

नई दिल्ली:
बॉलीवुड की दुनिया में सितारों के बीच प्रतिस्पर्धा होना आम बात है. संगीतकारों और गायकों के मामले में भी ऐसा ही है. ऐसी ही एक कथित प्रतिद्वंद्विता दिग्गज गायकों किशोर कुमार और मोहम्मद रफी के बीच बताई जाती थी. उस दौर में ऐसी अफवाहें उड़ी थीं कि किशोर कुमार, मोहम्मद रफी के साथ गाने नहीं गाना चाहते थे. मोहम्मद रफी और किशोर कुमार इस इंडस्ट्री के सबसे मशहूर गायकों में से हैं, जिन्होंने कई सुपरहिट गाने दिए हैं और अपनी जादुई आवाज से फैंस के दिलों पर राज किया.
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उस दौर में मोहम्मद रफी सबसे ज्यादा मांग में रहने वाले गायक माने जाते थे, जबकि हिंदी फिल्म और संगीत जगत के जाने-माने गायक किशोर कुमार, फिल्म ‘आराधना’ के रिलीज होने के बाद बेहद मशहूर हो गए और नंबर वन के मुकाम पर पहुंच गए. किशोर कुमार के गाने ‘मेरे सपनों की रानी’, ‘कोरा कागज था ये मन मेरा’ और ‘रूप तेरा मस्ताना’ ने दर्शकों का दिल जीत लिया.
‘दास्तान-ए-रफी’ नाम की एक डॉक्यूमेंट्री में गायक सुदेश भोंसले ने खुलासा किया कि यह प्रतिद्वंद्विता असल में थी ही नहीं, बल्कि इसे पत्रिकाओं द्वारा गढ़ा गया था. किशोर कुमार ने एक बार आपसी प्रतिद्वंद्विता के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था, “रफी साहब मेरे पिता के सीनियर थे. दोनों तरफ से एक-दूसरे के लिए बहुत सम्मान था.” मोहम्मद रफी और किशोर कुमार ने पहली बार 1956 की फिल्म ‘भागम भाग’ में साथ काम किया था. उन्होंने फिल्म ‘यादों की बारात’ (1973) का टाइटल ट्रैक गाया और बाद में ‘परवरिश’ फिल्म का गाना ‘हम प्रेमी प्यार करना चाहें’ सहित कई अन्य गानों में भी साथ काम किया.
‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, मोहम्मद रफी के बेटे शाहिद रफी ने एक इंटरव्यू में इन अफवाहों पर बात की. उन्होंने साफ किया कि उन्होंने कभी अपने पिता को किशोर कुमार के बारे में कुछ भी बुरा कहते नहीं सुना. उन्होंने बताया कि वे बहुत अच्छे दोस्त थे और किशोर कुमार उनके पिता का बहुत सम्मान करते थे. उन्होंने यह भी बताया कि उनके पिता घर आकर अक्सर कहते थे कि आज उन्हें बहुत मजा आया, क्योंकि उन्हें किशोर कुमार के साथ गाने का मौका मिला.
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खबरों के मुताबिक, 31 जुलाई 1980 को जब 55 साल की उम्र में मोहम्मद रफी का निधन हुआ, तो किशोर कुमार उनके घर पहुंचे. वहां वह खुद को संभाल नहीं पाए. बताया जाता है कि किशोर कुमार ने मोहम्मद रफी के पैर पकड़ लिए और फूट-फूटकर रोने लगे.





