
मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी एयर एम्बुलेंस सेवा एक बार फिर सवालों के घेरे में है. दतिया के इंदरगढ़ निवासी गंभीर मरीज बालकृष्ण कुशवाहा को बेहतर उपचार के लिए भोपाल एम्स रेफर किया गया, लेकिन उसे एयरलिफ्ट कराने की प्रक्रिया में लंबा इंतजार करना पड़ा. परिजनों को मरीज को भोपाल पहुंचाने के लिए कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा. इस पूरे घटनाक्रम ने आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में समन्वय और एयर एम्बुलेंस की उपलब्धता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
फेफड़ों में पानी भरने पर जिला अस्पताल में कराया भर्ती
जानकारी के अनुसार, सेंवढ़ा ब्लॉक के इंदरगढ़ नगर के वार्ड क्रमांक 9 निवासी बालकृष्ण कुशवाहा के फेफड़ों में पानी भर जाने के कारण परिजनों ने उन्हें दतिया जिला अस्पताल में भर्ती कराया था. इसी दौरान मेडिकल कॉलेज के कुछ स्टूडेंट जिला अस्पताल पहुंचे.
आरोप है कि मरीज के मुंह के रास्ते नली डालने की प्रक्रिया के दौरान नली सही तरीके से नहीं डाली गई, जिससे फेफड़े में छेद हो गया. इसके बाद डॉक्टरों ने मरीज को ग्वालियर रेफर कर दिया. परिजनों के मुताबिक, ग्वालियर में उपचार संभव नहीं होने की बात सामने आने पर उन्होंने मरीज को भोपाल रेफर करने का अनुरोध किया, ताकि उसे बेहतर इलाज मिल सके.
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विधायक के प्रयास से मिली एयर एम्बुलेंस की अनुमति
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए दतिया विधायक घनश्याम सिंह ने उसे भोपाल पहुंचाने के लिए प्रयास किए. काफी मशक्कत के बाद मरीज को एयर एम्बुलेंस से भोपाल एम्स ले जाने की अनुमति मिली. इसके बाद मरीज को एयरलिफ्ट करने के लिए हेलीकॉप्टर दतिया पहुंचा, लेकिन उड़ान की अनुमति नहीं मिलने के कारण मरीज को तत्काल भोपाल नहीं ले जाया जा सका. बताया गया कि एयर ट्रैफिक कंट्रोल से हेलीकॉप्टर को वापस उड़ान भरने की अनुमति नहीं मिली. इसके चलते हेलीकॉप्टर को अगले दिन सुबह करीब 8 बजे उड़ान की अनुमति मिल सकी.
अगले दिन सुबह मरीज को दतिया हवाई पट्टी पहुंचा दिया गया, लेकिन वहां पायलट मौजूद नहीं था. जानकारी के मुताबिक, पायलट होटल में रुका हुआ था और सुबह करीब 10 बजे हवाई पट्टी पहुंचा. इसके बाद मरीज को भोपाल ले जाया गया, जहां एम्स में भर्ती कर उसका उपचार शुरू किया गया. फिलहाल मरीज का इलाज जारी है.
आपात स्थिति में कितनी कारगर है एयर एम्बुलेंस सेवा?
इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी एयर एम्बुलेंस सेवा की आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. गंभीर मरीजों के लिए एयर एम्बुलेंस का उद्देश्य कम से कम समय में उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है, लेकिन बालकृष्ण कुशवाहा के मामले में अनुमति, उड़ान और पायलट की उपलब्धता से जुड़ी परेशानियों के चलते उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ा.
सवाल यह है कि यदि किसी मरीज की स्थिति बेहद नाजुक हो और उसे तत्काल दूसरे शहर के अस्पताल में पहुंचाने की जरूरत पड़े, तो ऐसी परिस्थितियों में एयर एम्बुलेंस सेवा कितनी जल्दी उपलब्ध हो पाएगी? इस मामले में संबंधित विभागों की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है.
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