

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आखिरकार इस्लामाबाद ने अपना नया मोहरा बिठा ही दिया है. पाकिस्तान की सत्ताधारी पार्टी पीएमएल-एन (PML-N) के नेता बैरिस्टर इफ्तिखार अली गिलानी को पीओके का नया तथाकथित ‘प्रधानमंत्री’ चुन लिया गया है. हैरान करने वाली बात यह है कि गिलानी आम चुनाव में अपनी सीट तक नहीं बचा पाए थे और उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा था. इसके बावजूद नवाज शरीफ से करीबी का फायदा उठाकर वह पिछले दरवाजे से इस पद तक पहुंचने में कामयाब रहे.
धांधली और विरोध के बीच हुआ मतदान
मुजफ्फराबाद स्थित तथाकथित विधानसभा सत्र में हुए मतदान के दौरान इफ्तिखार गिलानी को 44 में से 30 वोट मिले. वहीं उनके खिलाफ चुनाव लड़ रहे पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के उम्मीदवार मुख्तार अहमद को सिर्फ 14 वोटों मिले. कुल 53 सदस्यों वाली इस असेंबली की मौजूदा क्षमता फिलहाल 46 ही है, क्योंकि पुंछ और सुधनोती जिलों की 7 सीटों पर कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति के कारण चुनाव स्थगित कर दिए गए हैं.
शुक्रवार को हुई वोटिंग में 44 विधायकों ने ही हिस्सा लिया. असेंबली के स्पीकर ने मतदान प्रक्रिया में भाग नहीं लिया, जबकि PML-N के क्षेत्रीय अध्यक्ष शाह गुलाम कादिर पार्टी से मतभेदों के चलते सत्र से गायब रहे. नवाज शरीफ ने एक दिन पहले ही गिलानी के नाम पर मुहर लगाई थी, जिसके बाद उनका चुना जाना तय माना जा रहा था.
हारकर भी ऐसे बाजी मार गए गिलानी
पीओके असेंबली की कुल 53 सीटों में से 45 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं, जबकि 8 सीटें महिलाओं, टेक्नोक्रेट्स और धर्मगुरुओं के लिए आरक्षित रखी गई हैं. गिलानी ने जब सीधे चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई तो जनता ने उन्हें नकार दिया और वे चुनाव हार गए. इसके बाद पीएमएल-एन ने उन्हें टेक्नोक्रेट कोटे से आरक्षित सीट पर असेंबली में पहुंचाया और फिर पीएम पद की कमान सौंप दी.
प्रत्यक्ष चुनाव की 38 सीटों में से PML-N ने 25 और PPP ने 12 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि अवामी दस्त-ओ-बाजूस पार्टी को 1 सीट मिली जिसने PML-N को समर्थन दिया. वहीं 8 आरक्षित सीटों में से 6 पर PML-N और 2 पर PPP का कब्जा रहा.
फिर भड़क सकती है विरोध की आग
पीओके में इस बार 27 जुलाई, 2 अगस्त और 3 अगस्त को तीन चरणों में चुनाव हुए थे. चुनाव की पूरी प्रक्रिया पर धांधली के बड़े आरोप लगे और हिंसा देखने को मिली. जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के बैनर तले जून की शुरुआत से ही लोग सड़कों पर उतरकर शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों का कड़ा विरोध कर रहे हैं. इन हिंसक झड़पों में कई प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों की जान भी जा चुकी है, जिसके बाद क्षेत्रीय सरकार ने इस संगठन पर बैन लगा दिया था.
जनता के बीच पहले से ही गुस्सा है और ऐसे माहौल में एक हारे हुए नेता को आरक्षित सीट के जरिए ‘प्रधानमंत्री’ बनाए जाने से इलाके में विरोध की आग और भड़कने की पूरी आशंका जताई जा रही है.
भारत का क्या कहना है?
भारत ने हमेशा की तरह इस पूरी प्रक्रिया और अवैध कब्जे को सिरे से खारिज किया है. भारत का आधिकारिक और साफ रुख है कि संपूर्ण जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं. नई दिल्ली लगातार यह दोहराती आई है कि पाकिस्तान ने इन क्षेत्रों के एक हिस्से पर अवैध और जबरन कब्जा कर रखा है. भारत PoK में किसी भी सरकार को नहीं मानता है. पाकिस्तान ने इस इलाके को जबरन कब्जा कर रखा है.
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