
Navratri 2026: नोएडा के आरव और अनन्या सुबह ऑफिस निकलते हैं और शाम को लौटते हैं. दोनों घर में कलश स्थापना करना चाहते हैं, लेकिन चिंता यह है कि दिनभर फ्लैट बंद रहेगा तो पूजा का क्या होगा.
मुंबई में अकेले रहने वाली स्नेहा अखंड ज्योति को लेकर परेशान हैं कि जलता दीया छोड़कर ऑफिस कैसे जाएं. वहीं बेंगलुरु के रोहन की शिफ्ट कभी सुबह की होती है तो कभी शाम की, वे सोच में हैं कि रोज अलग-अलग समय पर पूजा की तो कहीं नियम तो नहीं टूटेगा?
यह सिर्फ तीन लोगों का किस्सा नहीं है. नौकरीपेशा और अकेले रहने वाले ज्यादातर लोग नवरात्रि में इसी कशमकश में रहते हैं. सच यह है कि नौकरी की व्यस्तता के बीच भी आप पूरे विधि-विधान से कलश स्थापना कर सकते हैं, बस कुछ व्यावहारिक बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
क्या नौकरी करने वाले कलश स्थापना नहीं कर सकते?
नौकरी करना या दिनभर बाहर रहना कलश स्थापना में कोई रुकावट नहीं है. किसी भी प्रामाणिक पंचांग या धर्मशास्त्र में ऐसा नहीं लिखा कि घर में वही घटस्थापना करे जो पूरे दिन वहीं बैठा रहे.
शारदीय नवरात्रि में घटस्थापना 11 अक्टूबर 2026 को है. मुहूर्त केवल पहले दिन स्थापना का होता है. बाकी के नौ दिन सुबह-शाम की पूजा आप अपनी दिनचर्या और सुविधा के हिसाब से कभी भी कर सकते हैं. उसके लिए रोज मुहूर्त देखने की कोई जरूरत नहीं होती.
सुबह जल्दी निकलना हो तो दैनिक पूजा कैसे करें?
अगर सुबह भागदौड़ रहती है, तो पूजा की पूरी तैयारी रात को ही निपटा लें. रोली, चावल, धूपबत्ती, दीया और फूल रात में ही एक जगह रख लें.
सुबह उठकर नहाने के बाद 10 से 15 मिनट शांत मन से बैठें, कलश पूजन करें, भोग लगाएं और निकल जाएं. शाम को जब भी लौटें, हाथ-मुंह धोकर आरती कर लें. अगर दोनों वर्किंग हैं तो जिम्मेदारी बांट लें, एक सुबह पूजा कर ले और दूसरा शाम की आरती संभाल ले. पूजा में समय से ज्यादा आपके मन का भाव मायने रखता है.
क्या कलश स्थापना के साथ अखंड ज्योति जलाना जरूरी है?
बिल्कुल नहीं. यह सबसे बड़ा भ्रम है कि कलश रखा है तो अखंड ज्योति जलानी ही पड़ेगी. दोनों पूरी तरह अलग अनुष्ठान हैं. सामान्य घटस्थापना में केवल पूजा के समय दीया जलाने का नियम होता है.
अगर आप अकेले रहते हैं या दिनभर घर खाली रहता है, तो सुरक्षा को सबसे पहले रखें. बंद फ्लैट में जलता हुआ दीया छोड़कर जाना आग का बड़ा जोखिम है. ऐसी स्थिति में अखंड ज्योति का संकल्प कभी न लें. जब आप घर पर हों, तभी अपनी निगरानी में दीया जलाएं. पूजा का मतलब जोखिम उठाना नहीं होता.
रोटेशनल शिफ्ट में पूजा का समय कैसे तय करें?
अगर आपकी शिफ्ट बदलती रहती है, तो रोज एक ही तय समय पर पूजा करने का तनाव छोड़ दें. जब मॉर्निंग शिफ्ट हो तो सुबह जल्दी पूजा कर लें, नाइट शिफ्ट हो तो शाम को ड्यूटी जाने से पहले हाथ जोड़ लें.
समय कम हो तो लंबे पाठ के चक्कर में न पड़ें. दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती के संक्षिप्त श्लोक पढ़ लें. इतना भी वक्त न मिले तो मन ही मन देवी का नाम जपते हुए भी काम पर जा सकते हैं.
व्रत नहीं रख पाए तो क्या कलश स्थापना व्यर्थ होगी?
व्रत और कलश स्थापना दो अलग-अलग चीजें हैं. सेहत, दवाओं या भागदौड़ की वजह से व्रत संभव न हो, तो भी आप कलश स्थापना कर सकते हैं. ऐसे में नौ दिन तक बिना प्याज-लहसुन का सात्विक खाना खाएं, आचरण शुद्ध रखें और नियमित पूजा करें.
कलश स्थापना सिर्फ शुरुआत का अनुष्ठान नहीं है. अपनी व्यस्तता, क्षमता और सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही संकल्प लें. भक्ति सहज होनी चाहिए, कोई मानसिक दबाव नहीं.
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