
सावन के पवित्र महीने में मध्य प्रदेश की इंदौर सेंट्रल जेल से एक अद्भुत और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है. यहां सावन के दूसरे सोमवार को जेल के करीब एक हजार कैदियों ने महज एक घंटे के भीतर 1 लाख 25 हजार (सवा लाख) पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर एक नया विश्व रिकॉर्ड कायम कर दिया है. इस अनूठे धार्मिक आयोजन ने जेल की चारदीवारी के भीतर एक बेहद सकारात्मक और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया.
इस खास मौके पर मध्य प्रदेश के जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं महानिदेशक (डीजी) डॉ. वरुण कपूर अपनी पत्नी के साथ इंदौर सेंट्रल जेल पहुंचे. उन्होंने कैदियों द्वारा बनाए गए पार्थिव शिवलिंगों का विधि-विधान से महाअभिषेक किया. बंदियों का उत्साह बढ़ाते हुए डॉ. कपूर ने कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजन कैदियों के आत्म-सुधार का एक बेहतरीन माध्यम हैं. उन्होंने भगवान शिव से प्रार्थना की कि वे सभी को स्वस्थ रखें और समाज में वापस लौटकर एक अच्छा इंसान बनने की सद्बुद्धि प्रदान करें. व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए जेल परिसर में 50-50 बंदियों के समूह बनाए गए थे, जिन्हें शिवलिंग निर्माण की जिम्मेदारी दी गई थी.
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वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड लंदन में दावा पेश
महज एक घंटे में सवा लाख पार्थिव शिवलिंग बनाने और उनके महाअभिषेक के इस ऐतिहासिक कारनामे का दावा ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड, लंदन’ के समक्ष किया गया है. इसके लिए संस्था की टीम ने खुद इंदौर केंद्रीय जेल पहुंचकर इस दावे का मुआयना किया. वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड के सदस्य संतोष शुक्ला ने बताया कि टीम ने सभी जरूरी प्रमाण एकत्र कर आगे की कार्रवाई के लिए लंदन मुख्यालय भेज दिए हैं. वहां से रिकॉर्ड चेक होने के बाद इसे आधिकारिक तौर पर दर्ज कर लिया जाएगा. शुक्ला ने यह भी कहा कि संभवतः दुनिया की किसी भी जेल में अपनी तरह का यह पहला कार्यक्रम है.
‘अपराध से घृणा करो, अपराधी से नहीं’
समाज में यह मान्यता है कि ‘अपराध से घृणा करो, अपराधी से नहीं’. क्षणिक आवेश या किन्हीं परिस्थितियों में अपराध कर चुके ये कैदी आज अपनी सजा काट रहे हैं. ऐसे में जेल प्रशासन द्वारा उन्हें इस तरह के सकारात्मक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों से जोड़कर मुख्यधारा में लाने की यह पहल बेहद सराहनीय मानी जा रही है. शिवलिंग निर्माण के बाद कैदियों ने विश्व कल्याण, शांति और सबके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की. जेल प्रशासन के अनुसार, कैदियों के बीच सकारात्मक सोच विकसित करने के लिए इस आयोजन के बाद जेल की क्यारियों में पौधारोपण भी किया जाएगा, ताकि प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया जा सके और परिसर को और अधिक हरा-भरा बनाया जा सके.
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