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ग्राउंड पर दिखें, होमवर्क करें… चिंतन बैठक में मोदी ने भविष्य की रणनीति को लेकर मंत्रियों का किया मार्गदर्शन | pm modi cabinet chintan baithak ministers performance review  



मोदी कैबिनेट के मंत्रियों के साथ दो दिन तक चिंतन बैठक की गई. जिसमें पीएम मोदी ने सभी मंत्रियों की क्‍लास की. मंत्रियों के प्रजेंटेशन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहे. इस दौरान उन्‍होंने कुछ नोटस भी बनाए. बैठक में सभी मंत्रियों को जमीन पर सक्रिय रहने के लिए कहा है. साथ ही, सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सबको मिले, यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. 

चिंतन बैठक में दो थीम पर चर्चा हुई- स्वयं का विकास और जन विश्वास से जन भागीदारी. सूत्रों के अनुसार, बैठक में मंत्रियों से कहा गया कि वे अपने क्षेत्र में चल रही 40-45 बड़ी सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी लें, यह सुनिश्चित करें कि इनका लाभ सबको मिले. मीडिया में बोलने से पहले ताजा मुद्दों और समस्याओं की जानकारी जुटाएं.

दरअसल, 23 से 24 सितंबर को हुई इस चिंतन बैठक में सरकार की योजनाओं और कामकाज के बारे में कई प्रजेंटेशन दिए गए. इस चिंतन शिविर का उद्देश्य मोदी 3.0 के आधे कार्यकाल का जायजा लेना और आगे के लिए कमर कसना है. विकसित भारत के संकल्प के साथ आयोजित इस चिंतन शिविर को मंत्रियों के प्रदर्शन और मंत्रिपरिषद में संभावित फेरबदल से भी देखा जा रहा है. मोदी सरकार की ओर से चिंतन शिविर को आगे भी जारी रखने का फैसला किया गया है. अगले सप्ताह फिर से सभी मंत्रियों की दो दिन की बैठक होगी.

प्रजेंटेशन के लिए 6 ग्रुप बनाए

चिंतन बैठक में प्रजेंटेशन के लिए 12 मंत्रियों के 6 ग्रुप बनाए गए थे. राजनाथ सिंह, निर्मला सीतारमन, गजेंद्र सिंह शेखावत, पीयूष गोयल समेत कुछ अन्‍य मंत्रियों ने प्रजेंटेशन दी थी. बैठक में व्यक्तिगत कुशलता, प्रभावी संचार, बेहतर ढंग से योजनाओं और फैसलों को लागू करना, मंत्रालयों का कामकाज और हितधारकों से चर्चा आदि मुद्दों पर बातचीत हुई. 

सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार की इस कवायद का मकसद विकसित भारत के मिशन पर हुई प्रगति की समीक्षा करना है. इस बार का चिंतन शिविर पहले हुए इस तरह के आयोजनों से अलग है. जिसमें नीतियों की समीक्षा और मंत्रियों के अनुभवों पर चर्चा हो रही है. सेवा तीर्थ में आयोजित इस चिंतन शिविर की रूपरेखा इस तरह बनाई गई है, जहां मंत्रियों के छोटे समूहों को आपस में खुल कर चर्चा करने का मौका मिला. 

तीन घंटे से अधिक चली हर ग्रुप की बैठक 

सभी 68 मंत्रियों ने इस मंथन में हिस्सा लिया है, इन्हें चार ग्रुप में बांटा गया. इस तरह हर ग्रुप में 17 मंत्री शामिल किए गए. हर ग्रुप के तीन सब ग्रुप बनाए गए, हर सब ग्रुप में दो मंत्रियों को समन्वय और प्रेजेंटेशन की जिम्मेदारी दी गई. पहले टॉपिक में सुशासन पर चर्चा केंद्रित रहीं और इसमें मंत्रियों के राजनीतिक और व्यक्तिगत विषयों को भी शामिल किया गया. हर ग्रुप की बैठक तीन घंटे से अधिक चली. 

इनमें सरकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा और धरातल पर उनके प्रभाव, ईज ऑफ लिविंग, समय प्रबंधन, योजनाओं का समय पर पूरा होना, इन्फ्रास्ट्रक्चर के बड़े प्रोजेक्ट की प्रगति और गति शक्ति जैसी पहल पर चर्चा शामिल है. व्यक्तिगत विषयों में मंत्रियों के एक दूसरे के बारे में अनुभव और उनके स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी शामिल है, ताकि काम के बोझ का असर न पड़े. विस्तार और गहन मंथन के लिए मंत्रियों को अलग-अलग रूम में बैठाया गया. हर थीम पर करीब डेढ़ घंटे चर्चा की गई, बीच में छोटा ब्रेक रहा. 

अगले दिन फ‍िर हो सकती है च‍िंतन बैठक 

चिंतन बैठक में दूसरा टॉपिक जनविश्वास से जनाधार है, इसमें लाभार्थियों के बारे में चर्चा और जो लोग विकास योजनाओं के दायरे में आने से छूट गए हैं, उन्हें शामिल करना आदि शामिल है. योजनाओं के लाभार्थियों का विस्तार करना भी चर्चा का एक प्रमुख विषय रहा. महत्वपूर्ण बात यह रही कि सभी प्रजेंटेशन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी मौजूद रहे और उन्होंने कई नोट्स लिए. चिंतन की यह कवायद आगे भी जारी रहेगी. सूत्रों के अनुसार, 30 सितंबर से एक अक्टूबर को फिर से चिंतन बैठक हो सकती है. जिसमें इसमें युवा और महिलाओं पर फोकस हो सकता है। 

मंत्रियों ने की थी अच्‍छी तैयारी 

चिंतन बैठक के लिए मंत्रियों ने जबरदस्त तैयारी थी, जिन मंत्रियों को समन्वय का काम सौंपा गया था उनके यहां कई दिनों तक बैठकों का सिलसिला जारी रहा. सरकारी सूत्रों के अनुसार, चिंतन बैठक के प्रजेंटेशन के लिए मंत्रालयों और विभागों के अलावा सचिवों के समूहों, कैबिनेट सचिवालय और नीति से भी इनपुट इकट्ठा किए गए. रिफॉर्म, ईज ऑफ लिविंग, कंपलायंस कम करना और सरकार की प्राथमिकताओं पर चर्चा मुख्य उद्देश्य है. 

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