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43 साल पुराना गाना, जो असल में है कवि गिरिजा कुमार माथुर की कविता, महेंद्र कपूर की आवाज में आज भी देता है हौसला | 43 year old song hum honge kamyab song girija kumar mathur mahendra kapoor jaane bhi do yaaro



नई दिल्ली:

बॉलीवुड में 43 साल पहले एक गाना आया जो इतना पॉपुलर हुआ कि ये ना सिर्फ स्कूल-कॉलेजों में इंस्पिरेशनल सॉन्ग के तौर पर इस्तेमाल होने लगा. बल्कि इसे हौसला बढ़ाने वाले गाने के तौर पर भी देखा जाने लगा. ये गाना आंदोलनों तक में हौसलाअफजाई के लिए सुनाई देता है. इस तरह कुछ गीत सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं होते, बल्कि जिंदगी में आगे बढ़ने का हौसला भी देते हैं. ‘हम होंगे कामयाब’ ऐसा ही एक गीत है, जिसे स्कूलों, कॉलेजों और सामूहिक आयोजनों में आज भी गाया जाता है. महेंद्र कपूर की आवाज में फिल्म ‘जाने भी दो यारों (1983)’ के लिए रिकॉर्ड किया गया इसका फिल्मी संस्करण हिंदी सिनेमा के यादगार गीतों में शामिल है. खास यह कि इसकी जड़ें किसी फिल्मी कहानी में नहीं, बल्कि हिंदी साहित्य के मशूहर कवि गिरिजा कुमार माथुर की हिंदी कविता में हैं.

अंग्रेजी गीत से हिंदी कविता तक का सफर

‘हम होंगे कामयाब’ को समझने के लिए इसके पीछे की कहानी जानना जरूरी है. इस गीत का मूल अमेरिकी लोकगीत और नागरिक अधिकार आंदोलन से जुड़े अंग्रेजी गीत ‘वी शैल ओवरकम’ से जुड़ा है. यह गीत उम्मीद, एकजुटता और संघर्ष का प्रतीक बना. दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लोगों ने इसे अपनी भाषाओं में अपनाया और अपने सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भों के मुताबिक गाया. 

हिंदी में कवि गिरिजा कुमार माथुर ने इसका रूपांतरण किया. ‘हम होंगे कामयाब’ के शब्दों ने इसे भारतीय श्रोताओं के बीच एक खास पहचान दी. इसकी भाषा बहुत ही सहज है और संदेश बहुत ही सरलता से दिया गया है. ये पूरी कविता है…

होंगे कामयाब, होंगे कामयाब
हम होंगे कामयाब एक दिन
हो-हो मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब एक दिन

होंगी शांति चारो ओर
होंगी शांति चारो ओर
होंगी शांति चारो ओर एक दिन
हो-हो मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
होंगी शांति चारो ओर एक दिन

हम चलेंगे साथ-साथ
डाल हाथों में हाथ
हम चलेंगे साथ-साथ एक दिन
हो-हो मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
हम चलेंगे साथ-साथ एक दिन

नहीं डर किसी का आज
नहीं भय किसी का आज
नहीं डर किसी का आज के दिन
हो-हो मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
नहीं डर किसी का आज के दिन

हम होंगे कामयाब एक दिन

गिरिजा कुमार माथुर के बारे में

गिरिजा कुमार माथुर हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण कवियों में गिने जाते हैं. उनकी रचनाओं में आधुनिक संवेदना, मानवीय अनुभव और भाषा की सहजता दिखाई देती है. ‘हम होंगे कामयाब’ अपनी सहजता के लिए ही पहचानी जाती है. यह कविता किसी एक व्यक्ति की सफलता की बात नहीं करती. इसमें ‘हम’ की बात कहना है इसकी ताकत है. स्कूलों में, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और कॉलेजों के आयोजनों में इसे गाते हुए कई पीढ़ियां बड़ी हुई हैं. 

गिरिजा कुमार माथुर ‘तार सप्तक’ के प्रमुख कवियों में से हैं. उनका जन्म 22 अगस्त 1919 को मध्य प्रदेश के अशोक नगर में हुआ. उन्होंने हिंदी कविता में 1941 में मंजीर काव्य संग्रह से कदम रखा. 1943 में अज्ञेय संपादित तार सप्तक में भी उनकी कविताओं को शामिल किया गया. उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो पर लंबे समय तक काम किया. उनके कविता संग्र ‘मै वक्त के हूं सामने’ के लिए उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार और व्यास सम्मान से सम्मानित किया गया.

महेंद्र कपूर की आवाज में फिल्मी पहचान

महेंद्र कपूर हिंदी फिल्म संगीत के चर्चित गायकों में रहेय अपनी दमदार आवाज के लिए पहचाने जाने वाले महेंद्र कपूर ने ‘हम होंगे कामयाब’ के फिल्मी संस्करण को अलग पहचान दी. फिल्म ‘जाने भी दो यारों’ में इस गीत का इस्तेमाल उसके व्यंग्यात्मक और व्यवस्था पर सवाल उठाने वाले संसार से एक दिलचस्प रिश्ता बनाता है. जहां फिल्म भ्रष्टाचार, सत्ता, मीडिया और सामाजिक पाखंड पर तीखा कटाक्ष करती है, वहीं गीत उम्मीद और बेहतर भविष्य में विश्वास की याद दिलाता है.

‘जाने भी दो यारों’ क्यों है खास?

कुंदन शाह के निर्देशन में बनी ‘जाने भी दो यारों’ 1983 में रिलीज हुई थी. नसीरुद्दीन शाह, रवि बासवानी, ओम पुरी, पंकज कपूर, भक्ति बर्वे और सतीश शाह इसमें नजर आए. फिल्म की कहानी दो फोटोग्राफरों, विनोद और सुधीर, के इर्द-गिर्द घूमती है. वे अपने काम के दौरान भ्रष्टाचार और प्रभावशाली लोगों के ऐसे जाल में उलझ जाते हैं, जहां सच सामने लाना आसान नहीं है. फिल्म ने व्यंग्य के जरिए व्यवस्था की विसंगतियों को उजागर किया और समय के साथ कल्ट क्लासिक का दर्जा हासिल किया.




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