
Indira Ekadashi Deepdan 2026: आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की इंदिरा एकादशी पितरों के मोक्ष और भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना का सबसे बड़ा दिन माना जाता है. इस दिन केवल व्रत रखना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि सूर्यास्त के तुरंत बाद गोधूलि वेला में किया जाने वाला दीपदान पितृदोष और दरिद्रता दोनों को एक साथ शांत करता है.
शास्त्रों में लिखा है कि पितृपक्ष की एकादशी पर संध्या काल में जलाए गए दीपकों की रोशनी सीधे पितृलोक तक मार्ग प्रशस्त करती है. शाम को गोधूलि बेला शुरू होते ही दीपदान की क्रिया आरंभ कर देना चाहिए.
दिल्ली से लेकर मुंबई तक: अपने शहर में दीपदान का सही समय
दीपदान का सबसे शुभ समय सूर्यास्त के तुरंत बाद प्रदोष काल यानी गोधूलि वेला में माना जाता है. आज इंदिरा एकादशी की शाम प्रमुख शहरों में दीप प्रज्वलित करने का समय:
- दिल्ली-एनसीआर: शाम 06:01 बजे से 07:15 बजे तक
- लखनऊ और कानपुर: शाम 05:48 बजे से
- वाराणसी और प्रयागराज: शाम 05:42 बजे से
- पटना, गया और भागलपुर: शाम 05:37 बजे से
- जयपुर: शाम 06:08 बजे से
- मुंबई और पुणे: शाम 06:22 बजे से
- अहमदाबाद: शाम 06:25 बजे से
पीपल के वृक्ष के नीचे पितरों के नाम रखें तिल के तेल का दीपक
इंदिरा एकादशी की शाम सबसे पहला और अनिवार्य दीपदान पीपल के वृक्ष की जड़ में किया जाता है. हिंदू धर्म में पीपल को त्रिदेवरूप और पितरों का निवास स्थल माना गया है. शाम को सूर्यास्त के बाद पीपल की जड़ के पास मिट्टी के दीपक में काले तिल और सरसों या तिल का तेल डालकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जलाना चाहिए.
यह दीपक पितरों की तृप्ति के लिए होता है. दीया प्रज्वलित करते समय पितरों का स्मरण करें और उनसे परिवार की सुख-शांति व वंश वृद्धि की प्रार्थना करें. पीपल के पास दीप रखने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए और सीधे घर लौटना चाहिए.
तुलसी के चबूतरे पर गाय के घी का दीया और स्पर्श से परहेज
दूसरा सबसे महत्वपूर्ण दीपक घर के आंगन में स्थापित तुलसी जी के पास रखा जाता है. एकादशी की शाम तुलसी के समक्ष केवल और केवल गाय के शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करने का विधान है.
शास्त्रों के अनुसार, इससे घर में मां लक्ष्मी का चिरस्थायी वास होता है और आर्थिक संकट कटते हैं. इस दौरान सबसे बड़ी सावधानी यह रखनी चाहिए कि शाम ढलने के बाद तुलसी के पौधे को भूलकर भी स्पर्श न करें और न ही उस समय जल चढ़ाएं. दीपक को तुलसी की जड़ से थोड़ी दूरी पर रखें और हाथ जोड़कर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का मानसिक स्मरण करें.
घर की चौखट और दक्षिण कोने में जलाएं नकारात्मकता नाशक तीसरा दीया
तीसरा दीपक घर की मुख्य चौखट पर दाहिनी ओर रखा जाता है. यह दीपक घर के भीतर किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा और पितृ असंतोष को प्रवेश करने से रोकता है. इसके अलावा यदि संभव हो, तो घर के सबसे दक्षिण कोने में भी एक छोटा चौमुखी दीपक यम और पितरों के निमित्त रखा जा सकता है.
मुख्य द्वार पर जलने वाला दीया घर में संपन्नता का मार्ग खोलता है. इन तीनों स्थानों पर सही तेल, सही दिशा और सही समय पर दीप प्रज्वलित करने से इंदिरा एकादशी का व्रत संपूर्ण और फलदायी माना जाता है.
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