
Anant Ambani: आज की चमक-दमक और सोशल मीडिया की तेज़ रफ़्तार वाली दुनिया में, जहाँ पुरानी परंपराओं को अक्सर ‘आउटडेटेड’ मान लिया जाता है, वहाँ देश के सबसे अमीर परिवार के युवा वारिस, अनंत अंबानी की जीवनशैली एक नया दृष्टिकोण देती है.
करोड़ों की संपत्ति, दुनिया भर के वीआईपी मेहमान और आधुनिकता के चरम पर होने के बावजूद, अनंत अंबानी का अपनी संस्कृति और सनातन धर्म के प्रति गहरा झुकाव यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हमारी युवा पीढ़ी (Gen Z) के लिए इसमें कोई बड़ा सबक छिपा है.
अक्सर यह माना जाता है कि आज के युवा पुरानी रूढ़ियों से दूर भागते हैं, लेकिन अनंत अंबानी की आस्था किसी दबाव का नतीजा नहीं, बल्कि उनका व्यक्तिगत अनुभव लगती है. उन्होंने अपने साक्षात्कारों में खुलकर स्वीकार किया है कि जब वे अपनी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे, तब भगवान कृष्ण में उनके अटूट विश्वास ने उन्हें मानसिक संबल दिया. यह बिल्कुल श्रीमद्भगवद्गीता के उस शास्त्रीय सिद्धांत जैसा है, जहाँ अर्जुन भयंकर मानसिक तनाव (Anxiety) से घिर जाते हैं और भगवान कृष्ण उन्हें तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म का संदेश देकर कर्म और आंतरिक शांति का मार्ग दिखाते हैं. आज की Gen Z, जो करियर और सोशल मीडिया के दबाव के कारण भारी तनाव से गुजर रही है, वह यहाँ से सीख सकती है कि जब बाहरी दुनिया में सब कुछ बिखर रहा हो, तब गीता का यही अध्यात्म एक मजबूत सहारा बन सकता है.
इसके अलावा, युवाओं में एक धारणा यह भी है कि स्पिरिचुअल होना या मंदिर जाना ‘कूल’ नहीं है. लेकिन अनंत अंबानी का केदारनाथ, बद्रीनाथ या तिरुपति जैसे धामों में पूरी श्रद्धा के साथ जाना यह साबित करता है कि आप दुनिया के सबसे आधुनिक नागरिक होकर भी अपनी जड़ों से मजबूती से जुड़े रह सकते हैं. हमारे शास्त्रों में राजा जनक का उदाहरण मिलता है, जिन्हें ‘विदेह’ कहा जाता था. वे महल के परम ऐश्वर्य और सुख-सुविधाओं के बीच रहकर भी पूरी तरह अध्यात्म में लीन रहते थे. अनंत अंबानी का यह रूप दिखाता है कि भौतिक संपन्नता के साथ-साथ आध्यात्मिक होना आज के युग में भी पूरी तरह प्रासंगिक है.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अनंत अंबानी की आस्था सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि वह उनके कर्मों में दिखती है. उनके द्वारा शुरू किया गया ‘वनतारा’ (Vantara) प्रोजेक्ट जो बेसहारा और बीमार जानवरों की सेवा के लिए समर्पित है कि शास्त्रों के सबसे बुनियादी सिद्धांत ‘आत्मवत् सर्वभूतेषु’ (सभी जीवों को अपने समान देखना) और ‘अहिंसा परमो धर्मः’ का साक्षात उदाहरण है. यजुर्वेद में भी कहा गया है-‘मित्रस्याहं चक्षुषा सर्वाणि भूतानी समीक्षे’ अर्थात मैं सब जीवों को मित्र की दृष्टि से देखू. Gen Z जो पर्यावरण और सोशल कॉज (Social Causes) को लेकर बहुत संवेदनशील है, वह इस बात से जुड़ सकती है कि धर्म का असली मतलब सिर्फ कर्मकांड नहीं, बल्कि सृष्टि के हर जीव के प्रति करुणा रखना है.
अनंत अंबानी से किसी को अंधभक्त होने की प्रेरणा लेने की जरूरत नहीं है, बल्कि उनसे यह सीखा जा सकता है कि भौतिक सुख-सुविधाएं चाहे कितनी भी हों, जीवन में एक आंतरिक संतुलन का होना कितना जरूरी है. जैसा कि उपनिषदों में कहा गया है ’तेन त्यक्तेन भुंजीथा’ अर्थात संसार का भोग करो, लेकिन त्याग और समत्व के भाव के साथ. धर्म और आस्था कोई बंधन नहीं, बल्कि एक ऐसी शक्ति हैं जो आपको ज़मीन से जोड़े रखती हैं और जीवन के हर उतार-चढ़ाव का सामना करने का हौसला देती हैं.
Anant Ambani Tirupati 2026: अनंत अंबानी ने तिरुपति में चढ़ाए बाल, लेकिन वहां केश दान क्यों किया जाता है?
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

