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EPF New Rule: ₹1800 की लिमिट से कितनी घटेगी आपकी पेंशन, CA से जानें पूरा गणित | EPF New Rule how much will pension decrease due to the 1800 limit Understand the full calculation from a expert



पीएफ, नौकरीपेशा लोगों के लिए रिटायरमेंट के बाद का सबसे बड़ा सहारा होता है. इसी से हर महीने की पेंशन तय होती है. हाल ही में ईपीएफओ ने पीएफ कंट्रीब्यूशन के नियमों में बड़ा बदलाव किया है. नए नियम के अनुसार कर्मचारी के लिए पीएफ जमा करने की लिमिट 1800 रुपये कर दी है. इससे ऊपर अगर कोई कर्मचारी जमा करता है तो उसे वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड माना जाएगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके पीएफ के नियमों में हुआ ये बदलाव आपके रिटायरमेंट की प्लानिंग को कमजोर कर सकता है?

नियम कहता है कि कंपनी की तरफ से मिलने वाले 12% कंट्रीब्यूशन में से 8.33% हिस्सा सीधे आपकी कर्मचारी पेंशन स्कीम में जाता है. सुनने में ये बहुत अच्छा है, लेकिन पेंच यहां है कि अगर इस कंट्रीब्यूशन की मैक्सिमम लिमिट 1800 रुपये/महीना ही लॉक रही, तो रिटायरमेंट के बाद आपके हाथ में आने वाली मंथली पेंशन बहुत कम रह जाएगी. आइए एक्सपर्ट की मदद से इस खबर में समझने की कोशिश करते हैं कि इस नियम का पूरा खेल क्या है और ये कैसे आपकी जेब पर भारी पड़ने वाला है.

क्या है 12%, 8.33% का पूरा गणित?

सीए राजा मंगला के अनुसार जब आप किसी कंपनी में काम करते हैं, तो आपकी बेसिक सैलरी और डीए का 12% हिस्सा आपके ईपीएफ अकाउंट में जाता है. इतनी ही रकम आपकी कंपनी भी देती है. लेकिन कंपनी का ये 12% पूरा का पूरा पीएफ खाते में नहीं जाता. इसमें से 3.67% हिस्सा प्रोविडेंट फंड खाते में जाता है. 8.33% हिस्सा आपके कर्मचारी पेंशन स्कीम में जाता है.

असली झटका कहां है?

सरकार ने ईपीएस कंट्रीब्यूशन के लिए एक सीलिंग लिमिट तय की है, जो अभी के समय में 15,000 रुपये है. यानी, भले ही आपकी बेसिक सैलरी 50,000 रुपये हो, लेकिन पेंशन फंड में कंट्रीब्यूशन की कैलकुलेशन 15 हजार रुपये पर ही होगी. इस रकम का 8.33% निकालने पर ये 1,250 रुपये पर आकर सिमट जाती है.

1800 की लिमिट का रिटायरमेंट फंड पर असर

अब जरा सोचिए, आज से 20 या 25 साल बाद जब आप रिटायर होंगे, तब देश में महंगाई का लेवल क्या होगा? अगर आज के नियमों को देखें तो आपका मंथली पेंशन कंट्रीब्यूशन मैक्सिमम 1800 रुपये के दायरे में है, तो रिटायरमेंट के बाद आपकी पेंशन का कॉर्पस बहुत छोटा बनेगा. जब कंट्रीब्यूशन का बेस ही छोटा होगा, तो उस पर मिलने वाला रिटर्न और आखिर में बनने वाली मंथली पेंशन भी ऊंट के मुंह में जीरे जैसी होगी. सीए मंगला का मानना है कि इस लिमिट की वजह से एक आम कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद कुछ हजार रुपये की ही पेंशन मिल पाएगी, जिससे आज के दौर में भी गुजारा करना मुश्किल है, बाद की बात तो छोड़ ही दीजिए.

कैलकुलेशन से समझें पेंशन का फंडा

सीए मंगला के अनुसार, EPS पेंशन का हिसाब एक तय फॉर्मूले से लगाया जाता है. 

मासिक पेंशन = (पेंशन योग्य सैलरी × नौकरी के साल) ÷ 70. 

मान लीजिए आपकी पेंशन के लिए सैलरी 15,000 मानी जाती है और आपने 35 साल नौकरी की है, तो आपकी पेंशन होगी- (₹15,000 × 35) ÷ 70 = 7,500 रुपये/माह. यानी अगर किसी कर्मचारी ने 35 साल तक नौकरी की हो, तब भी उसे ज्यादा से ज्यादा लगभग 7,500 रुपये मासिक पेंशन ही मिलेगी. समस्या ये है कि भले ही उसकी सैलरी इससे कहीं ज्यादा हो, लेकिन पेंशन की कैलकुलेशन सैलरी की तय सीमा के आधार पर होती है. ऐसे में बढ़ी हुई सैलरी का पूरा फायदा पेंशन में नहीं मिल पाता.





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