
नई दिल्ली:
दुनिया में सबसे ज्यादा हथियार कौन खरीदता है? आज से कुछ साल पहले तक इसका जवाब भारत था. अब यही भारत धीरे-धीरे ही सही, लेकिन खरीदार की जगह बेचने वाला भी बन रहा है. आज के समय में 80 से ज्यादा देशों को अपने हथियार बेच रहा है.
ये सारी बातें इसलिए क्योंकि अब भारत अपनी ‘ब्रह्मोस’ और ‘अस्त्र’ मिसाइल इंडोनेशिया को सप्लाई करेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे में भारत और इंडोनेशिया के बीच इसे लेकर समझौता हुआ है.
पिछले साल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत ने इन दोनों मिसाइलों का इस्तेमाल किया था.
डिफेंस एक्सपोर्ट की पहचान ‘ब्रह्मोस’
शायद यह पहली बार है जब प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में भारत के दो डिफेंस एक्सपोर्ट डील की घोषणा की गई, जिनकी कीमत 60 करोड़ डॉलर से ज्यादा आंकी गई है.
इंडोनेशिया से पहले वियतनाम और फिलीपींस के साथ ‘ब्रह्मोस’ मिसाइल को लेकर सौदा हो चुका है. ‘ब्रह्मोस’ को भारत और रूस का जॉइंट वेंचर ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड बनाता है.
‘ब्रह्मोस’ आज के समय में भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट बन गया है. वहीं, अब भारत की अपनी बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल ‘अस्त्र’ से उम्मीद है कि यह देश का अगला बड़ा मिसाइल एक्सपोर्ट प्रोडक्ट बनेगा.
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एक्सपोर्टर से इम्पोर्टर बना भारत
स्वीडिश संस्था स्टॉकहोम रिसर्च पीस एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के मुताबिक, हथियारों के मामले में भारत कभी दुनिया का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर हुआ करता था. अभी भारत की जगह यूक्रेन ने ले ली है. इसकी वजह यह है कि यूक्रेन चार साल से रूस के साथ युद्ध लड़ रहा है और उसे हथियारों की जरूरत है.
SIPRI की रिपोर्ट बताती है कि 2016-20 की तुलना में 2021-25 में भारत के हथियारों का एक्सपोर्ट 4 फीसदी कम हो गया है. इसकी वजह यह है कि भारत अब खुद भी हथियार बना रहा है.
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, पिछले एक दशक में न सिर्फ भारत का रक्षा बजट बढ़ा है, बल्कि डिफेंस प्रोडक्शन और डिफेंस एक्सपोर्ट में भी काफी ग्रोथ हुई है.
Did you know?
India’s defence exports have surged 55-fold since 2014, reaching ₹38,400 crore in FY 2025-26.
Today, Indian defence equipment is exported to 80+ countries worldwide. #12YearsOfSurakshitBharat pic.twitter.com/pvMgyQr8cC
— PIB India (@PIB_India) June 17, 2026
2013-14 में भारत का रक्षा बजट 2.53 लाख करोड़ रुपये था, जो 2026-27 में बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. इसी दौरान भारत का डिफेंस प्रोडक्शन 2014-15 में 46,429 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 2025-26 में 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया.
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, आज के समय में भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट 80 से ज्यादा देशों में होने लगा है. 2013-14 में भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट 686 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. इसका मतलब हुआ कि 2013-14 से 2025-26 के बीच भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट 5500% से ज्यादा बढ़ गया है.
भारतीय मिसाइलें पहली पसंद
भारतीय मिसाइलों को दुनिया पसंद कर रही है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद ‘ब्रह्मोस’ की अहमियत और भी ज्यादा बढ़ गई है. इंडोनेशिया तीसरा देश है जो ‘ब्रह्मोस’ खरीदने वाला है.
डिफेंस एक्सपोर्ट की इस यात्रा में ‘अस्त्र’ एक नया मील का पत्थर साबित हो सकती है. इस मिसाइल को डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने बनाया है. ‘अस्त्र’ भारत की पहली स्वदेशी ‘बियॉन्ड-विज़ुअल-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल’ (BVRAAM) है.

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2019 में भारतीय वायु सेना में शामिल की गई यह मिसाइल हर मौसम में, नजर की सीमा से दूर (बियॉन्ड विज़ुअल रेंज) तेजी से मुड़ने वाले फाइटर जेट्स को निशाना बनाने के लिए डिजाइन की गई है. ‘अस्त्र Mk1’ की मारक क्षमता 100 किलोमीटर से ज्यादा है और इसे Su-30 MKI फाइटर जेट के साथ इंटीग्रेट किया गया है.
भारत का मिसाइल एक्सपोर्ट पोर्टफोलियो अब धीरे-धीरे बढ़ रहा है. अब इसमें ‘आकाश वेपन सिस्टम’ के जरिए देश में बनी एयर डिफेंस क्षमताएं भी शामिल हो गई हैं. ‘आकाश’ भारत का पहला ऐसा स्वदेशी ‘सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम’ है जिसे विदेश में भी ग्राहक मिला है. इसे फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर, क्रूज मिसाइल और UAV से रणनीतिक संपत्तियों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है. इसे अर्मेनिया खरीद रहा है.
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और क्या-क्या एक्सपोर्ट कर रहा भारत?
भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट सिर्फ मिसाइल सिस्टम तक ही सीमित नहीं है.
SIPRI के रिकॉर्ड दिखाते हैं कि भारत में बने नेवल और मैरीटाइम प्लेटफॉर्म हिंद महासागर क्षेत्र के कई देशों तक पहुंच रहे हैं, जिनमें मालदीव, मॉरिशस, मोजैम्बिक, म्यांमार, सेशेल्स, श्रीलंका और वियतनाम शामिल हैं. इन एक्सपोर्ट में Do-228 मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट, L&T फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट, FPV-300 पेट्रोल वेसल, समर्थ, श्येना एंटी-सबमरीन सिस्टम और खुकरी क्लास प्लेटफॉर्म शामिल हैं, जो मैरीटाइम सिक्योरिटी एसेट्स के सप्लायर के तौर पर भारत की बढ़ती भूमिका को दिखाते हैं.
डेटाबेस में अफगानिस्तान, मालदीव, मॉरिशस और नेपाल को ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर और Mi-24D हेलिकॉप्टर, मोरक्को को इन्फेंट्री प्रोटेक्टेड मोबिलिटी व्हीकल, आर्मेनिया और बांग्लादेश को ATAGS, MArG और OFB E1 मोर्टार जैसे आर्टिलरी सिस्टम और आर्मेनिया, म्यांमार और सेशेल्स को स्वाति वेपन लोकेटिंग रडार, रेवती और M-2022 रडार सिस्टम के निर्यात का भी जिक्र है.
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