
कड़े सुरक्षा इंतजामों और पुलिस व प्रशासनिक मुस्तैदी के बीच रविवार को मध्यप्रदेश के 30 जिलों के 283 केंद्रों पर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (स्नातक) (नीट-यूजी) 2026 की पुनर्परीक्षा शांतिपूर्वक व व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुई. हालांकि, इस दौरान कुछ केंद्रों पर छात्रों के देरी से पहुंचने पर अफरा-तफरी और भावुक माहौल भी देखा गया. परीक्षा के बाद कुछ छात्रों ने जीव विज्ञान का पेपर आसान जबकि कुछ ने भौतिक विज्ञान के पेपर को कठिन बताया.
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने अनियमितताओं के आरोपों के बीच तीन मई को आयोजित नीट-यूजी 2026 को रद्द कर दिया था. इसकी पुन: परीक्षा रविवार यानी 21 जून को निर्धारित की गई थी. राजधानी भोपाल के 32 सहित देश भर में 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में 5,440 केंद्र बनाए गए थे.
अभ्यर्थियों की मेटल डिटेक्टर से चेकिंग
मध्य प्रदेश में परीक्षा के मद्देनजर बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई, जिसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), जिला प्रशासन और एनटीए शामिल रहा. कुछ छात्रों ने बताया कि उनके रक्षा सूत्र काटने पड़ गए जबकि कुछ लड़कियों को कान की बाली तक उतारनी पड़ीं. प्रदेश के इन केंद्रों पर अभ्यर्थियों की ‘मेटल डिटेक्टर’ से चेकिंग की गई.
विभिन्न केंद्रों पर अलग-अलग कारणों से कुछ छात्र देरी पर पहुंचे लेकिन तमाम मिन्नतों के बावजूद उन्हें प्रवेश नहीं मिला, जिससे छात्र और उनके परिजन भावुक भी हो गए. ऐसा ही एक वाक्या भोपाल के सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय में हुआ जब एक छात्र दुर्घटना का शिकार हो गया और परीक्षा केंद्र देरी से पहुंचा लेकिन उसे प्रवेश नहीं दिया गया.
छात्र के मामा अतहर अमीर कादरी ने ‘पीटीआई वीडियो’ सेवा से बातचीत में कहा कि परीक्षा केंद्र पहुंचने के क्रम में उनकी गाड़ी दुर्घटना का शिकार हो गई और उनके भांजे को चोट लग गई. उन्होंने कहा, ‘पट्टी कराने में समय लग गया इस कारण हमें परीक्षा केंद्र पहुंचने में देरी हो गई. हमलोगों ने बहुत आग्रह किया लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं हुआ.’
परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे के बीच हुई. एनटीए के दिशा-निर्देशों के अनुसार, दोपहर डेढ़ बजे परीक्षा केंद्रों के दरवाजे पूरी तरह बंद कर दिए गए. भोपाल के 32 केंद्रों पर 13.7 हजार से अधिक छात्रों ने पुनः परीक्षा देने के आवेदन किए थे.
महज एक मिनट की देरी छात्रों को पड़ी भारी
इसी प्रकार भोपाल के सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय और केन्द्रीय विद्यालय सहित कुछ अन्य केंद्रों पर कुछ छात्र महज एक मिनट तक की देरी से पहुंचे, लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया. इन छात्रों और उनके परिजन मिन्नतें करते रहें लेकिन वे विफल रहे. इस दौरान कुछ परिजनों ने आरोप लगाया कि बाहर मार्गदर्शन की कमी के कारण रोल नंबर और कक्षा क्रमांक ढूंढ़ने में समय लग गया.
छतरपुर और सतना जिले में कुछ छात्र अन्य परीक्षा केंद्रों में पहुंच गए और परीक्षा देने से वंचित रह गए. सतना में एक ऐसी घटना सामने आई कि एक छात्र परीक्षा देने से वंचित हो गया. छात्र के परिजनों ने आरोप लगाया कि वे अपने बच्चे को लेकर सही परीक्षा केंद्र पर पहुंच गए थे लेकिन एक सुरक्षाकर्मी ने दूसरी जगह परीक्षा केंद्र होने की बात कर उन्हें लौटा दिया और जब वह उक्त परीक्षा केंद्र पहुंचे तो वहां भी उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया.
परिजनों ने बताया कि वे लौटकर जब पहले वाले परीक्षा केंद्र पहुंचे तो देर हो गई और इसका हवाला देते हुए उनके बच्चे को प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई. छात्र के परिजनों ने स्थानीय अधिकारियों से इसकी शिकायत की है.
इस बार का पेपर पहले के मुकाबले आसान
परीक्षा खत्म होने के बाद जबलपुर के एक परीक्षा केंद्र की छात्रा ने ‘पीटीआई वीडियो’ सेवा से बातचीत में कहा कि इस बार का पेपर पहले के मुकाबले आसान था. उसने उम्मीद जताई कि इस बार संभवतः उसका चयन हो जाए जबकि उसी केंद्र की एक अन्य छात्रा ने कहा कि इस बार का पेपर कठिन था खासकर भौतिक विज्ञान का.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस ने चलाया था अभियान
इससे पहले, सुबह राजधानी भोपाल में कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई ने हवन पूजन कर परीक्षा में शामिल लाखों छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य एवं निष्पक्ष परीक्षा की कामना की. उल्लेखनीय है कि नीट परीक्षा रद्द होने के बाद से देश के कई राज्यों से छात्रों के कथित रूप से आत्महत्या कर लेने की खबरें सामने आई थीं जिसके बाद कांग्रेस ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर देश भर में अभियान चलाया था.