
मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की कवायद तेज हो गई. UCC का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की जज न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में बनी कमेटी भोपाल पहुंच चुकी है. सोमवार 22 जून 2026 से कमेटी ने अपना काम शुरू कर दिया है. कमेटी UCC को लेकर प्रदेश के महिला, एससी और एसटी समेत सभी आयोग के पदाधिकारियों के साथ बैठक करेगी. इसके अलावा के कई विभागों और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और धर्मगुरुओं के साथ भी चर्चा करेगी. इसके बाद यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा. आइए, अब विस्तार से जानते हैं कमेटी भोपाल में यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने क्या करेगी, न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कौन हैं, UCC की तैयारी पर भाजपा और कांग्रेस ने क्या कहा?
सबसे पहले जानिए कौन है न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई?
महाराष्ट्र की रहने वाली न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई का जन्म 30 अक्टूबर, 1949 को हुआ था. न्यायमूर्ति रंजना के पिता एसजी सामंत एक मशहूर आपराधिक वकील थे. साल 1970 में उन्होंने एल्फिंस्टन कॉलेज, मुंबई स्नातक किया. साल 1973 में उन्होंने जीएलसी (सरकारी विधि महाविद्यालय) से विधि स्नातक की उपाधि हासिल की.
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UCC का ड्राफ्ट बनाने एमपी में क्या होगा?
न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में जो कमेटी बनी है वह यूसीसी का ड्राफ्ट बनाने के लिए महिला आयोग, बाल आयोग, एससी आयोग, एसटी आयोग, सामान्य निर्धन आयोग, ओबीसी आयोग और अल्पसख्यक कल्याण आंनद आयोग के सदस्यों के साथ बैठक करेगी और यूसीसी को लेकर उनका पक्ष जानेगी. साथ ही, गृह विभाग, महिला एवं बाल विकास, अनसूचित जाति एवं जनजाति विभाग, ओबीसी व अल्पसंख्यक कल्याण विभाग यूसीसी को लेकर अपना प्रेजेंटेशन कमेटी को दिखाएंगे. कमेटी मध्य प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि से इसे लेकर चर्चा करेगी. सभी धर्म के धर्मगुरुओं के साथ भी रायशुमारी की जाएगी.
#WATCH | Bhopal | Madhya Pradesh Congress President Jitu Patwari says, “UCC is a propaganda of the government in the context of Madhya Pradesh… Passing UCC in the states is to divert people’s attention… This law is part of a plan to divert attention from inflation, employment… pic.twitter.com/crHRmkhumG
— ANI MP/CG/Rajasthan (@ANI_MP_CG_RJ) June 22, 2026
कांग्रेस और भाजपा यूसीसी को लेकर क्या बोली?
UCC गुजरात, उत्तराखंड और असम में लागू हो चुका है. इससे वहां क्या फायदा हुआ, पहले ये बताया जाए. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश इन राज्यों से अलग है, यहां एक करोड़ से ज्यादा आदिवासी परिवार हैं, जो मूल निवासी हैं, इनकी अपनी परपंरा है. क्या यह उनके साथ कुठाराघात नहीं है.
जीतू पटवारी,
मप्र कांग्रेस अध्यक्ष
कांग्रेस UCC को लेकर अगर कोई सुझाव देना चाहती है तो वह प्रशासनिक अकादमी जाकर अधिकारियों के सामने दे सकती है. वह प्रदेश में कितना सख्त कानून चाहते हैं, क्या प्रावधान चाहते हैं सब बता दें. यूसीसी से आदिवासियों को कोई दिक्कत नहीं होगी.
रामेश्वर शर्मा
भाजपा विधायक
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लेखक के बारे में
हरप्रीत कौर रीन
संवाददाता
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