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डेंगू की अब तक नहीं है दवा, क्या शरीर का RNA बनेगा हथियार? AIIMS की नई रिसर्च | AIIMS New Delhi Dengue Breakthrough: How RNA Molecules (tRFs) Can Stop Dengue Virus Replication



डेंगू होने पर मरीज और परिवार के मन में सबसे पहले यही सवाल आते हैं कि बुखार कैसे कंट्रोल होगा, प्लेटलेट्स गिरें तो क्या करें और क्या डेंगू वायरस को खत्म करने की कोई सीधी दवा है. फिलहाल डेंगू के इलाज में सबसे अहम है मरीज की स्थिति पर नजर रखना और जरूरत के मुताबिक सपोर्ट‍िव ट्रि‍टमेंट देना.

बरसात का मौसम आते ही अस्पतालों के वार्ड डेंगू के मरीजों से भरने लगते हैं. किसी की प्लेटलेट्स तेजी से गिर रही होती हैं तो किसी का बीपी खतरनाक स्तर तक नीचे चला जाता है. अक्सर तीमारदार डॉक्टरों से एक ही सवाल पूछते हैं कि क्या डेंगू को खत्म करने की कोई सीधी दवा नहीं है? डॉक्टर बस यही समझाते हैं कि डेंगू की कोई सीधी एंटीवायरल दवा नहीं है, मरीज को सिर्फ ग्लूकोज, पैरासिटामोल और ड्रिप्स के सहारे संभालना पड़ता है.

लेकिन अब इस बेबसी से राहत मिलने की उम्मीद जगी है. एम्स नई दिल्ली के शोधकर्ताओं ने डेंगू वायरस के बढ़ने की प्रक्रिया को लेकर एक अहम जानकारी सामने रखी है. रिसर्च में सामने आया है कि हमारी कोशिकाओं में मौजूद कुछ खास तरह के आरएनए (RNA) अणु इस वायरस को बढ़ने से रोक सकते हैं.

यह स्टडी 14 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘एनएआर मॉलिक्यूलर मेडिसिन’ में पब्लिश हुई है.

अब तक डेंगू की कोई सीधी दवा क्यों नहीं बन पाई?

एम्स के बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. भूपेंद्र वर्मा के नेतृत्व में यह रिसर्च पूरी हुई है. इस टीम में पीएचडी रिसर्च स्कॉलर्स दीक्षा मंधारी, रिया रॉय और अक्षिता आनंद शामिल थीं.

अस्पतालों की इमरजेंसी में कई बार मरीज डेंगू हेमोरेजिक फीवर या डेंगू शॉक सिंड्रोम जैसी बेहद गंभीर हालत में पहुंचते हैं, जहां शरीर की नसों से खून का रिसाव होने लगता है और जान बचाना मुश्किल हो जाता है. डॉ. वर्मा बताते हैं कि डेंगू वायरस शरीर के भीतर जाकर हमारी अपनी ही कोशिकाओं की मशीनरी पर कब्जा कर लेता है और बहुत तेजी से अपनी लाखों कॉपियां तैयार करने लगता है. जब तक कोई ऐसी दवा न हो जो सीधे इस वायरस की नकल बनाने की क्षमता को जाम कर दे, तब तक बीमारी पर काबू पाना मुश्किल रहता है.

शरीर का अपना सिस्टम कैसे बन सकता है डेंगू का इलाज?

रिसर्च टीम ने ट्रांसफर आरएनए (tRNA) के टूटने से बनने वाले बहुत छोटे अणुओं पर फोकस किया, जिन्हें मेडिकल साइंस में ‘टीआरएफ’ (tRFs) कहा जाता है.

प्रयोगशाला में जब संक्रमित कोशिकाओं की गहन आरएनए सीक्वेंसिंग की गई, तो एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई:

  1. जब डेंगू वायरस इंसान की कोशिकाओं पर हमला करता है, तो कोशिकाओं के भीतर टीआरएनए के टूटने की रफ्तार और तरीका पूरी तरह बदल जाता है.
  2. वैज्ञानिकों ने पाया कि कुछ टीआरएफ ऐसे हैं जो वायरस के मददगार बन जाते हैं और उसकी तादाद बढ़ाने का रास्ता खोलते हैं.
  3. शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ tRFs वायरस की replication को बढ़ावा दे सकते हैं, जबकि कुछ इसकी वृद्धि को सीमित करने से जुड़े पाए गए.
  4. टीम ने कोशिकाओं के उस अंदरूनी सिग्नलिंग सिस्टम की भी पहचान की, जिसे सक्रिय करके वायरस खुद को मजबूत करता है. दो खास आरएनए मॉलिक्यूल इस रास्ते को एक्टिव करते पाए गए.

सीधे शब्दों में कहें तो शरीर की कोशिकाओं के पास वायरस को बढ़ाने और उसे रोकने, दोनों तरह के स्विच मौजूद हैं.

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आम मरीज को इस रिसर्च से क्या फायदा होगा?

जब भी किसी वायरस से लड़ने के लिए दवा बनाई जाती है, तो वैज्ञानिकों को सबसे पहले उस कमजोर कड़ी की तलाश होती है जहां हमला किया जा सके.

अब तक डेंगू के मामले में डॉक्टर केवल लक्षणों का इलाज करते रहे हैं. बुखार घटाने के लिए दवा दी, प्लेटलेट्स बहुत कम हुए तो प्लेटलेट्स चढ़ा दिए, या पानी की कमी पूरी करने के लिए सलाइन ड्रिप लगा दी.

एम्स की इस खोज के बाद अब ऐसी टारगेटेड एंटीवायरल दवाइयां तैयार करने का रास्ता खुल गया है जो उन मददगार आरएनए को ब्लॉक कर देंगी और वायरस को दबाने वाले अणुओं को सक्रिय कर देंगी. अगर वायरस अपनी संख्या ही नहीं बढ़ा पाएगा, तो मरीज के गंभीर स्थिति में पहुंचने या आईसीयू जाने की नौबत ही नहीं आएगी.

इस खोज से भविष्य में टारगेट‍िड एंटीवायल ट्र‍िटमेंट पर आगे की रिसर्च के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं. हालांकि यह अभी शुरुआती वैज्ञानिक खोज है. इन RNA अणुओं को निशाना बनाकर मरीजों के लिए सुरक्षित और प्रभावी इलाज विकसित किया जा सकता है या नहीं, यह आगे की रिसर्च से ही साफ होगा.





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