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नीरज से जंग में खोया धीरज, क्या अनंत की बेबाकी खत्म कर देगी सियासी करियर? | Anant Singh Neeraj kumar Enmity Story From 2015 To 2026 What They Will Do Next



अनंत सिंह डॉन से कब वायरल किंग बन गए पता ही नहीं चला. कभी जिनके सामने खड़े होने में बड़े-बड़े अधिकारियों को पसीना आ जाता था, आज उन्हीं अनंत सिंह के घर पर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की भीड़ लगी रहती है. उनका बेबाक अंदाज खूब वायरल होता है. मगर यही बेबाकी अब उनके सियासी करियर पर संकट बनती दिख रही है. जनता दल यूनाइटेड ने उन्हें और उनकी पत्नी नीलम देवी को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है और उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म करने की अनुशंसा भी कर दी है.

आखिर ऐसा क्यों हुआ

अनंत सिंह पर इस कार्रवाही की वजह बने हैं नीरज कुमार. सबसे पहले जानिए नीरज कुमार है कौन? तो आपको बता दें कि नीरज भी मोकामा के ही रहने वाले हैं. 2009 से जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं.   2008 में पहली बार पटना स्नातक क्षेत्र में जदयू प्रत्याशी के तौर एमएलसी बने. अनंत सिंह दावा करते हैं कि नीरज कुमार उनके ही कारण एमएलसी बने थे. दोनों के रिश्ते काफी अच्छे थे, मगर 2015 में रिश्ते में कड़वाहट आ गई. बाढ़ के पुटूस हत्याकांड में अनंत सिंह की गिरफ्तारी हो गई. फिर जदयू ने मोकामा विधानसभा सीट पर नीरज कुमार को उतार दिया. तब अनंत सिंह जेल से ही चुनाव लड़े और नीरज कुमार को हरा दिया. यहां से दोनों के बीच दुश्मनी की शुरूआत हुई.

फिर दुश्मनी में आई धार

16 अगस्त 2019 को बिहार पुलिस ने लदमा वाले अनंत सिंह के घर पर छामा मारा और से एक एके 47, दो हैंड ग्रैनेड और कारतूस बरामद किए. इस मामले में पटना की विशेष अदालत ने जून 2022 में अनंत सिंह को 10 साल की सजा सुनाई. तब अनंत सिंह ने नीरज कुमार पर साजिश रचकर फंसाने का आरोप लगाया था. 14 अगस्त 2024 को पटना हाईकोर्ट ने सबूतों की कमी के कारण अनंत सिंह को इस मामले में बरी कर दिया. मगर दुश्मनी अब काफी धारदार हो चुकी थी. 2020 में अनंत सिंह राजद में शामिल हो गए और उसी के टिकट पर विधायक बने.

तब लगा अब सब ठीक

 तब लगा कि अब सबकुछ ठीक हो जाएगा. चुनाव में अनंत सिंह तो जीत गए, लेकिन आरोप लगे कि नीरज कुमार ने अनंत सिंह को हराने के लिए पूरी ताकत लगाई. अनंत सिंह ने इस बात की शिकायत पार्टी में भी की, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई. इसके बाद अनंत सिंह ने चुनाव का बदला चुनाव के दौरान लेने का मन बनाया.

तो फिर इतनी बात क्यों बढ़ी

जदयू ने एक बार फिर पटना सीट से नीरज कुमार को प्रत्याशी बनाया, लेकिन अनंत सिंह ने साफ कर दिया कि वो नीरज कुमार का सहयोग नहीं करेंगे. उन्होंने प्रशांत किशोर की पार्टी के प्रत्याशी को समर्थन देने की घोषणा कर दी. पार्टी में हड़कंप मच गया. नीरज कुमार जमकर अनंत सिंह पर बरसे तो अनंत सिंह भी खूब गरजे. इसके बाद ललन सिंह दोनों को समझाने पहुंचे. अनंत सिंह का पक्ष भी लिया और मीडिया में बयान नहीं देने का वादा भी लिया. मगर अनंत सिंह तो अनंत सिंह ठहरे. बयान देते रहे और प्रशांत किशोर की पार्टी के प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार भी करते रहे.

आज क्यों हुई कार्रवाई

शनिवार को अनंत सिंह ने दावा किया कि उनके समर्थन से प्रशांत किशोर की पार्टी का प्रत्याशी चुनाव जीत रहा है. इसलिए उन्होंने अपने सभी समर्थकों को भोज का प्रबंध शुरू कर दिया है. हालांकि, अभी तक चुनाव आयोग की तरफ से कोई घोषणा नहीं की गई है. जब एक पत्रकार ने पूछा कितनी मिठाई बन रही है तो उन्होंने कहा कि तुम पैसा देगा क्या? इसके बाद ललन सिंह के यहां भोज की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं. आज ललन सिंह पटना पहुंचे तो नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे. वहां 20 मिनट की बात के बाद अनंत सिंह पर कार्रवाई का फैसला हुआ.

अनंत और नीरज की इस लड़ाई में घाटा दोनों का साफ तौर पर दिख रहा है. नीरज कुमार को एमएलसी चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ सकता है तो अनंत सिंह की विधानसभा निष्कासित करने की प्रक्रिया की ओर जदयू बढ़ती है तो छह महीने के अंदर चुनाव होगा. हालांकि, अनंत सिंह के चुनावी इतिहास को देखें तो ये तय है कि वो उपचुनाव निर्दलीय भी जीत जाएंगे पर अभी तक सत्ता पक्ष में रहकर उन्हें जो मौके मिल रहे थे, वो शायद ना मिल पाएं और उनके विरोधी और ज्यादा सक्रिय हो जाएं. हर हाल में अब अनंत सिंह और नीरज कुमार की दुश्मनी और गाढ़ी हो गई है.  

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