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फ्लाईदुबई विमान हमला: NDTV रिपोर्टर ने कॉकपिट में बैठकर सुनाई खौफ के उन 84 मिनट की कहानी | Flydubai plane attack NDTV reporter recounts story of that terrifying moment from inside the cockpit



नई दिल्‍ली:

फ्लाईदुबई विमान हमला:  दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट के कॉकपिट में क्‍या हुआ होगा, जब भारतीय पायलट स्मित माछर पर उनके ओमानी को-पायलट ने हमला किया होगा? घायल होने के बाद स्मित माछर ने कैसे कॉकपिट का दरवाजा खोल, मदद के लिए यात्रियों को बुलाया होगा? कैसे तेजी से नीचे जाते विमान को स्मित ने यात्री की मदद से बैलेंस किया गया? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए एनडीटीवी के रिपोर्टर विष्‍णु सोम ने बोइंग 737 सीरीज के एक सिम्युलेटर (विमान कॉकपिट का नमूना) में इस घटना जैसे हालात को समझने की कोशिश की. इस दौरान विमान को 34,000 फीट की ऊंचाई पर रखा गया, जो घटना के समय फ्लाईदुबई विमान की ऊंचाई बताई गई है. इसके बाद विमान के नियंत्रण को अचानक नीचे की ओर करने पर विमान ने बेहद तेज गति से नीचे की ओर गोता लगाना शुरू कर दिया.    

डेढ़ मिनट में 34,000 फीट से लगभग 17,000 फीट नीचे

विमान करीब डेढ़ मिनट में 34,000 फीट से लगभग 17,000 फीट नीचे की ओर आ गया. इतनी तेजी से नीचे की ओर आने से विमान के ढांचे पर बेहद दबाव पड़ता है, जिससे विमान के किसी हिस्‍से को नुकसान हो सकता था. इसके बावजूद विमान का सुरक्षित रहना उसकी मजबूती को दिखाता है. सिम्युलेटर में विमान के कंट्रोल कॉलम, सेंटर पेडेस्टल, थ्रस्ट लीवर, स्पीड ब्रेक, फ्लैप और इंजन कंट्रोल जैसी व्यवस्थाएं मौजूद थीं. टॉपफ्लायर पायलट ट्रेनिंग अकेडमी (TopFlyer Pilot Training Academy) के कैप्टन सुजीत ओझा ने सिमुलेशन के जरिए बताया कि अगर 34,000 फीट की ऊंचाई पर कंट्रोल कॉलम को अचानक आगे की ओर धकेला जाए, तो विमान तेजी से नीचे की ओर पिच कर सकता है. ऐसी सिचुएशन में विमान को कंट्रोल करना काफी मुश्किल हो जाता है. 

कैप्टन ने लगाया 7700 इमरजेंसी कोड

को-पायलट के कुल्हाड़ी से हमले के बाद गंभीर रूप से घायल कैप्टन माछर ने कोड 7700 भेजा, जो सिम्युलेटर की स्क्रीन पर दिखाई दे रहा था. यह कोड एक स्टैंडर्ड ट्रांसपोंडर कोड है जिसका इस्तेमाल दुनिया भर के पायलट उड़ान के दौरान सामान्य इमरजेंसी घोषित करने के लिए करते हैं. दो और स्क्वॉक कोड हैं- 7500, जिसका इस्तेमाल आम तौर पर तब किया जाता है, जब विमान हाईजैक हो जाता है, और 7600, जिसका इस्तेमाल रेडियो कम्युनिकेशन फेल होने पर किया जाता है. कैप्टन माछर ने कोड 7700 का इस्तेमाल यह बताने के लिए किया कि कुछ गड़बड़ है, ताकि ट्रांसपोंडर (जो विमान के बारे में रियल-टाइम में ज़रूरी जानकारी देता है) को देखने वाला कोई भी व्यक्ति जान सके कि विमान किसी तरह की मुश्किल में है.

कॉकपिट से बाहर निकलना बना बड़ी चुनौती

11 सितंबर यानि 9/11 के आतंकवादी हमलों के बाद विमानों के कॉकपिट दरवाजों को सुरक्षा की दृष्टि से मजबूत और उड़ान के दौरान बाहर से प्रवेश को बेहद कठिन बनाया गया है. ऐसे दरवाजों को खोलने के लिए कॉकपिट के अंदर कंट्रोल सिस्‍टम और दरवाजे की हैंडल प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है. गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित कॉकपिट से बाहर निकलने में कामयाब रहे और यात्रियों को मदद के लिए बुलाया. विमान उस समय तेज नीचे की ओर जा रहा था, जिससे विमान के अंदर मौजूद लोगों काफी डरे हुए थे.

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स्मित माछर का बेहद साहसिक कदम 

कैप्टन सुजीत ओझा ने इस घटना को समझाते हुए बताया कि कैप्टन स्मिथ ने जो किया, वह बेहद बहादुरी भरा काम था, क्योंकि उन पर पहले ही हमला हो चुका था. विमान ‘नोज-डाउन’ स्थिति में था. इसका मतलब है कि उनके शरीर पर G-फोर्स लग रहा था, जिससे वे विमान के अगले हिस्से (नोज) की ओर जा रहे थे, लेकिन वे पिछले हिस्से की ओर गए, दरवाजा खोला और मदद के लिए चिल्लाए.

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