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खनिज संशोधन बिल पर झारखंड में सियासी संग्राम, BJP बोली भ्रम ना फैलाएं, JMM का पलटवार- दिल्ली का पहरा क्यों? | Political battle in Jharkhand over Mineral Amendment Bill; BJP says dont spread misinformation JMM hits back



रांची:

संसद से पारित माइंस एंड मिनरल्स डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन अमेंडमेंट बिल, 2026  (MMD संशोधन बिल) को लेकर झारखंड में सियासी घमासान तेज हो गया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विरोध पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि सरकार बिल के बहाने जनता को गुमराह कर रही है और छात्र आंदोलन से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है. वहीं, झामुमो महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने भाजपा पर झारखंड के संवैधानिक अधिकारों से जुड़े सवालों का जवाब देने से बचने का आरोप लगाया है.

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने क्या कहा?

आदित्य साहू ने कहा कि संशोधन विधेयक से राज्यों के भूमि और खनिज अधिकार खत्म नहीं होते. रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, DMF, राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट और GST में राज्यों की हिस्सेदारी भी जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि विधेयक खनन क्षेत्र में एकरूपता, पारदर्शिता और निवेश को बढ़ावा देने वाला कदम है. साहू ने झारखंड सरकार से सवाल किया कि खनिज संपदा से समृद्ध राज्य होने के बावजूद उसके कार्यकाल में 
केवल तीन खनिज ब्लॉकों की नीलामी क्यों हुई, जबकि ओडिशा में 45 और छत्तीसगढ़ में 49 ब्लॉकों की नीलामी हुई.

भाजपा नेता ने DMF फंड में कथित गड़बड़ी और अवैध खनन को लेकर भी राज्य सरकार को घेरा. साथ ही कहा कि जब छात्र CBI जांच की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, तब खनिज संशोधन को लेकर नया आंदोलन खड़ा करना मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश है.

उधर, विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि असली सवाल यह है कि अगर केंद्र का कानून राज्यों के अधिकारों को प्रभावित नहीं करता, तो खनिजयुक्त भूमि पर राज्य सरकारों के कर और सेस को केंद्र द्वारा तय शर्तों के अधीन करने की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने जुलाई 2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि खनिजयुक्त भूमि पर कर लगाने का अधिकार राज्यों को है.

झामुमो ने कहा- राजस्व नुकसान की भरपाई कौन करेगा

झामुमो ने दावा किया कि JMBL Cess से झारखंड को आने वाले वर्षों में हजारों करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है. पार्टी ने सवाल उठाया कि यदि इस राजस्व स्रोत पर असर पड़ा तो उसकी भरपाई कौन करेगा. झामुमो ने साफ कहा कि खनिज झारखंड की जमीन से निकलता है, इसलिए उससे होने वाले राजस्व और प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर निर्णय का अधिकार भी राज्य के पास रहना चाहिए.

एमएमडीआर संशोधन बिल अब झारखंड में भाजपा और झामुमो के बीच सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि राज्य के खनिज अधिकार और राजस्व के सवाल पर सीधी लड़ाई बनता जा रहा है.    

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