

नई दिल्ली:
भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस Mk1A की डिलीवरी में लगातार हो रही देरी पर रक्षा मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाया है. लड़ाकू विमान बनाने वाली सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को तय समय पर विमान सौंपने और बीते दो साल की देरी की भरपाई करने का निर्देश दिया गया है. यह कार्यक्रम करीब 46,000 करोड़ रुपये का है. उधर भारतीय वायुसेना के लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या भी लगातार चिंता बढ़ा रही है. वायुसेना के पास इस समय सिर्फ 30 स्क्वाड्रन हैं, जबकि मंजूर संख्या 42 स्क्वाड्रन की है.
इंजन में आई तकनीकी खराबी
तेजस Mk1A कार्यक्रम को हाल ही में एक और झटका लगा. HAL को मिला GE एयरोस्पेस का छठा F404-IN20 इंजन तकनीकी खराबी के साथ पहुंचा. HAL के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान खराबी का पता चल गया था. बाद में इसे ठीक भी कर लिया गया. अधिकारी के मुताबिक यह समस्या संभवतः ट्रांसशिपमेंट के दौरान आई थी और इसे सामान्य तकनीकी दिक्कत बताया गया. अप्रैल 2025 से अब तक HAL को ऐसे छह इंजन मिल चुके हैं. ये इंजन 2021 में हुए 5,375 करोड़ रुपये के समझौते के तहत दिए जा रहे हैं. इस अनुबंध में कुल 99 F404-IN20 इंजन की आपूर्ति होनी है.
रक्षा मंत्रालय ने दिखाई सख्ती
इस महीने हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में रक्षा मंत्रालय ने HAL को स्पष्ट संदेश दिया. मंत्रालय ने कहा कि कंपनी को अनुबंध में तय समयसीमा का पालन करना होगा. बैठक में देरी पर लगने वाले जुर्माने के प्रावधान की भी याद दिलाई गई. अब सितंबर 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक और समीक्षा बैठक होगी. इसमें वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह और हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रवि कोटा भी शामिल होंगे.
अभी बाकी हैं कई अहम काम
HAL अभी तेजस Mk1A में इजरायली AESA रडार लगाने, सिस्टम सर्टिफिकेशन और दूसरे तकनीकी परीक्षणों में जुटा है. इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही विमान भारतीय वायुसेना को सौंपे जा सकेंगे.
वायुसेना के लिए क्यों है चिंता?
भारतीय वायुसेना लंबे समय से लड़ाकू विमानों की कमी का सामना कर रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और पाकिस्तान, दोनों मोर्चों पर एक साथ युद्ध की स्थिति से निपटने के लिए 42 स्क्वाड्रन जरूरी हैं. लेकिन फिलहाल वायुसेना के पास सिर्फ 30 स्क्वाड्रन ही हैं. ऐसे में हर साल की देरी इस कमी को और बढ़ा रही है.वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह भी कई बार सार्वजनिक तौर पर तेजस Mk1A की धीमी डिलीवरी पर नाराजगी जता चुके हैं. पुराने मिग-21 और अन्य लड़ाकू विमानों के बेड़े से बाहर होने के बाद तेजस Mk1A को इस कमी को पूरा करने का सबसे अहम विकल्प माना जा रहा है.
कितना बड़ा है तेजस Mk1A कार्यक्रम?
तेजस Mk1A भारत का स्वदेशी 4.5 पीढ़ी का मल्टी-रोल लड़ाकू विमान है. इसे DRDO की एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) ने डिजाइन किया है, जबकि इसका निर्माण HAL कर रही है. तेजस का पहला संस्करण 2016 में भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ था. पहले चरण में ऑर्डर किए गए 40 विमानों में से अब तक 38 विमान वायुसेना को मिल चुके हैं. इसके बाद 2021 में वायुसेना ने 83 तेजस Mk1A विमानों का 46,000 करोड़ रुपये का ऑर्डर दिया था. इनकी डिलीवरी फरवरी 2024 से शुरू होनी थी, लेकिन इसमें लगातार देरी हो रही है. HAL का कहना है कि उत्पादन पूरी रफ्तार पकड़ने के बाद वह हर साल 12 विमान सौंपने का लक्ष्य हासिल करेगा.सितंबर 2025 में वायुसेना ने 97 और तेजस Mk1A विमानों का 62,370 करोड़ रुपये का नया ऑर्डर भी दिया. इस तरह दोनों सौदों को मिलाकर भारतीय वायुसेना को कुल 180 तेजस Mk1A लड़ाकू विमान मिलने हैं.
यह भी पढ़ें: पुतिन का Su-57 तो ट्रंप का F-35 का ऑफर… लेकिन भारत ने चुना अपना रास्ता
यह भी पढ़ें: 2 साल बाद भी डिलीवर नहीं हुए LCA तेजस Mk1A, रक्षा मंत्रालय लगाएगी HAL पर जुर्माना; जानें- कहां फंस गया पेच?





