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ISRO की नौकरी छोड़ी, साथ देखा एक सपना और 2 दोस्‍तों ने ऐसे बना दी स्‍पेस यूनिकॉर्न कंपनी | Left ISRO jobs shared a dream and two friends Pawan and Naga built a space unicorn company



स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) देश ही नहीं दुनिया भर में चर्चाओं में है. यह भारत की एक प्राइवेट रॉकेट निर्माण करने वाली कंपनी है. जो 18 जुलाई को विक्रम-1 रॉकेट लॉन्च कर इतिहास रचने वाली है. खास बात यह है कि स्काईरूट एयरोस्पेस कंपनी का निर्माण करने वाले दो दोस्त हैं जो कभी ISRO में काम करते थे. लेकिन ISRO की नौकरी छोड़ दोनों दोस्तों ने भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक नई ऊंचाई पर ले जाने का सपना देखा था. आज उनकी मेहनत और विज़न की वजह से उनकी कंपनी भारत की प्रमुख स्पेस यूनिकॉर्न (Space Unicorn) कंपनियों की फेहरिस्त में शामिल हो चुकी है.

आइए आपको बताते हैं इन दो दोस्तों की सफलता की कहानी जिन्होंने शून्य से शुरू करके कैसे इस मुकाम को हासिल किया. इन दो दोस्तों का नाम है पवन कुमार चांदना और नागा भरत डाका, दोनों ही दोस्त भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में वैज्ञानिक के रूप में करियर की शुरुआत की थी.  

पवन ने 6 साल किया ISRO में काम

पवन ने IIT खड़गपुर से अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. पहले तो वह विदशों में नौकरी की तैयारी में थे. लेकिन उनका मन इसी दौरान अंतरिक्ष विज्ञान में बढ़ती जा रही थी. अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद साल 2012 में पवन ने कैंपस प्लेसमेंट के जरिए ISRO वैज्ञानिक की नौकरी शुरू की. इसके साथ ही पवन को विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में काम करने का मौका मिला. वहीं ISRO में 6 साल तक उन्होंने अहम परियोजनाओं पर काम किया. 

नागा भरत के साथ लिया बड़ा फैसला

वहीं नागा भरत डाका भी बॉम्बे IIT से पढ़ाई कर ISRO तक पहुंचे थे. उन्होंने काफी सालों तक ISRO में काम किया था. साल 2018 में पवन कुमार चांदना ने निजी स्पेस टेक्नोलॉजी कंपनी बनाने का फैसला किया. इसके साथ ही उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी. इसके बाद वह नागा भरत डाका से संपर्क किया. इसके बाद दोनों ने ही कंपनी खोलने का फैसला किया.

दोनों ने कंपनी के लिए निवशकों की तलाश शुरू कर दी. इस दौरान NURX के संस्थापक मुकेश बंसल को सीधे मैसेज किया. बता दें मुकेश बंसल भी IIT खड़गपुर के पूर्व छात्र रह चुके थे. पवन के विजन पर उन्होंने भरोसा जताया और उनकी कंपनी के लिए 15 लाख डॉलर का शुरुआती निवेश किया. यही निवेश आगे चलकर भारत के सबसे बड़े स्पेस स्टार्टअप में से एक की नींव बनी.

हैदराबाद में की स्काईरूट एयरोस्पेस की शुरूआत

पवन और नागा दोनों ने ही दोनों ने महसूस किया कि वैश्विक स्तर पर कमर्शियल सैटेलाइट लॉन्चिंग का बाजार बहुत तेजी से बढ़ रहा है. लंबे इंतजार के बाद दोनों दोस्तों ने हैदराबाद में ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ की शुरुआत की. उनका टारगेट साफ था सस्ते, फुर्तीले और भरोसेमंद छोटे रॉकेट बनाना जो मांग के आधार पर सैलेटलाइट को अंतरिक्ष भेज सकें. 

इतिहास रचने का पहला पड़ाव 18 नवंबर 2022 को आया जब स्काईरूट एयरोस्पेस ने भारत का पहला प्राइवेट विकसित रॉकेट Vikram-S को सफलतापूर्वक लॉन्च किया.  यह भारतीय अंतरिक्ष इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ क्योंकि इससे पहले भारत में कोई भी रॉकेट अब तक सरकार द्वारा ही लॉन्च की जाती थी.

इसके बाद उन्होंने वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर ‘विक्रम’ सीरीज के रॉकेट्स (Vikram I, II, III) पर काम कर रहे हैं, जो अंतरिक्ष में भारी पेलोड ले जाने में सक्षम हैं. इसी के तहत अब 18 जुलाई को Vikram-1 की लॉन्चिंग की जा रही है.

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