
हिमाचल के सिरमौर और सोलन में भारी बारिश और मौसम विभाग द्वारा जारी ऑरेंज अलर्ट के मद्देनजर जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए शुक्रवार, 10 जुलाई को सभी सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों तथा आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद रखने के आदेश जारी किए हैं.
जिलाधीश एवं अध्यक्ष, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) सोलन और सिरमौर डीसी द्वारा आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 की धारा-30 के तहत यह आदेश जारी किए हैं. आदेश में कहा गया है कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) शिमला ने सोलन सिरमौर सहित अन्य जिलों के लिए भारी से भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है. इससे भूस्खलन, अचानक बाढ़, पेड़ों के गिरने और सड़कों के अवरुद्ध होने जैसी घटनाओं की आशंका है, जिससे जनजीवन और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है.
लगातार बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन के खतरे के चलते लिया गया निर्णय
प्रशासन के अनुसार जिले में लगातार हो रही बारिश के कारण ग्रामीण सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई है और विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है. छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है. हालांकि, आवासीय कॉलेजों/विश्वविद्यालयों और चिकित्सा शिक्षा संस्थानों को इस आदेश से छूट दी गई है. साथ ही स्कूलों के शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी अपने-अपने संस्थानों में उपस्थित रहेंगे. जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों और शिक्षण संस्थानों को आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं.
वहीं सिरमौर में जारी भारी बरसात के चलते प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र माजरा का परिसर जलमग्न हुआ है. परिसर में पानी भरने से स्थानीय लोगों और मरीजों को इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचना मुश्किल हुआ है. पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार मूसलाधार बारिश की वजह से पीएचसी माजरा के मुख्य द्वार से लेकर अंदरूनी परिसर तक कई फीट पानी जमा है. स्थिति इतनी बदतर है कि मरीजों को घुटनों तक भरे गंदे पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है.
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर की इस बदहाली को लेकर स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ रोष पनपा है. ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बरसात में यहां जलभराव की समस्या पैदा होती है, लेकिन विभाग द्वारा निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कोई स्थायी कदम नहीं उठाए गए हैं. लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य केंद्र जैसी आवश्यक जगह पर इस तरह की लापरवाही मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ है. स्थानीय लोगों ने परिसर से तुरंत पानी की निकासी करवाने और भविष्य में जलभराव रोकने के लिए ठोस ड्रेनेज सिस्टम बनाने की गुहार लगाई हैं.
स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य द्बार समेत परिसर में बरसाती पानी के चलते हुआ जलभराव
उधर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र माजरा में तैनात स्वास्थ्य पर्यवेक्षक देवेन्द्र कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य प्रवेश द्बार समेत परिसर में बरसाती पानी के निकासी न होने के चलते जलभराव हुआ हैं. स्वास्थ्य केंद्र इलाज करवाने आने वाले लोगों का केंद्र तक पहुंचना मुश्किल हुआ हैं. उन्होंने बताया कि समस्या से विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया गया हैं ताकि जल्द समस्या का समाधान हो.
शिमला में भी ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन के दौरान रिकॉर्ड पर्यटक वाहनों की आवाजाही रही. मानसून की बरसातों ने पर्यटन सीजन पर ब्रेक लगा दी है. मई से जुलाई तक शहर के विभिन्न प्रवेश मार्गों से करीब 22 लाख वाहनों की आवाजाही दर्ज की गई, जिसमें मई में 8.5 लाख, जून में 10.5 लाख और जुलाई में अब तक लगभग 3 लाख वाहन शहर में पहुंचे.
पर्यटन सीजन में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए शिमला पुलिस ने यातायात प्रबंधन के लिए अतिरिक्त संसाधन तैनात किए. पुलिस और होमगार्ड कर्मियों की संख्या 136 से बढ़ाकर 265 की गई, जबकि लगभग 50 स्वयं सेवकों और 32 ट्रैफिक बाइक राइडर्स को भी ड्यूटी पर लगाया गया. इससे ट्रैफिक जाम या बाधा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकी.
शहर को पांच ट्रैफिक सेक्टरों में विभाजित कर एनजीओ ग्रेड-वन को सौंपी जिम्मेदारी
शहर को पांच ट्रैफिक सेक्टरों में विभाजित कर प्रत्येक सेक्टर की जिम्मेदारी डीएसपी ट्रैफिक की निगरानी में एनजीओ ग्रेड-वन अधिकारियों को सौंपी गई. अधिकारियों ने फील्ड में मौजूद रहकर यातायात संचालन की कमान संभाली, जबकि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी लगातार निगरानी करते रहे और मौके पर आवश्यक निर्णय लेते रहे.
भीतरी शहर में ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए कुफरी, मशोबरा, नालदेहरा, अपर शिमला और किन्नौर की ओर जाने वाले वाहनों को शोगी-मेहली बाईपास मार्ग अपनाने के लिए प्रेरित किया गया. इसके चलते प्रतिदिन औसतन 600 से 800 वाहन इस वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करते रहे, जिससे शहर के मुख्य मार्गों पर दबाव कम हुआ.
पूरे सीजन कहीं भी पूरी तरह नहीं रोका गया ट्रैफिक फ्लो
शिमला पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह के अनुसार पूरे सीजन के दौरान ट्रैफिक फ्लो को कहीं भी पूरी तरह नहीं रोका गया और आवश्यकता पड़ने पर केवल चरणबद्ध ट्रैफिक रेगुलेशन किया गया. साथ ही ट्रैवलर, अर्बेनिया और स्कैनिया जैसे बड़े यात्री वाहनों को प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंचने की अनुमति दी गई, जिससे पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला.
वहीं पार्किंग प्रबंधन ने सोशल मीडिया के माध्यम से रीयल-टाइम ट्रैफिक अपडेट, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा और इंटरसेप्टर वाहनों के जरिए नियमों का सख्ती से पालन करवाना भी इस रणनीति का हिस्सा रहा. शिमला पुलिस ने इस सफल यातायात प्रबंधन का श्रेय ट्रैफिक विंग, जिला पुलिस, होमगार्ड, एनसीसी, एनएसएस, स्कूली छात्रों, स्थानीय स्वयंसेवकों और अन्य विभागों के समन्वित प्रयासों के साथ-साथ नागरिकों और पर्यटकों के सहयोग को दिया है. पुलिस ने भविष्य में भी सुरक्षित और व्यवस्थित यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी से यातायात नियमों का पालन करने की अपील की है.
Himachal Weather Today: 6 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, लोगों से सावधानी बरतने की अपील