

मोदी कैबिनेट के मंत्रियों के साथ दो दिन तक चिंतन बैठक की गई. जिसमें पीएम मोदी ने सभी मंत्रियों की क्लास की. मंत्रियों के प्रजेंटेशन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहे. इस दौरान उन्होंने कुछ नोटस भी बनाए. बैठक में सभी मंत्रियों को जमीन पर सक्रिय रहने के लिए कहा है. साथ ही, सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सबको मिले, यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.
दरअसल, 23 से 24 सितंबर को हुई इस चिंतन बैठक में सरकार की योजनाओं और कामकाज के बारे में कई प्रजेंटेशन दिए गए. इस चिंतन शिविर का उद्देश्य मोदी 3.0 के आधे कार्यकाल का जायजा लेना और आगे के लिए कमर कसना है. विकसित भारत के संकल्प के साथ आयोजित इस चिंतन शिविर को मंत्रियों के प्रदर्शन और मंत्रिपरिषद में संभावित फेरबदल से भी देखा जा रहा है. मोदी सरकार की ओर से चिंतन शिविर को आगे भी जारी रखने का फैसला किया गया है. अगले सप्ताह फिर से सभी मंत्रियों की दो दिन की बैठक होगी.
प्रजेंटेशन के लिए 6 ग्रुप बनाए
सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार की इस कवायद का मकसद विकसित भारत के मिशन पर हुई प्रगति की समीक्षा करना है. इस बार का चिंतन शिविर पहले हुए इस तरह के आयोजनों से अलग है. जिसमें नीतियों की समीक्षा और मंत्रियों के अनुभवों पर चर्चा हो रही है. सेवा तीर्थ में आयोजित इस चिंतन शिविर की रूपरेखा इस तरह बनाई गई है, जहां मंत्रियों के छोटे समूहों को आपस में खुल कर चर्चा करने का मौका मिला.
तीन घंटे से अधिक चली हर ग्रुप की बैठक
इनमें सरकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा और धरातल पर उनके प्रभाव, ईज ऑफ लिविंग, समय प्रबंधन, योजनाओं का समय पर पूरा होना, इन्फ्रास्ट्रक्चर के बड़े प्रोजेक्ट की प्रगति और गति शक्ति जैसी पहल पर चर्चा शामिल है. व्यक्तिगत विषयों में मंत्रियों के एक दूसरे के बारे में अनुभव और उनके स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी शामिल है, ताकि काम के बोझ का असर न पड़े. विस्तार और गहन मंथन के लिए मंत्रियों को अलग-अलग रूम में बैठाया गया. हर थीम पर करीब डेढ़ घंटे चर्चा की गई, बीच में छोटा ब्रेक रहा.
अगले दिन फिर हो सकती है चिंतन बैठक
मंत्रियों ने की थी अच्छी तैयारी
चिंतन बैठक के लिए मंत्रियों ने जबरदस्त तैयारी थी, जिन मंत्रियों को समन्वय का काम सौंपा गया था उनके यहां कई दिनों तक बैठकों का सिलसिला जारी रहा. सरकारी सूत्रों के अनुसार, चिंतन बैठक के प्रजेंटेशन के लिए मंत्रालयों और विभागों के अलावा सचिवों के समूहों, कैबिनेट सचिवालय और नीति से भी इनपुट इकट्ठा किए गए. रिफॉर्म, ईज ऑफ लिविंग, कंपलायंस कम करना और सरकार की प्राथमिकताओं पर चर्चा मुख्य उद्देश्य है.
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