
केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलकर ‘विकसित ग्राम जी’ करने और इसके नए प्रावधान लागू करने पर हिमाचल प्रदेश सरकार ने कड़ा ऐतराज जताया है. राज्य के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने केंद्र सरकार पर बिना किसी राज्य से राय लिए एकतरफा फैसला थोपने का गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि इस बदलाव से न सिर्फ राज्य पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा, बल्कि मजदूरों की दिहाड़ी भी कम हो जाएगी.
मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि पहले मनरेगा में 100 फीसदी खर्च केंद्र सरकार उठाती थी. लेकिन नए नियमों के तहत हिमाचल जैसे विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए फंडिंग पैटर्न 90:10 और अन्य राज्यों के लिए 60:40 कर दिया गया है.
- इस बदलाव से हिमाचल प्रदेश पर हर साल 164.63 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा.
- मौजूदा रोजगार पर भी 12.54 करोड़ रुपये सालाना का अतिरिक्त खर्च आएगा.
- नए बदलावों से हिमाचल की सालाना देनदारी 800 से 1000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है.
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इतिहास में पहली बार बढ़ी नहीं, बल्कि घटी मजदूरी
मजदूरी दरों में की गई कटौती पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अनिरुद्ध सिंह ने कहा, “देश के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है जब मजदूरी बढ़ाने की बजाय घटाई जा रही है.” उन्होंने बताया कि हिमाचल सरकार मनरेगा मजदूरों को 320 रुपये दिहाड़ी दे रही थी, लेकिन केंद्र ने गैर-जनजातीय क्षेत्रों की मजदूरी घटाकर 247 रुपये कर दी है. पहले राज्य सरकार अपनी तरफ से टॉप-अप दे सकती थी, लेकिन अब उसके लिए भी केंद्र सरकार की अनुमति अनिवार्य कर दी गई है.
पहाड़ी राज्यों में सॉफ्टवेयर आधारित सिस्टम अव्यावहारिक
पंचायती राज मंत्री ने कहा कि पहले यह एक मांग आधारित (Demand Based) योजना थी, जिसे अब ‘डिमांड ड्रिवन’ और ‘सॉफ्टवेयर आधारित सिस्टम’ में बदला जा रहा है. पहाड़ी राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियों में इस सिस्टम पर काम करना बेहद मुश्किल होगा.
अब पंचायत, बीडीसी और जिला परिषद से प्लान पास होने की पुरानी व्यवस्था खत्म कर ‘विकसित ग्राम पंचायत प्लान’ बनाना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसे ‘पीएम गति शक्ति’ (PM Gati Shakti) पोर्टल से जोड़ा जाएगा.
‘मजबूरी में अपनानी पड़ेगी योजना’
रोजगार सृजन के आंकड़ों पर बात करते हुए मंत्री ने कहा कि केंद्र की अलोकेशन (Allocation) महज 0.914% है, जिससे राज्य को केवल 220-230 लाख मानव दिवस (Mandays) ही मिलेंगे, जबकि हिमाचल ने 395 लाख मानव दिवस का काम किया है.
इसके अलावा, केंद्र पर हिमाचल के मनरेगा स्टाफ (GRS, कंप्यूटर ऑपरेटर, जूनियर अकाउंटेंट) का फरवरी से करीब 20 करोड़ रुपये का वेतन बकाया है. अनिरुद्ध सिंह ने यूपीए सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि मनरेगा गरीब का सबसे बड़ा सहारा है, जिसे सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के समय शुरू किया गया था. उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को मजबूरी में इस नए एक्ट को अडॉप्ट करना पड़ेगा, वरना केंद्र हिमाचल को इस स्कीम से ही बाहर कर देगा.