
स्वयंवर सभा में एक के बाद एक महान राजा और योद्धा लक्ष्यवेध का प्रयास करते हैं, लेकिन कोई भी घूमती हुई मछली की आंख को नहीं भेद पाता. भारी धनुष और कठिन लक्ष्य के सामने सभी पराक्रमी वीर असफल हो जाते हैं. सभा में निराशा और आश्चर्य का वातावरण छा जाता है.

जब सभी राजाओं के प्रयास विफल हो जाते हैं, तब ब्राह्मण वेश में बैठे अर्जुन शांत भाव से उठ खड़े होते हैं. उन्हें देखकर कई राजा और दर्शक आश्चर्यचकित हो जाते हैं. किसी को विश्वास नहीं होता कि एक साधारण ब्राह्मण इस कठिन परीक्षा को पूरा कर पाएगा.
Published at : 18 Jun 2026 06:00 AM (IST)