
मध्य प्रदेश के मंडला जिले में स्थित कान्हा टाइगर रिजर्व में केनाइन डिस्टेम्पर वायरस (CDV) का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. मंगलवार (23 जून) को मुक्की क्वॉरेंटाइन सेंटर में इलाज के दौरान एक और बाघ की मौत हो गई. इसके साथ ही पिछले दो महीनों में इस वायरस से मरने वाले बाघों की संख्या बढ़कर 7 हो गई है. लगातार हो रही मौतों ने वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है.
जानकारी के मुताबिक 4 जून 2026 को किसली परिक्षेत्र स्थित संदूक खोल क्षेत्र में एक बाघ गंभीर रूप से बीमार अवस्था में मिला था. हाथी गश्ती दल की सूचना के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और उसका रेस्क्यू कर मुक्की क्वॉरेंटाइन सेंटर में भर्ती कराया गया.
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शुरुआती जांच में बाघ में केनाइन डिस्टेम्पर वायरस के लक्षण पाए गए थे. इसके बाद विशेषज्ञों की निगरानी में उसका इलाज शुरू किया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी.
कई संस्थानों के विशेषज्ञ कर रहे थे इलाज
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार बाघ के उपचार में कान्हा टाइगर रिजर्व की टीम, नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा एवं विज्ञान विश्वविद्यालय और वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट (WCT) के विशेषज्ञ शामिल थे. लगातार मॉनिटरिंग और इलाज के बावजूद बाघ की हालत में सुधार नहीं हुआ और उसकी मौत हो गई.
कान्हा में CDV संक्रमण का पहला बड़ा मामला सरही परिक्षेत्र में सामने आया था. अमाही क्षेत्र की बाघिन टी-141 के 4 शावकों में से एक का शव 21 अप्रैल को मिला था. इसके बाद 24 और 25 अप्रैल को दो अन्य शावकों की भी मौत हो गई.
हालात गंभीर होने पर बाघिन और उसके एकमात्र जीवित शावक को रेस्क्यू कर मुक्की क्वॉरेंटाइन सेंटर में रखा गया था, लेकिन 29 अप्रैल को पहले बाघिन और फिर उसके शावक की भी मौत हो गई. इस तरह महज नौ दिनों में एक बाघिन और उसके चारों शावकों की जान चली गई थी.
कुत्तों से फैलने की आशंका
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह वायरस आमतौर पर कुत्तों में पाया जाता है. आशंका जताई जा रही है कि संक्रमित कुत्तों के शिकार करने या किसी एक जलस्रोत से पानी पीने के कारण यह वायरस बाघों तक पहुंचा हो सकता है. इसी वजह से रिजर्व क्षेत्र में कुत्तों की तलाश की जा रही है और अन्य बाघों की लगातार निगरानी की जा रही है.
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कुछ वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट्स का कहना है कि समय रहते संक्रमण को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए. उनका आरोप है कि वन विभाग की लापरवाही के कारण बाघों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है.
फिलहाल पूरे टाइगर रिजर्व में अलर्ट जारी है और बाकी वन्यजीवों को भी इस वायरस से बचाने के लिए विशेष निगरानी की जा रही है.