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अदाणी ग्रुप के खिलाफ केस में अमेरिकी न्याय विभाग ने पकड़ा खामियों का पिटारा | us doj in 10 pages affidavit on adani group case dismissal talk about unethical leak controversy



अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने अदाणी ग्रुप मामले को संभालने के अपने ही तरीके पर सवाल उठाए हैं. विभाग ने हाल ही में सामने आए एक दस्तावेज में कहा कि मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया के दौरान कई कमियां और समस्याएं थीं. साथ ही विभाग ने केस में सबूतों की कमी, लीक की बात मानते हुए कहा कि भारत में हुई जांच में कुछ नहीं मिला और निवेशकों को कोई नुकसान नहीं हुआ, इसलिए इस केस को बंद करना ही सही फैसला था.

विभाग के वकील ने ही लीक की खुफिया जानकारी

10 पेज के हलफनामे में जस्टिस डिपार्टमेंट ने कहा कि मामले के दौरान कई स्तर पर समस्याएं थीं. विभाग ने अपने ही एक वकील की तीखी आलोचना करते हुए बताया कि, उस वकील ने केस से जुड़ी बेहद गोपनीय और आंतरिक जानकारी गलत तरीकों से मीडिया तक पहुंचाई. जस्टिस डिपार्टमेंट के अनुसार, इन लीक की वजह से प्रॉसिक्यूटर के मामले की कई कमजोरियां सामने आ गईं.

मीडिया ट्रायल नहीं, अदालत में हो फैसला

जस्टिस डिपार्टमेंट ने कहा कि किसी मामले को आगे बढ़ाने या उसे वापस लेने पर बहस मीडिया के जरिए नहीं, बल्कि अदालत में होनी चाहिए. डिपार्टमेंट ने जोर देकर कहा कि मीडिया के जरिए अदालत को प्रभावित करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए. किसी मामले को रद्द करना कोई साधारण या राजनीतिक फैसला नहीं होता, बल्कि ये एक बड़ा फैसला है, जिसका सीधा असर लोगों पर पड़ता है. 

DOJ ने चार्जशीट को लेकर भी कड़ी आपत्ति जताई और इसे एक ऐसा कदम बताया, जिसका उद्देश्य केवल नाम उजागर करना और बदनामी फैलाना था. डिपार्टमेंट के अनुसार, मामले की असल में सुनवाई होने की संभावना बहुत ही कम थी. चार्जशीट को बाइडेन सरकार के कार्यकाल के आखिरी दिनों में सार्वजनिक किया गया, जिससे आने वाली सरकार के लिए मुश्किल स्थिति पैदा हो गई.

सबूतों की कमी

यूएस डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने (DOJ) ने आगे कहा कि मामले को वापस लेने का फैसला मुश्किल नहीं था, क्योंकि इन आरोपों का शुरू से ही कोई आधार नहीं था. या तो आरोप लगाए ही नहीं जाने चाहिए थे, या फिर काफी पहले हटा दिए जाने चाहिए थे. इसके अलावा DOJ ने ये भी माना कि मामले में सबूतों से जुड़ी कई बड़ी दिक्कतें थीं, जिनकी वजह से अदालत में केस को साबित करना मुश्किल हो सकता था.

भारत में भी क्लीन चिट

डिपार्टमेंट ने कहा कि भारत में इस मामले से जुड़े अधिकारियों ने इन आरोपों की जांच की, लेकिन उन्हें ऐसा कोई मामला नहीं मिला जिस पर कार्रवाई की जा सके. साथ ही निवेशकों को किसी तरह का वित्तीय नुकसान नहीं हुआ. अगर इस मामले में कोई कार्रवाई सही मानी भी जाती, तो वो आपराधिक मुकदमे की बजाय ज्यादातर सिविल कार्रवाई के दायरे में आती.

समझौते के दावे पूरी तरह गलत

जस्टिस डिपार्टमेंट ने मामले को खारिज किए जाने को लेकर चल रही बाहरी अटकलों और अफवाहों को भी गलत बताया. डिपार्टमेंट ने उन दावों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि ये फैसला किसी निवेश या दूसरे समझौते से जुड़ा हुआ था. डिपार्टमेंट ने साफ कहा कि निवेश से जुड़े ऐसे आरोप पूरी तरह निराधार हैं. इस पत्र के आखिर में डिपार्टमेंट ने कहा कि अदाणी ग्रुप के खिलाफ आपराधिक मामले को आगे बढ़ाना उचित नहीं था और इस पर समय और संसाधन खर्च करने का कोई मतलब नहीं था. इसलिए अभी के तथ्यों को देखते हुए मामला बंद करने का फैसला सही था.

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(Disclaimer: New Delhi Television is a subsidiary of AMG Media Networks Limited, an Adani Group Company.)




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