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वीव द फ्यूचर 4.0 में कपड़ा कचरे से कमाई का नया फॉर्मूला, गिरिराज सिंह बोले- वेस्ट को बनाना होगा संसाधन | weave the future 4 0 Dilli Haat giriraj singh textile waste recycling circular economy Upcycling Edition Sustainable Handloom craftsmanship


नई दिल्ली:

Weave The Future 4.0: देश में कपड़ा उत्पादों की बढ़ती खपत के बीच टेक्सटाइल वेस्ट यानी कपड़ों के कचरे की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है. इसी चुनौती का समाधान खोजने और टिकाऊ फैशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिल्ली हाट में ‘वीव द फ्यूचर 4.0′ का आयोजन किया गया है. केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने इस कार्यक्रम का दौरा करते हुए कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूत करना और कपड़ों के कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलना समय की जरूरत है. उन्होंने कहा कि उद्यमिता, नवाचार और स्थिरता का समन्वय न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद करेगा बल्कि रोजगार और नए आर्थिक अवसर भी पैदा करेगा.

क्या है ‘वीव द फ्यूचर 4.0′?

‘वीव द फ्यूचर’ भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय के तहत विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय की एक राष्ट्रीय पहल है. इसका उद्देश्य टिकाऊ जीवनशैली, जिम्मेदार उत्पादन और कपड़ों के कचरे के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा देना है. इस मंच के माध्यम से कारीगरों, डिजाइनरों, स्टार्टअप्स, फैशन ब्रांड्स, रीसाइक्लिंग उद्यमों और नवाचार करने वाले समूहों को एक साथ लाया जाता है, ताकि कपड़ा उद्योग के सामने मौजूद पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान खोजा जा सके.

केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा?

दिल्ली हाट में आयोजित कार्यक्रम का दौरा करने के बाद केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि जैसे-जैसे कपड़ा उत्पादों की खपत बढ़ रही है, वैसे-वैसे सर्कुलर इकोनॉमी आधारित मॉडल को मजबूत करना जरूरी हो गया है. उनके अनुसार ‘वीव द फ्यूचर 4.0′ यह दिखाता है कि उद्यमिता, नवाचार और सस्टेनेबिलिटी एक साथ मिलकर आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

Weave The Future 4.0: कार्यक्रम में कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह

Weave The Future 4.0: कार्यक्रम में कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह

100 से ज्यादा प्रतिभागी एक मंच पर

12 से 17 जुलाई तक चलने वाली इस छह दिवसीय प्रदर्शनी में देशभर से 100 से अधिक ब्रांड, कारीगर, डिजाइनर, रीसाइक्लर्स, थ्रिफ्ट कलेक्टिव और स्टार्टअप शामिल हुए हैं. यहां पुराने कपड़ों और कपड़ा कचरे को नए उत्पादों में बदलने के विभिन्न मॉडल प्रदर्शित किए जा रहे हैं. प्रदर्शनी का मुख्य फोकस अपसाइक्लिंग, रीसाइक्लिंग, मरम्मत, पुन: उपयोग और सर्कुलर डिजाइन पर है.

Weave The Future 4.0: रीसाइक्लिंग पर फोकस

Weave The Future 4.0: रीसाइक्लिंग पर फोकस

कपड़ा कचरे की चुनौती से निपटने का प्रयास

विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना ने से NDTV कहा कि ‘वीव द फ्यूचर’ अब एक राष्ट्रीय मंच बन चुका है, जो भारत की पारंपरिक हथकरघा और शिल्प विरासत को आधुनिक टेक्सटाइल वेस्ट मैनेजमेंट समाधानों से जोड़ता है. उन्होंने बताया कि यह मंच छात्रों, कारीगरों, डिजाइनरों और स्टार्टअप्स को साथ लाकर ऐसे व्यावहारिक समाधान तलाश रहा है, जिनसे कपड़ा कचरे को कम किया जा सके.

प्रदर्शनी में क्या-क्या है खास?

कार्यक्रम में आने वाले लोगों के लिए कई आकर्षक गतिविधियां रखी गई हैं. जैसे :

  • अपसाइकिल और रीसाइकिल किए गए उत्पादों की प्रदर्शनी
  • टेक्सटाइल वेस्ट और मटेरियल रिकवरी पर इंटरैक्टिव इंस्टॉलेशन
  • मरम्मत, पुन: उपयोग और रीसाइक्लिंग के लाइव डेमो
  • सस्टेनेबल डिजाइन पर कार्यशालाएं
  • सर्कुलर फैशन और जिम्मेदार उपभोग पर चर्चा सत्र

‘वीव द फ्यूचर 4.0’ (Weave the Future 4.0) के तहत सोमवार को एक ‘मरम्मत’ (Marammat) वर्कशॉप आयोजित की गई और यह ‘रफूगर’ (Rafooghar) के सहयोग से 17 जुलाई को फिर आयोजित की जाएगी.

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