
नई दिल्ली:
फिल्मों की दुनिया से आगे बढ़कर जीवन की सच्चाइयों, रिश्तों, संघर्षों और आत्ममंथन की यात्रा पर आधारित एक विशेष संवाद “In Search of Truth” में वरिष्ठ फिल्मकार, लेखक और प्रेरक वक्ता महेश भट्ट और पटकथा लेखक एवं निर्देशक सुहृता दास के बीच एक बेहद आत्मीय और प्रेरक बातचीत हुई. मुंबई के वर्सोवा स्थित RDX Studio में आयोजित यह कार्यक्रम केवल सिनेमा पर चर्चा से जुड़ा हुआ नहीं था, बल्कि जीवन को समझने और उसे महसूस करने का एक बेहतरीन अनुभव भी साबित हुआ.
कार्यक्रम की अवधारणा ही इस विचार पर आधारित थी कि हम फिल्मी दुनिया से निकलकर जीवन की उस सच्चाई तक पहुंचे, जिससे हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में जुड़ा होता है. प्रेम से लेकर विरह तक, असफलता से लेकर पुनर्निर्माण तक और मानसिक संघर्ष से लेकर रिश्ते और जीवन का अर्थ, इन सभी विषयों पर महेश भट्ट ने पूरी ईमानदारी और प्रभावशाली तरीके से अपने विचार साझा किए.
कार्यक्रम की शुरुआत कविता और कुछ पुरानी यादों के साथ हुई. इसके बाद सुहृता दास ने महेश भट्ट के जीवन, उनके द्वारा लिखी गई आत्मकथा के अंशों और उनके अनुभवों को साझा करते हुए बातचीत को आगे बढ़ाया. जिससे दर्शकों को महेश भट्ट के सार्वजनिक व्यक्तित्व के बारे में और अधिक जाने को मिला.

Photo Credit: mahesh bhatt
इसी बातचीत के दौरान महेश भट्ट ने अपने बचपन की भी कई यादें ताजा कीं. उन्होंने दर्शकों को बताया कि कैसे वे मात्र चार साल की उम्र में पहली बार सिनेमा के जादू से प्रभावित हुए थे और कैसे चलती हुई तस्वीरों ने उनके भीतर कहानी लिखने और कहने की इस चिंगारी को जगाया.
उन्होंने ये भी कहा कि जीवन में अक्सर हम कई बार अपने ही भ्रम में जीते हैं और सच्चाई को स्वीकार करना हमारे लिए हमेशा आसान नहीं होता.
अपने संघर्षों को याद करते हुए उन्होंने फिल्म जगत में अपने शुरुआती दिनों की चर्चा की और वह सीख साझा की जो उन्हें प्रसिद्ध निर्देशक राज खोसला से मिली थी कि “Zero is a great figure to begin with.” मतलब “शून्य से शुरुआत करना डर की नहीं, बल्कि गर्व करने की बात है, क्योंकि हर बड़ी यात्रा वहीं से शुरू होती है.”
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कार्यक्रम का सबसे अनोखा पल वह रहा जब महेश भट्ट ने अपनी मां से जुड़ी कुछ यादों को साझा किया. बचपन की एक घटना के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने अपनी बीमार मां के बालों में जुगनू सजाकर उन्हें स्माइल करवाने की कोशिश की थी. उनके इस प्रसंग ने सभी लोगों को भावुक कर दिया और यह याद दिलाया कि महान कहानियां अक्सर जीवन के सबसे साधारण और वास्तविक घटनाओं से जन्म लेती हैं.

रचनात्मकता पर बात करते हुए महेश भट्ट ने बताया कि महान कला अक्सर टूटे हुए दिल और भावनात्मक अनुभवों से जन्म लेती है. उनके अनुसार कलाकार की सबसे बड़ी पूंजी उसका अनुभव और उसके लोगों से मिला हुआ प्यार होता है जो लाखों रुपयों से कहीं बढ़कर होता है. उन्होंने खुद बताया किया कि उनकी ज्यादातर रचनाएं संघर्ष, असफलताओं और आत्ममंथन से निकली हैं.
सफलता और जीवन के अर्थ पर जब बात हुई तो भट्ट साहब ने कहा कि हम अक्सर अपनी जिंदगी को भविष्य के किसी मुकाम के लिए टालते रहते हैं. हमें लगता है कि अगली सफलता, अगली उपलब्धि या अगला अवसर हमें संतुष्टि देगा, लेकिन सच तो यह है कि जीवन इसी क्षण में, इसी पल में मौजूद है.
इसके बाद आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में छात्रों, थिएटर कलाकारों, लेखकों, उद्यमियों और विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों ने खुलकर सवाल पूछे और महेश भट्ट ने भी फिल्म निर्माण, रचनात्मकता, असफलता, मानसिक स्वास्थ्य, रिश्तों, बच्चों की परवरिश और जीवन के अनुभवों पर विस्तार से अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि बच्चे माता-पिता की बातों से कम और उनके व्यवहार से अधिक सीखते हैं. साथ ही उन्होंने माता-पिता से भी आग्रह किया कि वे बच्चों को केवल निर्देश न दें, बल्कि उन्हें समझें और उनकी बात सुनें.

युवा रचनाकारों और कलाकारों के लिए उनका संदेश स्पष्ट था की “असफलता से मत डरिए क्योंकि कई बार जीवन की सबसे बड़ी सीख और सबसे सशक्त रचनात्मक ऊर्जा उन्हीं अनुभवों से निकलती है जिन्हें हम अपनी हार समझते हैं.”
पूरे कार्यक्रम में महेश भट्ट के व्यक्तित्व का एक ऐसा पक्ष सामने आया जो केवल एक सफल फिल्मकार का नहीं, बल्कि एक संवेदनशील इंसान, विचारक और जीवन के विद्यार्थी का था. सुहृता दास की गहन तैयारी, आत्मीय प्रश्नों और संवाद शैली ने इस बातचीत को और भी सार्थक बना दिया.
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित दर्शकों ने इसे केवल एक बातचीत नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और प्रेरणा से भरी एक जीवन यात्रा बताया. “In Search of Truth” अपने शीर्षक के अनुरूप सत्य की खोज से आगे बढ़कर जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर बन गया.
महेश भट्ट के बारे में
महेश भट्ट भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली फिल्मकारों, लेखकों और निर्माताओं में से एक हैं. उनकी फिल्मों और विचारों ने कई पीढ़ियों को प्रभावित किया है. उनकी पहचान एक ऐसे कहानीकार के रूप में है जो जीवन के कठिन और जटिल पहलुओं को भी पूरी ईमानदारी से सामने रखते हैं.
सुहृता दास के बारे में
सुहृता दास लेखिका, पटकथा लेखक एवं निर्देशक हैं. कहानी कहने और संवाद की उनकी विशिष्ट शैली ने इस पूरे कार्यक्रम को गहराई, आत्मीयता और भावनात्मक स्पर्श प्रदान किया.





