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20 साल पुराना लता मंगेशकर का आखिरी फिल्मी गाना, प्रसून जोशी के शब्दों में छलका मां-बेटे का ऐसा दर्द, थिएटर में रोने लगे दर्शक | Lata Mangeshkar Ka Akhiri Filmy Gana 20 year old Lata Mangeshkar last film song Luka Chuppi Rang De Basanti Aamir Khan A.R. Rahman



नई दिल्ली:

हिंदी सिनेमा में कई ऐसे गाने बने हैं जिनको सुनकर आप खुद को उससे कनेक्ट कर पाते हैं. जिनको सुनकर ऐसा लगता है कि कोई हमारी ही कहानी को सुना रहा है. आज हम एक ऐसे ही गाने की बात करेंगे, जिसमें मां और बच्चे के बीच की दूरी और बेचैनी साफ झलकती है. एक मां की आवाज जो अपने बच्चे को पुकार रही है, जब उसे पता है कि वो कभी वापस नहीं आ सकता है. इन फीलिंग्स को शब्दों में बयां कर पाना बेहद मुश्किल है. 

लेकिन बॉलीवुड में बने एक गाने ने इस मुश्किल काम को भी इतनी खूबसूरती से बयां किया है कि इसको सुनते ही आंखों में आंसू आ जाते हैं. इस गाने की खास बात ये है कि इस गाने में सिर्फ सुर और शब्द नहीं, बल्कि एक ऐसी मां का दर्द है, जो अपने बेटे को वापस बुलाना चाहती है. आइए जानते हैं लता मंगेशकर और एआर रहमान की आवाज में सजा वो गाना, जो आज भी हर मां के दर्द को बयां करता है, जिसका बच्चा उसे छोड़कर चला गया है. 

कौन सा है गाना 

साल 2006 में आई फिल्म रंग दे बसंती फिल्म जिसका निर्देशन राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने किया था. फिल्म का गाना लुका-छिपी बहुत हुई गाने को सुनते ही आंखें नम हो जाती हैं. लता मंगेशकर और एआर रहमान की आवाज ने उस मां के दर्द को बखूबी बयां किया है. गाने का संगीत एआर रहमान ने तैयार किया और इसके बोल प्रसून जोशी ने लिखे थे. 

इस गाने में मां अपने बेटे को पुकारते हुए कहती है कि अब लुका-छिपी बहुत हो गई, सामने आ जाओ. शाम हो गई है और उसे अपने बच्चे की चिंता सता रही है. मां की अपने बेटे के लिए ये पुकार किसी एक परिवार की कहानी नहीं लगती, बल्कि हर उस मां की कहानी लगती है, जो अपने बच्चे के दूर होने का दर्द जानती है. गाने के बोल इस तरह हैं- 

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लुका छुपी बहुत हुई सामने आ जा ना
कहाँ-कहाँ ढूँढा तुझे
थके है अब तेरी माँ
आजा सांझ हुई मुझे तेरी फिकर
धुंधला गयी देख मेरी नज़र आ जा ना
लुका छुपी…

क्या बताऊँ माँ कहाँ हूँ मैं
यहाँ उड़ने को मेरे खुला आसमाँ है
तेरे किस्सों जैसा भोला सलोना जहां है
यहाँ सपनों वाला
मेरी पतंग हो बेफिक्र उड़ रही है माँ
डोर कोई लुटे नहीं, बीच से काटे ना
आजा सांझ हुई…

क्या है कहानी 

फिल्म रंग दे बसंती साल 2006 में रिलीज हुई थी. इस फिल्म में आमिर खान, सोहा अली खान,शर्मन जोशी, महादेवन और कुणाल कपूर ने अभिनय किया था. फिल्म में आर माधवन ने एयरफोर्स पायलट का किरदार प्ले किया था, जिसका नाम अजय राठौड़ था. वही वहीदा रहमान उनकी मां के किरदार में नजर आई थीं. एक प्लेन हागसे में अजय की मौत हो जाती है और उसकी मां को इस खबर से गहरा सदमा लगता है. उसी वक्त इस गीत को फिल्माया जाता है. गाने के बोल इस तरह हैं कि इसमें मां अपने बेटे को घर लौट आने के लिए कहती है. वहीं एआर रहमान की आवाज में उनका बेटा बताता है कि वो जिस दुनिया में है जहां खुला आसमान है और सपनों को उड़ने की आजादी है. वो मां को समझाने की कोशिश करता है कि वो ठीक है. इस गाने के बोल, सिचुएशन, संगीत और लता-रहमान की आवाज ने इसे दिल को छू लेने वाला बनाया. 

लता मंगेशकर का आखिरी फिल्मी गीत 

इस गाने को सुनते ही आज भी आंखे नम हो जाती हैं. इस गाने को गाने वाले एआर रहमान ने बताया था कि वो अजय की मौत वाले सीन को दुखभरे गीत की बजाय लोरी के अंदाज में पेश करना चाहते थे, जो उन्होंने बखूबी किया. यही वजह है कि फिल्म रिलीज होने के 20 साल बाध बी ‘लुका छुपी’ गाना लोगों के दिलों में बसा हुआ है. सोनी म्यूजिक इंडिया के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर इसके लिरिकल वीडियो को 10 मिलियन से ज्यादा बार देखा जा चुका है. 

ये गाना लता मंगेशकर के करियर के सबसे यादगार गीतों में से एक रहा है. इसके साथ ही ये उनका आखिरी फिल्मी गीत था, जिसको फिल्म में इस्तेमाल किया गया. इसके बाद उन्होंने कुछ गाने गाए, लेकिन वो किसी फिल्म का हिस्सा नहीं बने. ये गाना मां-बेटे का रिश्ता दूरी और जुदाई से भी खत्म नहीं होता. कुछ आवाजें और कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जो हमेशा दिल में जिंदा रहते हैं.





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