

दिल्ली में यमुना किनारे की बस्तियों पर एक बार फिर बुलडोजर चला और देखते ही देखते सैकड़ों परिवारों की दुनिया उजड़ गई. जिन घरों में लोग वर्षों से रह रहे थे, वे कुछ ही घंटों में मलबे में बदल गए. करीब 300 से ज्यादा परिवार बेघर हो गए और सबसे दर्दनाक मंजर तब दिखा, जब लोग दूर खड़े होकर अपने ही आशियाने टूटते हुए देखते रहे.
मुहर्रम के बाद फिर शुरू हुआ अभियान
दिल्ली के यमुना बाजार इलाके में मुहर्रम के बाद एक बार फिर ध्वस्तीकरण अभियान शुरू किया गया. शनिवार को प्रशासन ने भारी पुलिस बल के साथ ओ-जोन में बने अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की. पोकलेन मशीनों और बुलडोजरों की मदद से कई इमारतों को गिरा दिया.
आंखों के सामने उजड़ती रही जिंदगी
कार्रवाई के दौरान सबसे भावुक दृश्य तब सामने आया, जब विस्थापित परिवार घाट के दूसरी तरफ खड़े होकर अपने घरों को टूटते हुए देखते रहे. जिन घरों में उन्होंने सालों, बल्कि पीढ़ियों तक जिंदगी बिताई, वे कुछ ही समय में मलबे में बदल गए. कई लोगों की आंखें नम थीं और चेहरे पर बेबसी साफ नजर आ रही थी.
सुरक्षा के बीच शांतिपूर्ण कार्रवाई
मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से की गई. प्रशासन ने इलाके की घेराबंदी कर रखी थी और केवल अधिकृत लोगों को ही अंदर जाने की अनुमति दी. किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था.
अदालत और NGT के निर्देश पर एक्शन
यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशों के तहत की गई. डीडीए को यमुना के बाढ़ क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए गए थे. घाट नंबर 2 से 32 तक रहने वाले लोगों को पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका था, जिसके बाद बुलडोजर एक्शन शुरू हुआ.
300 से ज्यादा परिवार हुए प्रभावित
इस पूरे अभियान का सबसे ज्यादा असर उन परिवारों पर पड़ा, जो लंबे समय से यमुना घाट के किनारे रह रहे थे. अब तक करीब 300 से ज्यादा परिवारों के घर तोड़ दिए गए हैं. इन परिवारों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिनकी आजीविका घाटों से जुड़ी रही है. इनमें पंडा, नाविक, नाई और पूजा-पाठ से जुड़े लोग शामिल हैं.





