खबर

आ रही महंगाई की महामार-खाने-पीने की चीजों पर दो-दो मंत्रियों की चेतावनी | shivraj singh chouhan and s jaishankar why warning food crisis


तेल और गैस संकट के बाद क्या अब अनाज संकट दस्तक देने वाला है? ये कोई अफवाह नहीं, बल्कि भारत सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों की चेतावनी है. दोनों ने साफ शब्दों में कहा है कि आने वाले महीनों में खाने-पीने के सामान का संकट हो सकता है. हालांकि, दोनों ने संकट के कारण अलग-अलग बताए हैं. मगर, दोनों ही कारण ठोस हैं और साफ दिखाई पड़ रहे हैं. ऐसे में इन चेतावनियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि अगले कुछ महीनों में अनाज का संकट दिखाई पड़ सकता है.

सबसे पहले विदेश मंत्री की बात समझिए

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चेतावनी दी कि दुनिया भर में चल रहे झगड़ों और उनके कारण अनाज की सप्लाई और खाद के उत्पादन में आ रही रुकावटों से आने वाले महीनों में खाने-पीने की चीजों का बड़ा संकट पैदा हो सकता है, जिससे विकासशील देशों पर बहुत ज़्यादा दबाव पड़ेगा. न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में बोलते हुए, विदेश मंत्री जयशंकर ने इन खतरों का सीधा संबंध ऊर्जा सप्लाई, अनाज के निर्यात, खाद और ग्लोबल फाइनेंस में आ रही भारी दिक्कतों से जोड़ा. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यूक्रेन संघर्ष और ईरान-खाड़ी संकट का गहरा असर उन देशों की सीमाओं से कहीं आगे तक महसूस किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर इसमें शामिल हैं.

Latest and Breaking News on NDTV

खेती-बाड़ी से जुड़ी दिक्कतों की गंभीरता बताते हुए उन्होंने कहा, “हम पहले ही खाद की भारी कमी देख रहे हैं.” साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि अनाज निर्यात करने वाले मुख्य देशों को शिपमेंट भेजने में, खासकर अहम ब्लैक सी कॉरिडोर के ज़रिए, भारी रुकावटों का सामना करना पड़ेगा. हालात की गंभीरता को देखते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने चेतावनी दी, “तो शायद आने वाले महीनों में खाने-पीने की चीजों का एक बड़ा संकट पैदा हो सकता है.” उनकी बातों से पता चलता है कि यह स्थिति सिस्टम से जुड़ा खतरा है, न कि कोई ऐसा नतीजा जो पहले ही हो चुका है.

एस जयशंकर ने इतिहास याद दिलाया

ऊर्जा सुरक्षा भी चिंता का एक और बड़ा कारण बनी हुई है. जयशंकर ने ये बताते हुए कि ग्लोबल मार्केट में सप्लाई की स्थिति तंग है, उन्होंने चेतावनी दी कि तेल की सप्लाई पर असर डालने वाले राजनीतिक फैसलों से कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ सकती हैं, ऐसे समय में जब देशों को मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिरता की बहुत जरूरत है; उन्होंने सप्लाई सुरक्षा और उससे जुड़े भू-राजनीतिक दखल को आपस में गहराई से जुड़े दबाव बताया. इसके असर सिर्फ महंगाई बढ़ने तक ही सीमित नहीं हैं.

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय झगड़ों की वजह से पैसा स्वाभाविक रूप से सुरक्षित वित्तीय जगहों की ओर चला जाता है, जिससे ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) से निवेश बाहर निकल जाता है. जो देश एक साथ भोजन, ईंधन, खाद और वित्त से जुड़े संकटों का सामना कर रहे हैं, उनके पास आगे की अस्थिरता को झेलने के लिए बहुत कम वित्तीय गुंजाइश बचती है.उन्होंने लोगों को याद दिलाया कि इतिहास गवाह है कि जब भी कहीं शासन-व्यवस्था चरमराई है, तो उसकी भारी कीमत वैश्विक सुरक्षा को चुकानी पड़ी है. इसलिए, बुनियादी जरूरतों को पूरा करना साझा समझ और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का मामला है.

कृषि मंत्री ने इन राज्यों में सूखे का ऐलान किया 

दिल्ली में रबी अभियान-2026 से जुड़े राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में 18 राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ संवाद के बाद कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि अभी तक कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश का रायलसीमा इलाका, तेलंगाना और राजस्थान का भी कुछ हिस्सा सूखे से प्रभावित हुआ है. हालांकि, कर्नाटक और महाराष्ट्र को छोड़कर दूसरे राज्यों से विस्तृत रिपोर्ट आना अभी बाकी है.  

Latest and Breaking News on NDTV
देश में सूखे के हालात पर शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा,”कर्नाटक सरकार ने हमसे कहा है कि एक केंद्रीय टीम सूखा प्रभावित इलाकों के आंकलन के लिए भेजी जाए. हमने तीन अक्टूबर को एक केंद्रीय टीम कर्नाटक भेजने का फैसला किया है. केंद्रीय टीम महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित इलाकों का भी दौरा करेगी. मैं स्वयं भी इन राज्यों का दौरा करुंगा. हम सूखा के संकट से निपटने के लिए राज्य सरकारों का पूरा सहयोग करेंगे.”

क्यों सूखे की स्थिति आई

इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन के दौरान देशभर में औसत से 12 फीसद कम बारिश रिकॉर्ड की गई. कुछ राज्यों में बारिश की कमी ज्यादा है. इस वजह से वहां के कुछ हिस्सों में सूखे के हालात हैं. सरकार के मुताबिक, इस वजह से खरीफ फसल की बुवाई औसत से सिर्फ एक फीसद ही कम हुई है. खराब मानसून की वजह से 16.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुवाई घटी है. वहीं बाढ़ और भारी बारिश की वजह से 6.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लगी फसलें प्रभावित हुई हैं. इन सबके बाद भी इस सीजन में उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी और तुअर (अरहर) जैसी फसलों का रकबा बढ़ा है. 

Latest and Breaking News on NDTV

देश में सूखे का क्या असर पड़ा है?

​प्राकृतिक मार से प्रभावित क्षेत्र के बारे में शिवराज सिंह ने बताया कि कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में भारी वर्षा, बाढ़ या सूखे से करीब 6,11,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल प्रभावित होने की प्रारंभिक सूचना मिली है, जिसके नुकसान का विस्तृत वैज्ञानिक आकलन कराया जा रहा है.

Latest and Breaking News on NDTV

सरकार के मुताबिक, इस साल कम बारिश की वजह से खरीफ फसल की बुवाई औसत से सिर्फ एक फीसद ही कम हुई है. इस साल 16.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुवाई घटी है और बाढ़ और भारी बारिश की वजह से 6.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लगी फसलें प्रभावित हुईं हैं.

यह भी पढ़ें-

यूपी में 100 से ज्यादा विधायकों के टिकट काट सकती है बीजेपी, सिर्फ एक शर्त पर मिलेगा सिंबल
 




Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button