
द्रौपदी स्वयंवर के बाद जब पांडव गुप्त रूप से कुम्हार के घर में रह रहे थे, तब श्रीकृष्ण और बलराम उनसे मिलने पहुंचे. वे जानते थे कि ये साधारण ब्राह्मण नहीं, बल्कि धर्म के रक्षक पांडव हैं. उनका यह आगमन केवल एक मुलाकात नहीं, बल्कि धर्म और सत्य के पक्ष में खड़े होने का संकेत था.

कुम्हार के घर में पांडव साधारण ब्राह्मणों का वेश धारण करके बैठे थे. वहां उपस्थित कोई भी उनकी वास्तविक पहचान नहीं जान पाया, लेकिन श्रीकृष्ण ने उन्हें तुरंत पहचान लिया. उन्होंने दिखा दिया कि सच्ची दृष्टि बाहरी रूप को नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र, तेज और गुणों को पहचानती है.
Published at : 19 Jun 2026 06:00 AM (IST)
