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‘छाती पर घूंसा मारा…’, दिल्ली मेट्रो में सीट का विवाद कैसे बन गया जानलेवा? भाई ने बताया उस दिन हुआ क्या था  | Delhi Metro Fight over senior citizens seat Pawan Sharma dies Delhi latest news 



नई दिल्ली:

दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन पर मेट्रो ट्रेन के अंदर सीनियर सिटीजन के लिए रिजर्व सीट को लेकर हुए विवाद के दौरान हमले के बाद 48 साल के पवन शर्मा की मौत हो गई. इस घटना से पूरा परिवार सदमे में है. अब तक वो विश्वास नहीं कर पा रहे हैं कि ये सब अचानक कैसे हो गया. मृतक पवन के छोटे भाई दीपक ने बताया कि उनकी छाती पर घूंसा मारा गया था. उन्होंने बताया कि पवन गुस्सैल इंसान नहीं थे. वो परिवार को साथ लेकर चलने वाले व्यक्ति थे और कभी किसी से झगड़ा नहीं करते थे.

टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में दीपक ने उस पूरी घटना का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि उनकी मां ने उन्हें फोन कर भाई की हमले में मौत की सूचना दी. मां ने उन्हें कहा, ‘उन लोगों ने तेरे भाई को मार दिया’. मेरा परिवार 2 नवंबर को उनका 49वां जन्मदिन मनाने की योजना बना रहा था, हम भाई के लिए एक सरप्राइज की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अब परिवार उनकी मौत के बाद जूझ रहा है. दीपक का आरोप है कि ये मौत उन दो लोगों की वजह से हुई है.

सीनियर सिटीजन के लिए रिजर्व सीट को लेकर झगड़ा

8 अक्टूबर को पवन और उनकी मां दुर्गा (65) गुड़गांव में बीमार दीपक से मिलकर अपने यमुना विहार स्थित घर लौट रहे थे. नोएडा के रहने वाले रिटायर्ड IAS अधिकारी संजय प्रताप सिंह और उनके बेटे सिद्धार्थ सिंह मंडी हाउस से ट्रेन में चढ़े. पुलिस के अनुसार, उन दोनों के बीच सीट को लेकर बहस शुरू हुई, जहां पवन और उनकी मां बैठे थे. दीपक ने बताया कि उनके भाई ने पहले ही सीट छोड़ दी थी, फिर भी उनके साथ बदतमीज़ी की गई. उन लोगों ने उन्हें खूब बुरा-भला कहा और फिर उस पर हमला कर दिया.

मृतक की मां दुर्गा के अनुसार, उन दोनों ने बदतमीजी से उनसे सीटें खाली करने को कहा. उन्होंने कहा, “हम उठ गए और मेरे बेटे ने उनसे कहा कि अब वे सीटों पर लेट सकते हैं. इतनी सी बात पर बड़े आदमी ने पवन का कॉलर पकड़ा और उसे थप्पड़ मारा. जब उसने विरोध किया, तो उस आदमी के बेटे ने उसके साथ मारपीट की. जब मैंने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो बड़े आदमी ने मुझे रोक दिया.”

पुलिस ने बताया कि जब ट्रेन शाम करीब 5:47 बजे सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन पहुंची, तो पवन बेहोश थे. उन्हें LNJP अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.

दीपक ने बताया कि फ़ोन पर अपनी मां की परेशान आवाज़ सुनकर उसने उन्हें वापस फ़ोन किया. उन्होंने बताया कि वह पवन को एम्बुलेंस से अस्पताल ले जा रही हैं. फिर उसने एम्बुलेंस स्टाफ़ से बात की, जिन्होंने उसे अस्पताल पहुंचने के लिए कहा.

दीपक के पहुंचने तक पवन की मौत हो चुकी थी. उसने कहा, “मेरी मां बेहोश हो रही थीं. अस्पताल के स्टाफ़ ने उन्हें कुछ नहीं बताया, लेकिन जब मैं वहां पहुंचा, तो मुझे बताया गया कि उसकी मौत हो चुकी है.”

परिवार ने एकमात्र कमाने वाले सदस्य को खो दिया

पवन की मौत के बाद उसकी पत्नी और दो बच्चे बेसहारा हो गए हैं. उनका 19 साल का बेटा कॉलेज में फर्स्ट इयर में है, जबकि 15 साल की बेटी 10वीं कक्षा में पढ़ती है. पवन क्लर्क का काम करते थे और परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे. पिता की मौत के बाद, पवन ने घर की ज़िम्मेदारी संभाल ली थी और परिवार का मुख्य सहारा थे. दीपक ने बताया कि उसे उम्मीद थी कि वह अपने बच्चों को बेहतर भविष्य देगा. लेकिन अब, सब कुछ खत्म हो गया है.

आरोपी पिता-पुत्र गिरफ़्तार

पुलिस ने मृतक की मां दुर्गा का बयान लिया है और पिता-पुत्र की जोड़ी के ख़िलाफ़ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया. ये धाराएं गैर-इरादतन हत्या (जो हत्या की श्रेणी में नहीं आती) और समान इरादे से किए गए कार्यों से संबंधित हैं. जांच ​​के दौरान मिले सबूतों के आधार पर दोनों लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

पुलिस सूत्रों ने बताया कि संजय प्रताप सिंह भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी हैं. सूत्रों ने बताया कि उन्हें इससे पहले कथित रिश्वत के एक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने गिरफ्तार किया था. सूत्रों के अनुसार, उनका बेटा उच्चतम न्यायालय में वकालत करता है.

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