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‘ईरान परमाणु बम बनाने के करीब था, उससे एनरिच्ड यूरेनियम लेना अब भी मुश्किल…’ : IAEA चीफ | Iran was close to building a nuclear bomb; retrieving enriched uranium from it remains difficult says IAEA Chief


इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह US-ईरान डील को लागू करने के लिए जरूरी “ठोस कदम” तय करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए तैयार है. IAEA के प्रमुख राफाल ग्रॉसी ने जिनेवा में पत्रकारों से कहा, “अब हमें अपने अमेरिकी और ईरानी सहयोगियों के साथ बैठकर उन ठोस कदमों को तैयार करना है, जो उठाए जाने जरूरी हैं.” उनके ये बयान बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति के बीच मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध को खत्म करने के मकसद से हुई एक डील पर हस्ताक्षर के बाद आए हैं. इस डील के तहत तेहरान बड़े पैमाने पर आर्थिक राहत के बदले अपने एनरिच्ड यूरेनियम (संवर्धित यूरेनियम) के स्तर को कम करने पर सहमत हुआ है.

IAEA की अहम भूमिका

अमेरिकी अधिकारियों की ओर से जारी डील की शर्तों के मुताबिक, ईरान अपने एनरिच्ड यूरेनियम के स्टॉक को कम करेगा. ऐसा शायद “IAEA (संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था) की देखरेख में साइट पर ही ‘डाउन-ब्लेंडिंग'” के जरिए किया जाएगा. ग्रॉसी ने जोर देकर कहा कि इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए उनकी एजेंसी ही सही है. उन्होंने कहा, “यह बहुत जटिल काम है और कोई छिपी हुई बात नहीं है, इसलिए हमें बहुत बारीकी से काम करना होगा.” उन्होंने कहा, “इस समझौते (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) में IAEA की अहम भूमिका को माना गया है… मुझे लगता है कि इससे हमारी विश्वसनीयता और हमारी जरूरी भूमिका के बारे में सब कुछ साफ हो जाता है. मुझे लगता है कि यह मेमोरैंडम होना अच्छी बात है. अब तकनीकी काम शुरू होगा.”

 ईरान के पास 440 किलो का 60 प्रतिशत एनरिच्ड यूरेनियम

IAEA का अनुमान है कि जब पिछले साल जून में इजरायल और अमेरिका ने अपने पहले हमले किए थे, तब ईरान के पास 60 प्रतिशत तक एनरिच्ड यूरेनियम का 440 किलोग्राम स्टॉक था, जो बम बनाने के लिए जरूरी स्तर के करीब है. तब ईरान ने IAEA के साथ सहयोग रोक दिया था और तब से निरीक्षकों ने वह सामग्री नहीं देखी है. संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था के गवर्निंग बोर्ड ने पिछले हफ़्ते पश्चिमी देशों के एक प्रस्ताव को मंज़ूरी दी, जिसमें ईरान से तुरंत अपने यूरेनियम स्टॉक और उत्पादन सुविधाओं के बारे में जानकारी और उन तक पहुंच देने की मांग की गई थी. तेहरान ने उस प्रस्ताव को ऐसे समय में “उल्टा असर करने वाला” बताया जब बातचीत चल रही थी, और आरोप लगाया कि यह “राजनीति से प्रेरित” था – इस बात का ग्रॉसी ने जोरदार खंडन किया. उन्होंने कहा, “IAEA का काम निष्पक्ष और तकनीकी काम है.”

अमेरिकी अधिकारियों की ओर से जारी डील की शर्तों के मुताबिक, ईरान अपने एनरिच्ड यूरेनियम के स्टॉक को कम करेगा. ऐसा शायद IAEA (संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था) की देखरेख में साइट पर ही ‘डाउन-ब्लेंडिंग’ करके किया जाएगा. ग्रॉसी ने कहा, “यह बहुत मुश्किल काम है और कोई छिपी हुई बात नहीं है, इसलिए हमें बहुत बारीकी से काम करना होगा.” उन्होंने यह भी कहा कि इसका नतीजा “दोनों पक्षों की राजनीतिक इच्छाशक्ति” पर निर्भर करेगा. उन्होंने कहा, “जब दो पक्ष किसी काम को करने का फ़ैसला कर लेते हैं, तो कुछ भी हो सकता है.” उन्होंने आगे कहा कि वे उनके संगठन से यह जानना चाहते हैं कि “क्या जरूरी है”.

ग्रॉसी ने की ईरान से अपील

ग्रॉसी ने IAEA के 35 देशों वाले बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की तिमाही बैठक के पहले दिन कहा, “यह बहुत जरूरी है कि हम फिर से बातचीत शुरू करें.” उन्होंने बोर्ड को दिए एक अलग लिखित बयान में कहा, “मैं ईरान से अपील करता हूं कि वह एजेंसी के साथ रचनात्मक तरीके से सहयोग करे ताकि ईरान में सुरक्षा उपायों (सेफगार्ड्स) को पूरी तरह और प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके.” उन्होंने ‘सेफगार्ड्स’ शब्द का इस्तेमाल किया, जिसमें निरीक्षण भी शामिल हैं. 

IAEA ने उन जगहों पर कुछ निरीक्षण किए थे जिन पर बमबारी नहीं हुई थी, लेकिन फरवरी में फिर से हुए सैन्य हमलों के कारण सुरक्षा कारणों से उन्हें रोक दिया गया था. तब से उसने केवल बुशहर में ईरान के चालू पावर प्लांट का निरीक्षण किया है. बोर्ड को संबोधित करने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ग्रॉसी ने कहा, “विदेश मंत्री और अन्य लोगों के साथ मेरी कभी-कभार बातचीत होती है, लेकिन असल में बातचीत का जरिया टूटा हुआ है.”

तेहरान ने बोर्ड को चेतावनी दी

IAEA में ईरान के मिशन ने X पर कहा, “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गलत काम की जिम्मेदारी उसे करने वाले की होती है, न कि पीड़ित की. बोर्ड का इस्तेमाल उन लोगों को उनकी जिम्मेदारी से बचाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए, जिन्होंने ये हमले किए.” यह बात ड्राफ्ट प्रस्ताव और इस तथ्य के संदर्भ में कही गई कि अमेरिका ने ईरान की परमाणु सुविधाओं पर बमबारी की थी. ईरान ने अपने खिलाफ बोर्ड के पिछले प्रस्तावों पर नाराजगी जताई है और आमतौर पर अपनी परमाणु गतिविधियों को बढ़ाकर या IAEA के साथ सहयोग कम करके जवाब दिया है.इसमें आगे कहा गया, “बोर्ड को आगे के रास्ते पर सावधानी बरतनी चाहिए. जबरदस्ती और टकराव से सहयोग नहीं मिलता. इससे कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं कमजोर होती हैं.” 

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विजय शंकर पांडेय

चीफ सब एडिटर

देश और दुनिया देखने और समझने का कौतूहल बचपन से रहा. हिन्दी और संस्कृत से मेलजोल पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण हुआ. युवा होते ही राजनीति दिलचस्प लगने लगी…
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