

अहमदाबाद स्थित अदाणी यूनिवर्सिटी का दीक्षांत समारोह चल रहा है. यह कार्यक्रम शांतिग्राम कैंपस में आयोजित किया जा रहा है. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता अदाणी यूनिवर्सिटी की अध्यक्ष डॉ. प्रीति जी. अदाणी कर रही हैं, जबकि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) के निदेशक प्रो. गोविंदन रंगराजन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए हैं.
अहमदाबाद स्थित अडाणी यूनिवर्सिटी के तीसरे दीक्षांत समारोह में प्रो. गोविंदन रंगराजन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में अभूतपूर्व अवसर लेकर आया है, लेकिन इसके बढ़ते प्रभाव के साथ सच्चाई, भरोसे और मानवीय रिश्तों को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं.
‘क्लास ऑफ 2026’ के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए IISc के डायरेक्टर प्रो. गोविंदन रंगराजन ने कहा कि AI जटिल समस्याओं को हल करने और वैज्ञानिक खोजों को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. हालांकि उन्होंने आगाह किया कि तकनीक के प्रभावों को लेकर भी सतर्क रहने की जरूरत है.
उन्होंने कहा, “जब तस्वीरें, वीडियो और सूचनाएं इतनी वास्तविक प्रतीत होने लगें, तब यह पहचानना चुनौती बन जाता है कि सच क्या है. तकनीक हमें डिजिटल रूप से करीब ला रही है, लेकिन हमें यह भी सोचना होगा कि कहीं हम मानवीय स्तर पर एक-दूसरे से दूर तो नहीं होते जा रहे हैं.”
समारोह के दौरान अडानी यूनिवर्सिटी ने ‘क्लास ऑफ 2026’ के कुल 374 छात्रों को डिग्रियां प्रदान कीं. वहीं शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 10 विद्यार्थियों को पदक दिए गए, जिनमें पांच स्वर्ण, तीन रजत और दो कांस्य पदक शामिल हैं.
समारोह की अध्यक्षता डॉ. प्रीति जी. अडाणी ने की. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अनुसंधान-केंद्रित उच्च शिक्षा संस्थान के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है. उन्होंने उद्योग और शिक्षा जगत के सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि वास्तविक चुनौतियां दोनों क्षेत्रों को नए विचार और समाधान विकसित करने का अवसर देती हैं.
प्रो. रंगराजन ने अपने संबोधन में कहा कि भारत ने बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का निर्माण किया है और अब समय बड़े स्तर पर नवाचार और नए विचारों को विकसित करने का है. उन्होंने छात्रों से ऐसी शोध और खोजों पर काम करने का आह्वान किया जिनका लाभ समाज के वंचित वर्गों तक पहुंच सके.
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