

नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा की रियल एस्टेट कंपनी पार्श्वनाथ डेवलपर्स के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश जारी किया है. SC ने निदेशकों के बैंक खाते फ्रीज करने, गिरफ्तारी वारंट जारी करने और अगली सुनवाई पर पेश न होने की स्थिति में गैर-जमानती वारंट जारी करने की चेतावनी दी है. CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ गुरुग्राम स्थित पार्श्वनाथ एक्सोटिका परियोजना के वरिष्ठ नागरिक फ्लैट खरीदारों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी.
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने लगभग 20 वर्ष पहले फ्लैट की पूरी कीमत चुका दी थी. लेकिन आज तक उन्हें कब्जा नहीं मिला. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला उन हजारों घर खरीदारों की पीड़ा को दर्शाता है, जिन्होंने वर्षों पहले पूरी राशि का भुगतान कर दिया. लेकिन अब भी अपने घर का इंतजार कर रहे हैं.
2013 तक कब्जा देने का वादा किया गया था
याचिकाकर्ताओं को वर्ष 2006 में फ्लैट आवंटित किए गए थे और 2007 में फ्लैट खरीदार समझौते हुए. प्रत्येक फ्लैट की कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक थी और 2013 तक कब्जा देने का वादा किया गया था. लेकिन जब खरीदार साइट पर पहुंचे तो निर्माण कार्य अधूरा मिला. घर खरीदारों ने 2021 में हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (HRERA) का रुख किया. HRERA ने बिल्डर को खरीदारों के पक्ष में मुआवजा देने का आदेश दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिल्डर ने इन आदेशों को कभी चुनौती नहीं दी, इसलिए वे अंतिम रूप से लागू हो चुके हैं. इसके बावजूद न तो फ्लैट का कब्जा दिया गया और न ही मुआवजा. जब बिल्डर ने आदेशों का पालन नहीं किया तो खरीदारों ने 2022 में निष्पादन की कार्रवाई शुरू की.
कलेक्टर डेवलपर से “एक भी पैसा” वसूलने में सफल नहीं हुए
कोर्ट ने टिप्पणी की कि गुरुग्राम के कलेक्टर डेवलपर से “एक भी पैसा” वसूलने में सफल नहीं हुए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक मामले में वारंट तामील करने गए अधिकारियों को कंपनी परिसर में प्रवेश तक नहीं करने दिया गया. पुलिस सहायता मिलने के बावजूद आदेशों का पालन नहीं कराया जा सका. कोर्ट ने इसे गंभीर प्रशासनिक विफलता बताया. पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य के अधिकारी, विशेषकर कलेक्टर और स्थानीय पुलिस, या तो बिल्डर से मिलीभगत कर रहे हैं या फिर अपनी वैधानिक जिम्मेदारियां निभाने में विफल रहे हैं.
निदेशकों के बैंक खाते फ्रीज किए जाएं : SC
कोर्ट ने कहा कि पार्श्वनाथ हेसा डेवलपर्स लिमिटेड और पारसनाथ डेवलपर्स लिमिटेड के निदेशकों के बैंक खाते फ्रीज किए जाएं. निदेशकों के खिलाफ जारी वारंटों का सख्ती से पालन कराया जाए. अगली सुनवाई पर पेश न होने पर गैर-जमानती वारंट जारी किए जाएंगे. परियोजना में किसी भी फ्लैट का कब्जा देने या किसी तीसरे पक्ष के अधिकार बनाने पर रोक रहेगी. हरियाणा के मुख्य सचिव, डीजीपी, सभी कलेक्टर, सभी आयुक्त और संबंधित बैंक अदालत के आदेशों का पालन सुनिश्चित करें और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करें.
-सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला केवल कुछ याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रियल एस्टेट अधिनियम (RERA) के प्रभावी क्रियान्वयन और उसके आदेशों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है. कोर्ट ने यह भी कहा कि बिल्डरों ने HRERA के आदेशों की खुलेआम अवहेलना की है और वे अब भी खरीदारों को तैयार फ्लैट सौंपने तथा देय राशि का भुगतान करने के लिए बाध्य हैं.
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