

किसानों की जमीन चली गई और इसले लिए सालों तक हक की लड़ाई चली और आखिरकार कोर्ट ने किसानों के हक में राष्ट्रिय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को अब तक का सबसे बड़ा झटका दिया है. बता दें कि महाराष्ट्र के वाशिम जिले में न्याय की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने सरकारी तंत्र की नींद उड़ा दी है. कोर्ट ने NHAI के मालिकाना हक वाले धुमका-तोंडगाव टोल प्लाजा को जब्त करने आदेश दिया है. कोर्ट ने आदेश दिया है कि 20 जुलाई तक अगर किसानों को बढ़ी हुई मुआवजा राशि नहीं दी गई तो टोल प्लाजा पर प्रत्यक्ष रूप से जब्ती की कार्रवाई की जाएगी. मजाक मत समझिए.
मुआवजे में हुआ ये अन्याय
गौरतलब है कि एक किसान के लिए उसकी जमीन सिर्फ संपत्ति नहीं होती, बल्कि उसके परिवार का भविष्य भी होती है, जिसे वह अपने खून-पसीने से सिंचता है. वाशिम जिले के किसान बेबी गर्जे और विठ्ठल गर्जे की गैर-कृषि जमीन से राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण हुआ था. हाइवे के लिए जमीन का अधिग्रहण तो कर लिया गया, लेकिन मुआवजा देते समय उनके साथ अन्याय हुआ. जमीन के भीतर आने वाले रास्तों और खुली जगह की कीमत का आकलन ही नहीं किया गया. इसके साथ ही उनके कमर्शियल प्लॉट का मुआवजा भी बहुत कम दर पर तय किया गया, जिससे किसान परिवार को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा.
किसानों ने नहीं मानी हार
मुआवजे में हुई इस धांधली के खिलाफ किसानों ने हार नहीं मानी. जिला कलेक्टर कार्यालय से लेकर कोर्ट के दरवाजों तक उन्होंने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी. जिला न्यायालय ने किसानों के दावों को सही माना और NHAI को बढ़ी हुई मुआवजा राशि देने का आदेश दिया. उधर, कोर्ट का साफ आदेश होने के बावजूद NHAI ने किसानों को मुआवजा नहीं दिया, सरकारी विभाग की इस टालमटोल से तंग आकर किसानों को दोबारा अदालत का रुख करना पड़ा. किसानों की ओर से वकील उदय देशमुख ने कहा कि अदालत के आदेश के बाद भी जब किसानों को उनका हक नहीं मिला तो हमें दोबारा गुहार लगानी पड़ी. इस बार माननीय न्यायालय ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है.
कोर्ट ने दी है 20 तारीख की डेडलाइन
इस बार प्रमुख जिला न्यायाधीश ने NHAI के रवैये पर सख्त नाराजगी जताते हुए सीधे धुमका-तोंडगाव टोल प्लाजा को ही कुर्क करने का वारंट जारी कर दिया. कोर्ट ने साफ किया है कि यदि 20 जुलाई तक मुआवजे की पूरी रकम कोर्ट में जमा नहीं की गई तो टोल प्लाजा को सरकारी नियंत्रण में लेकर जब्ती की सीधी कार्रवाई की जाएगी. यह फैसला उन तमाम किसानों के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर आया है, जो सरकारी परियोजनाओं में अपनी जमीन गंवाने के बाद दफ्तरों के चक्कर काटते रहते हैं, यह मामला साबित करता है कि अगर संयम, चिकाटी और न्यायपालिका पर भरोसा रखा जाए तो जीत पक्की है. अब पूरे वाशिम जिले की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि NHAI 20 जुलाई से पहले किसानों का भुगतान करता है या फिर उसे अपना टोल प्लाजा गंवाना पड़ता है.





