
Succsess Story: सफलता की राह में अगर इरादे मजबूत हों, तो गरीबी और लगातार मिलने वाली असफलताएं भी आपके कदम नहीं रोक सकतीं. इस बात को सच कर दिखाया है बिहार के बेगूसराय जिले के रहने वाले सूरज कुमार ने. बिहार लोक सेवा आयोग की 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में सफलता हासिल कर सूरज कुमार प्रशासनिक अधिकारी (SDM) बन गए हैं. एक साधारण परिवार में जन्मे सूरज की यह कामयाबी उन लाखों युवाओं के लिए मिसाल है, जो कमजोर आर्थिक स्थिति को अपनी मंजिल का रोड़ा मानते हैं.

पिता बेचते थे ताड़ी, बेटा 4 बार फेल होकर बना SDM: बिहार के सूरज कुमार की रुला देने वाली सफलता
ताड़ी बेचने वाले पिता का त्याग आया काम
ताड़ी बेचने वाले के बेटे से बिहार में एसडीएम तक सफर तय कर चुके सूरज कुमार बेगूसराय जिले के नावकोठी गांव के रहने वाले हैं. उनके पिता रामचंद्र चौधरी पुश्तैनी पेशे के रूप में ताड़ी उतारकर और बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते आए हैं. आर्थिक तंगी से घिरे रहने के बावजूद रामचंद्र चौधरी ने कभी अपने बेटे के सपनों से समझौता नहीं किया. ताड़ी बेचने की सीमित आय के बावजूद उन्होंने बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी और उनके बड़े सपनों को हमेशा प्रोत्साहन दिया.
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BPSC Success Story: ताड़ी बेचने वाले का बेटा बना SDM, 4 विफलता के बाद 5वें प्रयास में सूरज कुमार ने रचा इतिहास
इंजीनियरिंग के बाद चुनी प्रशासनिक सेवा की राह
सूरज ने अपनी शुरुआती शिक्षा अपने गांव के एपीएस प्लस टू स्कूल, नावकोठी से पूरी की. इसके बाद उन्होंने बेगूसराय के प्रतिष्ठित जी.डी. कॉलेज से इंटरमीडिएट किया. उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने तमिलनाडु की प्रसिद्ध अन्ना यूनिवर्सिटी का रुख किया, जहां से उन्होंने इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री हासिल की. इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद सूरज ने देश और समाज सेवा के लिए प्रशासनिक अधिकारी बनने का फैसला किया और दिल्ली जाकर BPSC तथा सिविल सर्विसेज की तैयारी में जुट गए.
4 लगातार असफलताएं, फिर भी नहीं डिगा विश्वास
दिल्ली में तैयारी के दौरान सूरज का सफर आसान नहीं रहा. एक के बाद एक उन्हें लगातार 4 प्रयासों में असफलता का सामना करना पड़ा. हर विफलता के साथ पारिवारिक दबाव, सामाजिक ताने और आर्थिक तंगी का बोझ बढ़ता गया. लोगों ने उनकी क्षमताओं पर सवाल भी उठाए, लेकिन सूरज और उनके पिता के धैर्य ने हार नहीं मानी. अपनी कमियों को सुधारते हुए सूरज ने अपनी मेहनत जारी रखी और आखिरकार 5वें प्रयास में BPSC परीक्षा पास करके SDM बनने का सपना पूरा कर दिखाया.
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लगातार 4 बार असफलता, समाज के ताने… जानिए बेगूसराय के ताड़ी बेचने वाले के बेटे के SDM बनने की कहानी
70वीं BPSC परीक्षा परिणाम
बिहार लोक सेवा आयोग ने 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में इस बार एसडीएम पद के लिए करीब 200 कैंडिडेट्स का सिलेक्शन हुआ है. उन्हीं से एक सूरज कुमार हैं. श्रद्धा पांडे ने 593 मार्क्स पाकर टॉप किया. शशांक गौरव और आयुष बिजॉय दोनों ने 592 अंक हासिल करके दूसरा स्थान प्राप्त किया है. लिखित परीक्षा 2025 में 25 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच पटना के 32 परीक्षा केंद्रों पर हुई थी, जिसमें कुल 20,034 अभ्यर्थी शामिल हुए थे. इसके बाद मुख्य परीक्षा का परिणाम 16 दिसंबर 2025 को जारी किया गया था. मेन्स क्लियर करने के बाद कुल 5,401 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए चुना गया था, जिसके बाद 20 जून 2026 को फाइनल रिजल्ट आया.
ताड़ी का सेवन लोग शराब के विकल्प के रूप में
सूरज की यह सफलता केवल एक पद हासिल करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन रुढ़िवादी सोच पर भी प्रहार है जो पृष्ठभूमि के आधार पर युवाओं का भविष्य आंकती हैं. एक ओर जहां शराबबंदी वाले बिहार में ताड़ी का सेवन लोग शराब के विकल्प के रूप में करते हैं, वहीं दूसरी ओर ताड़ी बेचकर बेटे को SDM बनाने वाले पिता रामचंद्र चौधरी की यह कहानी समाज के लिए एक अनूठी मिसाल बन गई है. सूरज कुमार की यह उपलब्धि साबित करती है कि अगर मन में दृढ़ संकल्प और अटूट धैर्य हो, तो कोई भी सपना असंभव नहीं है.





