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दिल्‍ली जैसा नजारा, इंदौर-भोपाल हाईवे पर बनी दाल-बाटी, केंद्रीय मंत्री के इलाके में सड़क पर क्‍यों उतरे किसान? | Sehore Farmers Protest on Indore-Bhopal Highway Delhi Like Shivraj Singh Chauhan


सीहोर: साल 2024-25 में जिस तरह का उग्र किसान आंदोलन दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के बॉर्डर पर देखने को मिला था, ठीक वैसा ही नजारा 6 जुलाई सोमवार को जिले के भैरुंदा में दिखाई दिया. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह क्षेत्र में मूंग खरीदी की अव्यवस्थाओं का आरोप लगाते हुए नाराज किसान किसान स्वराज संगठन के नेतृत्व में सड़क पर उतर आए. करीब 5 हजार किसानों के ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर आने से इंदौर-भोपाल हाईवे घंटों तक पूरी तरह ठप रहा. 

आंदोलनकारी किसान सीधे कलेक्टर को मौके पर बुलाने की मांग को लेकर अड़ गए. उन्‍होंने साफ-शब्दों में कहा कि जब तक कलेक्टर खुद आकर लिखित में आश्वासन नहीं देंगे चक्काजाम खत्म नहीं होगा. इसके बाद  इंदौर-भोपाल हाईवे पर क‍िसानों ने  दाल-बाटी बनाकर खाई. 

भैरुंदा में सड़क पर ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर उतरे हजारों किसान.

भैरुंदा में सड़क पर ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर उतरे हजारों किसान.

दरअसल, 6 जून की सुबह से ही भैरुंदा की कृषि उपज मंडी परिसर में पंजाब-हरियाणा आंदोलन की तर्ज पर हजारों किसानों का जुटना शुरू हो गया था. दोपहर होते-होते करीब दो हजार ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और हार्वेस्टर के साथ किसानों ने एक विशाल महा रैली निकाली. यह रैली नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरती हुई जैसे ही दुर्गा चौक पहुंची किसानों ने अपने ट्रैक्टरों को बीच सड़क पर आड़ा-तिरछा खड़ा कर दिया. भारी तादाद में ट्रैक्टरों के जमावड़े से इंदौर-भोपाल हाईवे पूरी तरह जाम हो गया. 

आरपार की लड़ाई के मूड में किसान

सूचना पर प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची तो आंदोलन का नेतृत्व कर रहे किसान स्वराज संगठन के पदाधिकारी गजेंद्र जाट ने साफ कहा क‍ि अब कोरे आश्वासनों से बात नहीं बनेगी. किसानों ने मांग करते हुए कहा क‍ि मूंग की शत प्रतिशत समर्थन मूल्य पर खरीदी की जाए, प्रति एकड़ 6 क्विंटल खरीदी की सीमा तय हो. किसान नेताओं ने कहा कि खरीदी प्रक्रिया में जितनी भी तकनीकी बाधाएं और सरकारी सीमाएं लगाई गई हैं, उन्हें तुरंत हटाया जाए. इन मांगों पर अंतिम निर्णय के लिए कलेक्टर की उपस्थिति अनिवार्य है. 

किसानों ने विरोध के दौरान सड़क पर बनाकर खाई दाल-बाटी.

किसानों ने विरोध के दौरान सड़क पर बनाकर खाई दाल-बाटी.

हाइवे पर कंडे सुलगाकर किसानों ने बनाई दाल-बाटी 

करीब 5 घंटे तक चले इस चक्काजाम के दौरान किसानों ने दिल्ली आंदोलन की यादें ताजा करते हुए हाईवे पर ही कंडे सुलगाए और दाल-बाटी बनाना शुरू कर दिया. कुछ देर बाद सभी ने मिलकर खाना खाया और फ‍िर वहां चाय बनाकर भी पी. भोजन के बाद सभी किसानों ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया.  

हाइवे के दोनों ओर लगा 5-5 किलोमीटर लंबा जाम

क‍िसानों के विरोध के चलते इंदौर, भोपाल और सीहोर की ओर आने-जाने वाले सैकड़ों यात्री वाहन, बसें और मालवाहक ट्र्कों की लंबी कतारें लगना शुरू हो गईं. देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर करीब 5-5 किलोमीटर लंबा जाम लग गया. हालात को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने मोर्चा संभाला और ट्रैफिक को वैकल्पिक रूटों पर डायवर्ट किया.  
मांग पूरी नहीं हुईं तो 11 जुलाई को फ‍िर लौटेंगे किसान.

मांग पूरी नहीं हुईं तो 11 जुलाई को फ‍िर लौटेंगे किसान.

अपर कलेक्टर ब्रजेश सक्सेना के पहुंचने के बाद माने किसान 

इधर, भैरुंदा एसडीएम सुधीर कुशवाह सहित भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी लगातार किसानों को समझाकर उन्‍हें हटाने की कोशिश करते रहे, लेकिन वे कलेक्टर को बुलाने पर अड़े रहे. इसके बाद अपर कलेक्टर ब्रजेश सक्सेना ने किसानों के बीच पहुचकर उनकी बात सुनी और उन्‍हें आश्‍वासन दिया क‍ि 10 जुलाई तक आपकी समस्या का समाधान हो जाएगा. इसके बाद किसान हटने के लिए तैयार हुए, हालांक‍ि वह जाते-जाते चेतावनी दे गए क‍ि अगर तय सीमा में मांग पूरी नहीं हुई तो 11 जुलाई को महाआंदोलन होगा. 




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