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भारत में डॉक्टरी का लाइसेंस लेने वाली परीक्षा FMGE इतनी मुश्किल क्यों? 88% उम्मीदवार फेल | Why is FMGE exam is too difficult medical licensing exam in india 88 percent candidates failed



FMGE 2026 Result: विदेश से एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई करने वाले उम्मीदवारों को देश में मेडिकल की प्रेक्टिस करने के लिए फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE)  देना होता है. हर साल ये परीक्षा नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) आयोजित करता है. इसे देश की कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है. बहुत कम छात्र इसे पास कर पाते हैं. इस साल जून माह में हुई FMGE परीक्षा के नतीजे जारी किए गए हैं, जिन्‍हें देखकर ये बात साफ होती है कि इस परीक्षा का स्‍तर बेहद कठिन है. जून 2026 परीक्षा परिणाम के अनुसार इस बार कुल 37,448 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए थे. जिनमें से केवल 5,086 सफल हो सके हैं. 31,645 छात्रों को सफलता नहीं मिली है, वहीं 1,148 अनुपस्थित रहे हैं. यानी करीबन 88% उम्मीदवार फेल हुए हैं. 

इतनी कठिन क्यों है FMGE परीक्षा

विदेश से MBBS करने वाले हजारों भारतीय छात्रों के लिए Foreign Medical Graduate Examination (FMGE) सबसे बड़ी चुनौती मानी जाती है. भारत में मेडिकल प्रैक्टिस का लाइसेंस पाने के लिए इस परीक्षा को पास करना अनिवार्य है. 

FMGE जून 2026 के परिणाम में केवल लगभग 12.4% उम्मीदवार ही सफल हो सके, जबकि करीब 88% उम्मीदवार परीक्षा में असफल रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर FMGE इतनी कठिन क्यों है? क्या परीक्षा का स्तर बहुत ऊंचा है या इसके पीछे अन्य कारण भी हैं?

FMGE क्या है

Foreign Medical Graduate Examination (FMGE) एक स्क्रीनिंग टेस्ट है, जिसे National Board of Examinations in Medical Sciences (NBEMS) आयोजित करता है. यह परीक्षा उन भारतीय नागरिकों और OCI (Overseas Citizen of India) के लिए अनिवार्य है, जिन्होंने भारत के बाहर से MBBS या समकक्ष मेडिकल डिग्री प्राप्त की है और भारत में डॉक्टर के रूप में पंजीकरण (Registration) कराना चाहते हैं. FMGE को पास किए बिना भारत में मेडिकल प्रैक्टिस की अनुमति नहीं मिलती है. 

FMGE क्यों आयोजित की जाती है

इस परीक्षा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेश से पढ़कर आने वाले डॉक्टरों का ज्ञान भारत के MBBS मानकों के अनुरूप है. भारत में चिकित्सा सेवा सीधे मरीजों के जीवन से जुड़ी होती है. इसलिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि हर डॉक्टर न्यूनतम आवश्यक ज्ञान और कौशल रखता हो. 

FMGE इतनी कठिन क्यों है

पूरा MBBS सिलेबस पूछ लिया जाता है

FMGE किसी एक विषय की परीक्षा नहीं है. इसमें पूरे MBBS पाठ्यक्रम से प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें शामिल हैं. जैसे-

Anatomy
Physiology
Biochemistry
Pathology
Pharmacology
Microbiology
Forensic Medicine
Community Medicine
Medicine
Surgery
Obstetrics & Gynaecology
Pediatrics
Orthopaedics
ENT
Ophthalmology
Psychiatry
Dermatology
Radiology

यानी लगभग पूरे मेडिकल पाठ्यक्रम की दोबारा परीक्षा देनी होती है. 

पास होने के लिए 50% अंक अनिवार्य

FMGE में कुल 300 अंक होते हैं. उम्मीदवार को पास होने के लिए कम से कम 150 अंक (50%) लाने ही पड़ते हैं. यहां कोई मेरिट या कटऑफ नहीं होती. अगर 149 अंक आए तो भी उम्मीदवार को फेल माना जाता है. 

अलग-अलग देशों की मेडिकल शिक्षा में अंतर

भारतीय छात्र रूस, चीन, जॉर्जिया, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, फिलीपींस, नेपाल और अन्य देशों से MBBS करते हैं. हर देश का मेडिकल पाठ्यक्रम,  क्लिनिकल ट्रेनिंग, अनुभव, परीक्षा प्रणाली अलग होती है. FMGE भारतीय MBBS मानकों के अनुसार बनाई जाती है, इसलिए कई छात्रों को पाठ्यक्रम का अंतर भारी पड़ता है. 

क्लिनिकल प्रश्नों का ऊंचा स्तर

FMGE केवल रटकर पास होने वाली परीक्षा नहीं है. इसमें केस आधारित और क्लिनिकल निर्णय क्षमता से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं. इसके लिए विषय की गहरी समझ जरूरी होती है. 

तैयारी की कमी

विशेषज्ञों का मानना है कि कई छात्र विदेश में पढ़ाई पूरी करने के बाद सीधे FMGE देने आ जाते हैं, जबकि परीक्षा के लिए अलग से व्यवस्थित तैयारी की आवश्यकता होती है. कई अभ्यर्थी पहले प्रयास को गंभीरता से नहीं लेते और बाद में बार-बार परीक्षा देने की स्थिति में फंस जाते हैं. 

क्या पास प्रतिशत हमेशा इतना कम रहता है?

हां, पिछले कई वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि FMGE का पास प्रतिशत लगातार कम रहा है. कई सत्रों में यह 10% से 25% के बीच रहा है. यही कारण है कि इसे भारत की सबसे कठिन लाइसेंसिंग परीक्षाओं में गिना जाता है. 

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