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45 साल पहले रिलीज होते ही बैन हो गई थी जितेंद्र की ये फिल्म, दोबारा आई तो तोड़ा ‘शोले’ का रिकॉर्ड | Jeetendra 45 yeal old movie meri aawaz suno banned after release when re released broke sholay box office records


हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ ऐसी भी फिल्में रही हैं, जिनकी कहानी से ज्यादा उनके आसपास का विवाद चर्चा में रहा. कई बार विरोध इतना बढ़ जाता है कि फिल्म की रिलीज तक खतरे में पड़ जाती है. लेकिन कुछ फिल्में ऐसी भी होती हैं, जो मुश्किलों से निकलकर और बड़ी हिट बन जाती हैं. 1981 में आई जितेंद्र की एक फिल्म के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था. आईएमडीबी के अनुसार, रिलीज के तुरंत बाद इस फिल्म पर रोक लग गई, निर्माता को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा और फिल्म में बदलाव भी करने पड़े. लेकिन जब यह दोबारा दर्शकों तक पहुंची तो ऐसा कमाल हुआ कि कई शहरों में इसकी कमाई ने ‘शोले’ के रिकॉर्ड तक को चुनौती दे डाली. यही फिल्म थी ‘मेरी आवाज सुनो’.

रिलीज होते ही क्यों मच गया था बवाल?

साल 1981 में रिलीज हुई ‘मेरी आवाज सुनो’ का निर्देशन एस. वी. राजेंद्र सिंह ने किया था. फिल्म में जितेंद्र, हेमा मालिनी और परवीन बॉबी मुख्य भूमिकाओं में थे. वहीं शक्ति कपूर, रंजीत और कादर खान खलनायक के किरदार में नजर आए थे. फिल्म की कहानी में मंत्री, पुलिस अफसर और बड़े अधिकारियों के भ्रष्टाचार को दिखाया गया था. बताया जाता है कि रिलीज के बाद इस पर आपत्ति जताई गई और फिल्म को रोक दिया गया. मामला कोर्ट तक पहुंचा, जहां कुछ बदलाव करने के बाद फिल्म को फिर से रिलीज करने की मंजूरी मिली.

‘हिंदुस्तान’ से बन गया ‘मुंडुस्तान’

Jeetendra

फिल्म में दिखाए गए काल्पनिक देश या जगह के नाम को लेकर भी बदलाव करना पड़ा. फिल्म में जहां ‘हिंदुस्तान’ शब्द इस्तेमाल किया गया था, उसे बदलकर ‘मुंडुस्तान’ कर दिया गया. इसके बाद फिल्म दोबारा दर्शकों के बीच पहुंच सकी. दिलचस्प बात यह रही कि विवाद ने फिल्म को नुकसान पहुंचाने के बजाय फायदा पहुंचाया. लोगों के मन में जिज्ञासा बढ़ गई कि आखिर इस फिल्म में ऐसा क्या है, जिस पर इतना हंगामा हो रहा है.

ऐसा क्लाइमैक्स, जिसने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया

‘मेरी आवाज सुनो’ की सबसे बड़ी ताकत उसका आखिरी हिस्सा माना जाता है. फिल्म के अंत में जितेंद्र का किरदार सभी अपराधियों को खत्म करने के बाद खुद जज के सामने पहुंचकर सरेंडर कर देता है. इसके बाद पर्दे के पीछे से एक सवाल सुनाई देता है कि देश के लिए सब कुछ गंवा देने वाले इस इंसान के साथ क्या इंसाफ होना चाहिए. खास बात यह थी कि फिल्म इसका जवाब खुद नहीं देती, बल्कि फैसला दर्शकों पर छोड़ देती है. यही वजह थी कि थिएटर से बाहर निकलने के बाद भी लोग फिल्म के बारे में चर्चा करते रहते थे.

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फिल्म में जितेंद्र ने दोहरी भूमिका निभाई थी. वहीं हेमा मालिनी और परवीन बॉबी ने भी अहम किरदार निभाए थे. करीब 3 करोड़ रुपये के बजट में बनी ‘मेरी आवाज सुनो’ ने बॉक्स ऑफिस पर लगभग 6.5 करोड़ रुपये की कमाई की थी.

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शिखा यादव

चीफ सब एडिटर

दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद जर्नलिज्म एंड मास कॉम में डिग्री ली. पिछले 10 साल से डिजिटल मीडिया में सक्रिय और इन 10 साल में बॉलीवुड, हॉलीवुड…
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