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अल नीनो को लेकर PMO में हाई लेवल बैठक, सभी मंत्रालयों और राज्यों को दिए सतर्कता के निर्देश | Monsoon 2026 PMO High-level meeting regarding El Nino directives issued all ministries and states remain vigilant 



Monsoon 2026 PMO Meeting: देश में मानसून की प्रगति और अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई. प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया. बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि यदि अल नीनो का असर बढ़ता है तो देश के कृषि, जल, स्वास्थ्य और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर उसका प्रभाव कम से कम पड़े.

मानसून की स्थिति पर हुई विस्तृत चर्चा

बैठक की शुरुआत भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की प्रस्तुति से हुई. मौसम विभाग ने जून महीने और 7 जुलाई तक हुई बारिश की स्थिति का विस्तृत ब्यौरा दिया. आईएमडी के अनुसार गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में मानसून करीब 10 दिन की देरी से पहुंचा था, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश होने से स्थिति में काफी सुधार आया है.

मौसम विभाग ने बताया कि 7 जुलाई तक देशभर में वर्षा की कमी घटकर माइनस 12 प्रतिशत रह गई है. जुलाई के शुरुआती दिनों में सामान्य से बेहतर बारिश दर्ज की गई है, जिससे खेती और जल संसाधनों को राहत मिली है.

जुलाई-अगस्त में दिख सकता है अल नीनो का प्रभाव

आईएमडी ने बैठक में बताया कि जुलाई और अगस्त के दौरान कमजोर से मध्यम स्तर तक अल नीनो का प्रभाव देखने को मिल सकता है. हालांकि विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि हर अल नीनो वर्ष में कम बारिश होना जरूरी नहीं होता. मौसम की स्थिति लगातार बदलती रहती है और उस पर लगातार नजर रखी जा रही है. अधिकारियों ने बताया कि जुलाई का महीना बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि पूरे मानसून की 30 प्रतिशत से अधिक बारिश इसी महीने में होती है.

किसानों के लिए बनाई विशेष रणनीति

कृषि मंत्रालय ने खरीफ फसलों की सुरक्षा और उत्पादन बनाए रखने के लिए की गई तैयारियों की जानकारी दी. राज्यों के साथ नियमित रूप से क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप की बैठकें की जा रही हैं, जिनमें वर्षा, बुआई, जलाशयों के जलस्तर, कृषि इनपुट की उपलब्धता, बाजार की स्थिति और फसलों में कीट एवं रोगों की निगरानी की जा रही है.

देश के 262 संवेदनशील जिलों के लिए जिला कृषि आकस्मिक योजना को अपडेट किया गया है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए एल नीनो जोखिम प्रबंधन से जुड़ी मानक संचालन प्रक्रिया भी जारी की है ताकि जरूरत पड़ने पर किसानों को तत्काल मार्गदर्शन मिल सके.

बीमा, कर्ज और पशुपालन पर भी फोकस

बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया. कृषि, वित्तीय सेवाएं और सहकारिता विभागों को निर्देश दिए गए कि अधिक से अधिक किसानों को इन योजनाओं से जोड़ा जाए. पशुपालन एवं डेयरी विभाग को सूखे और हरे चारे के साथ पशु आहार की उपलब्धता का राज्य और जिला स्तर पर आकलन करने को कहा गया.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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