
लखनऊ:
उत्तर प्रदेश कांग्रेस की नई प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ के औपचारिक पदभार ग्रहण से पहले पार्टी मुख्यालय में हुए हंगामे ने संगठन के अंदरूनी मतभेदों को उजागर कर दिया है. कार्यक्रम के दौरान दो गुटों के बीच नारेबाजी, धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने की घटना सामने आने के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने मामले को गंभीरता से लिया है. यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है. वहीं, जांच समिति के गठन को लेकर भी पार्टी के भीतर सवाल उठने लगे हैं.
बृजलाल खाबरी की अध्यक्षता में बनी जांच समिति
NDTV को प्राप्त जानकारी के अनुसार रविवार को कांग्रेस मुख्यालय में हुए विवाद की जांच के लिए पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बृजलाल खाबरी को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है. समिति में राष्ट्रीय सचिव एवं यूपी कांग्रेस के सह-प्रभारी अब्दुल हन्नान, अभिषेक दत्त, पूर्व सांसद रवि वर्मा और शमीना शफीक को सदस्य बनाया गया है. पार्टी सूत्रों के अनुसार समिति पूरे घटनाक्रम की जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.
समिति गठन पर भी उठ रहे सवाल
हंगामे की जांच के लिए अलग समिति गठित किए जाने पर पार्टी के अंदर चर्चा शुरू हो गई है. सवाल यह उठाए जा रहे हैं कि मामला अनुशासन से जुड़ा होने के बावजूद इसे अनुशासन समिति को सौंपने के बजाय अलग जांच समिति क्यों बनाई गई. इसके अलावा समिति में दो सह-प्रभारियों को शामिल किए जाने को लेकर भी संगठन के भीतर चर्चाएं तेज हैं. राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के बीच संबंध सहज नहीं माने जाते हैं.
पदभार ग्रहण के दौरान हुआ था विवाद
रविवार को आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने शारदीय नवरात्र के पहले दिन लखनऊ स्थित नेहरू भवन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पदभार संभाला. इसी दौरान पार्टी के दो गुट आमने-सामने आ गए. सूत्रों के मुताबिक एक गुट आराधना मिश्रा के समर्थन में नारे लगा रहा था, जबकि दूसरा गुट पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के समर्थन में नारेबाजी कर रहा था. देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और धक्का-मुक्की तक की नौबत आ गई.

पदभार ग्रहण करने के दौरान आराधना मिश्रा और अजय राय समेत मंच पर मौजूद कांग्रेस नेता
Photo Credit: यूपी कांग्रेस की सोशल मीडिया पोस्ट
भाजपा सरकार को घेरा, अभियान का ऐलान
पदभार संभालने के बाद आराधना मिश्रा ने लोकतंत्र, संविधान और मताधिकार की सुरक्षा के मुद्दे उठाए. उन्होंने मतदाता सूची, चुनावी निष्पक्षता और निर्वाचन आयोग की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए.
उन्होंने कहा कि 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लोकतांत्रिक संस्थाओं और संविधान के लिए महत्वपूर्ण चुनाव साबित होगा. गौरतलब है कि कांग्रेस ने 2 अक्टूबर को आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष और इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया था.
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