
हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बीजेपी और केंद्र सरकार पर राज्य के साथ वित्तीय भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि बीजेपी चुनावी माहौल में तथ्यहीन चार्जशीट और धार्मिक मुद्दों को राजनीतिक हथियार बनाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है. उनका दावा है कि केंद्र सरकार की नीतियों से हिमाचल को हर साल करीब 10 से 12 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है.
रोहित ठाकुर ने कहा कि बीजेपी श्वेत पत्र की मांग कर रही है, जबकि सबसे पहले केंद्र सरकार को यह बताना चाहिए कि हिमाचल के वित्तीय अधिकारों में कटौती क्यों की गई. उन्होंने आरोप लगाया कि रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) लगभग समाप्त कर दी गई, बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं पर कैप लगा दी गई और राज्य की कर्ज लेने की सीमा भी घटा दी गई. उनके अनुसार इन फैसलों से प्रदेश के विकास कार्य प्रभावित हुए हैं.
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राम मंदिर पर राजनीति से बचने की नसीहत
अयोध्या राम मंदिर के मुद्दे पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह करोड़ों लोगों की आस्था का विषय है और कांग्रेस भी इसके भव्य निर्माण का स्वागत करती है. उन्होंने कहा कि बीजेपी को इतिहास नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि राम मंदिर के ताले खुलने और पूजा-अर्चना शुरू होने की प्रक्रिया कांग्रेस सरकार के दौरान हुई थी. बाद की प्रक्रिया न्यायिक फैसलों के तहत आगे बढ़ी, इसलिए इस विषय पर राजनीति नहीं होनी चाहिए.
शिक्षा में सुधार के आंकड़ों का किया दावा
पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की टिप्पणियों का जवाब देते हुए रोहित ठाकुर ने कहा कि वर्तमान सरकार के कामकाज का प्रमाण राष्ट्रीय रैंकिंग में दिख रहा है. उन्होंने दावा किया कि बीजेपी शासन के दौरान हिमाचल राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण (NAS) में 21वें और परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) में 18वें स्थान पर था, जबकि अब प्रदेश NAS में शीर्ष पांच और PGI में शीर्ष तीन राज्यों में शामिल हो गया है. उन्होंने यह भी कहा कि हिमाचल की साक्षरता दर 99.13 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो देश में गोवा के बाद दूसरी सबसे अधिक है.
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