धर्म

Somvati Amavasya 2026: 300 साल बाद बने दुर्लभ महासंयोग पर उमड़ा आस्था का सैलाब, संतों ने बताया विशेष महत्व


Somvati Amavasya 2026: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि इस बार की सोमवती अमावस्या कई मायनों में बेहद खास है. उन्होंने कहा कि ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, लगभग 300 वर्षों बाद जेठ माह में अधिक मास और सोमवती अमावस्या का ऐसा दुर्लभ संयोग बना है. सनातन धर्म में इस महासंयोग को बहुत पुण्यदायी और लाभकारी माना जाता है. यही वजह है कि हरिद्वार, प्रयागराज, अयोध्या और अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों पर लाखों श्रद्धालु स्नान, दान और तर्पण के लिए पहुंच रहे हैं.

महंत रवींद्र पुरी के अनुसार, इस दिन गंगा स्नान, पितृ तर्पण और दान-पुण्य करने से विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है. उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म और परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना करने का आग्रह भी किया.

सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या क्यों मानी जाती है बेहद शुभ?

महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित मानी जाती है और जब यह सोमवार के दिन पड़ती है तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है. इस दिन पितरों के नाम से तर्पण, श्राद्ध और दान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है.

उन्होंने कहा कि जेठ माह की अमावस्या पर किया गया तर्पण विशेष फलदायी माना जाता है. श्रद्धालु अपने पितरों की मुक्ति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से गंगा तटों पर विधि-विधान से पूजा और तर्पण कर रहे हैं.

भगवान कृष्ण ने गीता में बताया पीपल का महत्व

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा का विशेष विधान है. उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है, “अश्वत्थः सर्ववृक्षाणाम्” अर्थात सभी वृक्षों में मैं पीपल हूं. सनातन परंपरा में पीपल को देववृक्ष माना गया है और इसकी पूजा को अत्यंत शुभ और पुण्यदायी बताया गया है. 

महंत रवींद्र पुरी के अनुसार, पीपल केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बहुत जरूरी वृक्ष है. हमारे ऋषि-मुनियों ने प्रकृति संरक्षण और आध्यात्मिक चेतना को जोड़ते हुए इसकी पूजा की परंपरा स्थापित की थी. उन्होंने बताया कि सोमवती अमावस्या पर पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करना, उसका अभिषेक करना, दीपदान करना और उसकी परिक्रमा करना विशेष रूप से कल्याणकारी माना जाता है. 

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ऐसा करने से पितृ दोष में कमी आती है, जीवन की बाधाएं दूर होती हैं तथा घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने की कामना से पीपल की पूजा-अर्चना करते हैं. हरिद्वार के विभिन्न मंदिरों और गंगा घाटों पर भी सोमवती अमावस्या के अवसर पर पीपल पूजन और दीपदान का विशेष उत्साह देखने को मिला.

घर बैठे भी कमा सकते हैं सोमवती अमावस्या का पुण्य

महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि यदि कोई श्रद्धालु किसी कारणवश हरिद्वार या अन्य तीर्थ स्थलों तक नहीं पहुंच सकता है, तो वह घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकता है. इसके बाद पितरों का स्मरण कर तर्पण, दान और प्रार्थना करनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया पूजन भी उतना ही फलदायी माना जाता है जितना तीर्थ स्थलों पर किया गया अनुष्ठान. इसलिए श्रद्धालुओं को इस दिन धर्म, सेवा और सद्कर्म के कार्यों में भाग लेना चाहिए.

सोमवती अमावस्या स्नान को लेकर हाई अलर्ट पर रहा प्रशासन

हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि, सोमवती अमावस्या स्नान पर्व को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं. घाटों पर सुरक्षा, सफाई, पेयजल, चिकित्सा और यातायात की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है. उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु लगातार गंगा घाटों पर पहुंच रहे हैं और प्रशासन हर स्थिति पर नजर बनाए हुए है.

वहीं एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि, श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पूरे मेला क्षेत्र को 6 सुपर जोन, 16 जोन और 40 सेक्टरों में विभाजित किया गया है. पुलिस बल के साथ एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड की टीमों को भी तैनात किया गया है ताकि स्नान पर्व शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराया जा सके.

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