

कार्तिक स्नान कब है?
file photo
हिंदू धर्म में कार्तिक महीने विशेष महत्व है. इस महीने में लक्ष्मीनारायण की पूजा करना बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है. कार्तिक महीने की शुरुआत आश्विन शुक्ल पूर्णिमा तिथि के अगले दिन यानी कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा तिथि से होती है, क्योंकि कार्तिक मास में ही श्रीहरि लंबी निद्रा के बाद जागते हैं. मान्यता है कि इस महीने में स्नान-दान और पूजन करना बहुत अच्छा और लाभदायक माना जाता है. इस दौरान श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर पूजा-पाठ करते हैं और आंवले के वृक्ष में जल अर्पित कर परिक्रमा करते हैं. चलिए आपको बताते हैं कार्तिक महीने के शुरुआत कब से हो रही है. ब्रह्म मुहूर्त और आंवला पूजा के नियम क्या हैं?
कार्तिक महीना कब से शुरू
पंचांग के अनुसार, 26 अक्टूबर, सोमवार को सुबह 9 बजकर 42 मिनट तक आश्विन शुक्ल पूर्णिमा तिथि रहेगी और इसके बाद कार्तिक मास का आरंभ हो जाएगा, लेकिन उदया तिथि की गणना के अनुसार 27 अक्टूबर को कार्तिक मास का व्रत और मेला आरंभ हो जाएगा. इसके अलावा कार्तिक पूर्णिमा के दिन यानी 24 नवंबर, मंगलवार के दिन कार्तिक महीने का समापन होगा.
- कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा तिथि आरंभ- 26 अक्टूबर, सोमवार को सुबह 9 बजकर 42 मिनट पर
- कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा तिथि समाप्त- 27 अक्टूबर, मंगलवार को सुबह 7 बजकर 2 मिनट पर
- कार्तिक मास आरंभ- 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 42 मिनट के बाद
- कार्तिक मास व्रत और मेला शुरू- 27 अक्टूबर, मंगलवार (उदया तिथि की गणना के अनुसार)
- कार्तिक मास का समापन- 24 नवंबर, मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा के दिन
आंवला पूजा की मान्यता क्या है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास माना जाता है. इसलिए कार्तिक मास में आंवले के वृक्ष की पूजा और उसमें जल अर्पित करना शुभ माना जाता है. कार्तिक के महीने में श्रद्धालु स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर वृक्ष की पूजा करते हैं और उसकी परिक्रमा करते हैं. इस दौरान परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है.
यह भी पढ़ें:- सबसे भाग्यशाली हस्त रेखा कौन सी है? जानें हाथ में कौन सी रेखा अच्छी होती है
यह भी पढ़ें:- हथेली में V का निशान होने का क्या मतलब है? हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार जानिए इसका महत्व
यह भी पढ़ें:- ‘अपने विचारों पर ध्यान दें, वे शब्दों में बदल जाते हैं’ गौर गोपाल दास के अनमोल विचार
पूरी स्टोरी पढ़ें




