
Nag Panchami 2026: सनातन धर्म में नाग पंचमी का पर्व नाग देवता और भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. साल 2026 में नाग पंचमी 17 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी. इस दिन श्रद्धालु नाग देवता की पूजा करते हैं, भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि एवं सर्प भय से रक्षा की कामना करते हैं.
नाग पंचमी से जुड़ी कई परंपराएं देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रचलित हैं. इन्हीं में से एक मान्यता है कि इस दिन कई परिवारों में तवे पर रोटी नहीं बनाई जाती और तवे का उपयोग करने से बचा जाता है.
हालांकि, यह परंपरा पूरे भारत में समान रूप से नहीं निभाई जाती और इसका पालन मुख्य रूप से स्थानीय मान्यताओं एवं पारिवारिक परंपराओं के अनुसार किया जाता है. आइए जानते हैं कि इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यता बताई जाती है.
क्यों नहीं चलाया जाता तवा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी के दिन धरती के भीतर रहने वाले जीवों, विशेषकर नागों का सम्मान करने की परंपरा है. कई क्षेत्रों में माना जाता है कि इस दिन आग पर तवा चढ़ाना या तवे पर रोटी सेंकना शुभ नहीं माना जाता. इसलिए श्रद्धालु तवे का उपयोग करने से बचते हैं.
कुछ लोकमान्यताओं के अनुसार तवे का अत्यधिक ताप नाग देवता के प्रति अनादर का प्रतीक माना जाता है. हालांकि, इसका उल्लेख सभी धर्मग्रंथों में स्पष्ट रूप से नहीं मिलता और यह मान्यता मुख्य रूप से लोक परंपराओं पर आधारित है.
क्या खाते हैं इस दिन?
देश के कई राज्यों में नाग पंचमी के दिन तवे पर बनी रोटी के बजाय उबला हुआ भोजन, पूड़ी, कचौड़ी, खीर, दही, चावल, हलवा या पहले से तैयार भोजन ग्रहण करने की परंपरा है. कुछ स्थानों पर मिट्टी के बर्तन या अन्य तरीकों से भोजन बनाया जाता है.
हालांकि, भोजन की परंपरा अलग-अलग राज्यों और परिवारों में भिन्न हो सकती है.
नाग पंचमी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग देवता को भगवान शिव का प्रिय माना जाता है. शिव जी के गले में विराजमान नाग इस बात का प्रतीक हैं कि प्रकृति के प्रत्येक जीव का सम्मान करना चाहिए.
मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से भय, बाधाओं और कालसर्प दोष जैसी ज्योतिषीय समस्याओं से राहत की कामना की जाती है. साथ ही परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहने का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है.
नाग पंचमी पर क्या करना शुभ माना जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन
- भगवान शिव और नाग देवता की पूजा करें.
- शिवलिंग पर जल, दूध (यदि आपकी परंपरा में प्रचलित हो) और बेलपत्र अर्पित करें.
- “ॐ नमः शिवाय” और नाग देवता के मंत्रों का जाप करें.
- जरूरतमंद लोगों को अन्न और वस्त्र का दान करें.
- प्रकृति और जीव-जंतुओं के संरक्षण का संकल्प लें.
क्या सचमुच सभी को तवा नहीं चलाना चाहिए?
पंडित सुरेश श्रीमाली के अनुसार, नाग पंचमी पर तवा न चलाने की परंपरा सभी धर्मग्रंथों का अनिवार्य नियम नहीं है. यह मुख्य रूप से लोकमान्यताओं और क्षेत्रीय परंपराओं पर आधारित है. यदि आपके परिवार या क्षेत्र में यह परंपरा प्रचलित है, तो श्रद्धा के साथ उसका पालन किया जा सकता है. वहीं जिन स्थानों पर ऐसी परंपरा नहीं है, वहां सामान्य रूप से भोजन बनाया जाता है.
धर्म का संदेश क्या है?
नाग पंचमी का मूल संदेश केवल किसी एक नियम का पालन करना नहीं, बल्कि प्रकृति, जीव-जंतुओं और पर्यावरण के प्रति सम्मान रखना भी है. यह पर्व हमें सह-अस्तित्व, करुणा और जीवों के संरक्षण की प्रेरणा देता है.
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