खबर

अखिलेश यादव के रायबरेली दौरे से असहज क्यों है कांग्रेस, सीटों के तालमेल पर कौन लेगा फैसला | UP Assembly Election 2027 Akhilesh Yadav PDA Yatra from Raebareli Triggers Samajwadi Party Congress Tussle


नई दिल्ली:

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव गुरुवार को रायबरेली के दौरे पर थे. वहां से उन्होंने अपने प्रचार अभियान ‘पीडीए यात्रा’ की शुरुआत की. लेकिन उनके इस दौरे ने ‘प्याले में तूफान’ पैदा कर दिया है. अखिलेश का यह दौरा सपा की गठबंधन सहयोगी कांग्रेस को रास नहीं आ रहा है. कांग्रेस नेता अखिलेश की इस यात्रा से खुश नहीं हैं. कांग्रेस नेता खुद को बड़ा भाई बता रहे हैं. उनका यह भी कहना है कि वो भी ऐसी यात्रा कन्नौज, मैनपुरी और सैफई से शुरू कर सकते हैं. वहीं सपा नेताओं का कहना है कि पार्टी प्रमुख का यह दौरा दबाव बनाने की कोशिश नहीं बल्कि अपने कार्यकर्ताओं का हौंसला बढ़ाने के लिए था.सपा-कांग्रेस नेताओं की बयानबाजी को विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक जोर-आजमाइश के रूप में देखा जा रहा है.

कांग्रेस से गठबंधन पर क्या बोले अखिलेश यादव

अखिलेश यादव ने गुरुवार को जिस रायबरेली से अपनी पीडीए यात्रा शुरू की, वह कांग्रेस नेता राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र है. हालांकि अपनी यात्रा के दौरान अखिलेश ने यह कहा कि कांग्रेस से गठबंधन जारी रहेगा, लेकिन विधानसभा चुनाव में सीटों का बंटवारा जीतने की क्षमता के आधार पर किया जाएगा. वहीं कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने एनडीटीवी से शुक्रवार को कहा कि उनकी पार्टी को विधानसभा चुनाव में लड़ने के लिए सम्मानजनक सीटें चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव जीतने के लिए हमें सपा को बड़ा भाई कहना पड़े तो हम वह भी कहने को तैयार हैं. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि गठबंधन में कांग्रेस स्वाभाविक तौर पर बड़ा भाई है. सपा से गठबंधन में कांग्रेस की भूमिका बड़े भाई वाली है. ऐसे में कांग्रेस को सम्मानजनक सीटें मिलनी चाहिए.

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने पहले कहा था कि चुनाव का समय है, कोई भी कहीं भी जा सकता है. अगर अखिलेश यादव रायबरेली-अमेठी जा सकते हैं, तो हम भी कन्नौज, मैनपुरी और सैफई जा सकते हैं. इसमें कोई नई बात नहीं है. राय के इस बयान को सपा प्रमुख की रायबरेली यात्रा से कांग्रेस की नाराजगी के तौर पर देखा गया.

कांग्रेस और सपा में चल रही रस्साकशी गुरुवार को ही जाहिर हो गई थी. दरअसल बछरावां सीट से सपा विधायक श्याम सुंदर भारती ने रायबरेली को ‘कांग्रेस का गढ़’ के दावे को खारिज कर दिया था. उन्होंने कहा था,” कांग्रेस का गढ़, कौन सा कांग्रेस का गढ़? 2022 में हमने चार सीटें जीती थीं. इसलिए विधानसभा चुनाव में यह सिर्फ सपा का गढ़ है किसी और का नहीं.” उनका कहना था कि 2022 के चुनाव में उनकी पार्टी दो सीटें बहुत कम अंतर से हार गई थी,अगर ऐसा नहीं होता तो सभी छह सीटें सपा ही जीतती.  

रायबरेली में सपा और कांग्रेस का संबंध

रायबरेली में सपा-कांग्रेस में तनातनी कोई नई बात नहीं है. ऐसा पहले भी देखा जा चुका है. इस महीने के शुरू में कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपने क्षेत्र के दौरे पर गए थे. इस दौरान उन्होंने रायबरेली कलेक्ट्रेट में दिशा (जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति) की बैठक की अध्यक्षता की थी. इस बैठक में उन्होंने जिले की खराब सड़कों का मामला उठाया था. इसका प्रतिवाद प्रदेश सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने किया था. इस बैठक में हरचंदपुर सीट से सपा विधायक राहुल लोधी और श्याम सुंदर भारती भी शामिल हुए थे. लोधी ने बैठक को केवल औपचारिकता बताया था तो भारती ने दिशाहीन. अखिलेश यादव गुरुवार को उसी राहुल लोधी के घर चाय पीने के लिए गए थे. 

अखिलेश यादव की इस यात्रा को लेकर रायबरेली में सपा कार्यकर्ताओं में पूरा उत्साह देखा गया.

अखिलेश यादव की इस यात्रा को लेकर रायबरेली में सपा कार्यकर्ताओं में पूरा उत्साह देखा गया.
Photo Credit: Samajwadi Party X

अखिलेश यादव ने गुरुवार को अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा था,”गठबंधन भी होगा और गठबंधन के साथ चुनौती भी होगी. हमारे लिए बात सीट की नहीं, जीतने वाली सीट की होगी. जो जीत सकता है, वही सीट ले.” उनके इस बयान को कांग्रेस सांसद इमरान मसूद नेताओं की ओर से गठबंधन में सीटों की मांग को लेकर किए जा रहे दावों से जोड़कर देखा जा रहा है. 

अजय राय के बयान के संबंध में सपा प्रवक्ता एमएच खान ने एनडीटीवी से कहा कि वो यात्रा करें, उनको कौन मना कर रहा है. उन्होंने कहा कि इस तरह की यात्राओं से पीडीए ही मजबूत होगा. उनका कहना था कि विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे पर फैसला हमारे नेता अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी मिल-बैठकर करेंगे. उन्होंने कहा कि इस विषय पर किसी और नेता के किसी बयान का कोई मतलब नहीं है.

सपा प्रवक्ता ने कहा कि अखिलेश यादव का रायबरेली दौरा किसी पर दबाव बनाने की रणनीति नहीं थी. उन्होंने कहा कि पुलिस ने सपा विधायक के साथ-साथ कुछ युवाओं और सपा कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया था. इसलिए अपने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने और एकजुटता दिखाने के लिए वो रायबरेली गए, इसलिए इससे किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए. 

2022 के विधानसभा चुनाव में किसे कितनी सीट मिली 

रायबरेली जिले में विधानसभा की छह सीटें हैं. साल 2022 के चुनाव में इनमें से चार सीटें सपा और दो सीटें बीजेपी ने जीती थीं. रायबरेली सदर सीट से बीजेपी की अदिति सिंह, सलोन (सु) से बीजेपी के अशोक कुमार को जीत मिली थीं. वहीं बछरावां से सपा के  श्याम सुंदर भारती, हरचंदपुर से सपा के राहुल लोधी, सरेनी से सपा के देवेंद्र प्रताप सिंह और उंचाहार से मनोज कुमार पांडेय को जीत मिली थी. ऊंचाहार के विधायक मनोज कुमार पांडेय बाद में पाला बदलकर बीजेपी के साथ हो लिए. इससे समय वो प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. साल 2022 के चुनाव में कांग्रेस और सपा में गठबंधन नहीं था. 

वहीं 2017 का चुनाव दोनों दलों ने गठबंधन में लड़ा था. उस चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर रायबरेली से अदिति सिंह और हरचंदपुर से राकेश सिंह जीते थे. वहीं सलोन में कांग्रेस के सुरेश चौधरी को दूसरा स्थान, ऊंचाहार में कांग्रेस के अजय पाल सिंह को चौथा, बछरांवा (सुरक्षित) में कांग्रेस के साहब शरण को दूसरा स्थान और सरेनी में अशोक कुमार सिंह को तीसरा स्थान मिला था. सपा से गठबंधन होने के बाद भी कांग्रेस ने ऊंचाहार में अपना उम्मीदवार उतार दिया था.

ये भी पढ़ें: हाथापाई की नौबत, विधायक को मार्शल ने किया बाहर… J-K विधानसभा में ऐसा क्या हुआ कि मच गई अफरा-तफरी?





Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button