसान, सहकारी समिति के गोदाम से जबरन उठा ले गए 350 कट्टे यूरिया | fertilizer Crisis Farmers in Ghaziabad, enraged by the shortage of fertilizer, forcibly took away 350 bags of urea from a cooperative society warehouse


उत्तर प्रदेश में खाद संकट गहराता जा रहा है. इस बीच किसानों के सब्र का बांध भी अब टूटने लगा, जिसका एक नजारा रविवार को  गाजियाबाद स्थित मोदीनगर क्षेत्र में देखने को मिला.  दरअसल, गाजियाबाद के मोदीनगर के गांव कादराबाद में खाद न मिलने और कालाबाजारी के आरोपों से नाराज सैकड़ों किसानों का धैर्य जवाब दे गया. सहकारी समिति के गोदाम पर पहुंचे किसानों ने पहले, तो जमकर हंगामा किया और फिर देखते ही देखते गोदाम में रखे करीब 350 कट्टे यूरिया जबरन अपने साथ उठा ले गए. इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने प्रशासनिक महकमे में खलबली मचा दी है.

बताया जा रहा है कि गोदाम पर खाद की किल्लत को लेकर पिछले कुछ दिनों से तनाव का माहौल था. इसी बीच गुस्साए किसान बिना कोई सरकारी औपचारिकता पूरी किए, यानी बिना आधार कार्ड और जमीन की फर्द दिए ही गोदाम के भीतर घुस गए. बोरे उठाने को लेकर किसानों के बीच भारी आपाधापी मच गई, जब वहां तैनात सहायक राकेश कुमार ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो किसानों और उनके बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी हुई. सहायक ने तुरंत मामले की सूचना स्थानीय पुलिस को दी, लेकिन जब तक पुलिस मौके पर पहुंचती, तब तक किसान पूरा गोदाम खाली कर चुके थे.

कार्रवाई के बजाय शांति बनाने पर जोर

इस संवेदनशील मामले को लेकर प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप तो है, लेकिन रुख काफी नरम दिखाई दे रहा है. एसडीएम (SDM) अजीत सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए एक कमेटी का गठन जरूर कर दिया है. वहीं दूसरी ओर, समिति प्रशासन ने कानूनी दांव-पेंच में फंसने के बजाय व्यावहारिक रास्ता निकाला और अधिकारियों ने गांवों में घर-घर जाकर किसानों से उठाए गए यूरिया की राशि वसूल की. दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे घटनाक्रम में अब तक कोई पुलिसिया कार्रवाई (FIR) नहीं की गई है. चूंकि मामला सीधे तौर पर अन्नदाताओं से जुड़ा है और सरकार के खिलाफ कोई राजनीतिक या सामाजिक माहौल न बन जाए, इसलिए स्थानीय प्रशासन इस विवाद को ज्यादा तूल देने के मूड में नहीं है. यही वजह है कि आला अधिकारी इस पर कोई भी तीखा आधिकारिक बयान देने से साफ बच रहे हैं.

तीन दिन में मांगी रिपोर्ट

इधर, सहकारिता विभाग के सहायक रजिस्ट्रार (AR) अमित कुमार त्यागी ने साफ किया है कि जिले में खाद के वितरण को लेकर सख्त नियम तय हैं. उन्होंने कहा कि सभी सचिवों को पीओएस (POS) मशीन के माध्यम से नियमानुसार ही किसानों को खाद बांटने के निर्देश दिए गए हैं. इसके बावजूद अगर कादराबाद समिति में किसी भी तरह की अनियमितता या लापरवाही सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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विभाग ने जांच समिति को तीन दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है. इसके साथ ही प्रशासन ने किसानों से पैनिक न होने की अपील की है. अधिकारियों का दावा है कि जनपद में उर्वरक की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त मात्रा में स्टॉक उपलब्ध है. किसानों से आग्रह किया गया है कि वे फसल की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार ही यूरिया का उठाव करें और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें.

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अभिषेक शर्मा

संवाददाता




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